नई दिल्ली । देश में डेयरी क्षेत्र को संगठित और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “श्वेत क्रांति 2.0” पहल तेजी से विस्तार पकड़ रही है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 22,332 बहुद्देशीय डेयरी सहकारी समितियां (एम-डीसीएस) पंजीकृत की जा चुकी हैं, जिनमें से 20,104 समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। यह जानकारी सहकारिता मंत्रालय से जारी आधिकारिक विवरण में दी गई है।
सरकार का कहना है कि यह पहल डेयरी क्षेत्र को संगठित ढांचे में लाने, किसानों की आय बढ़ाने और सहकारिता आधारित मॉडल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। श्वेत क्रांति 2.0 का उद्देश्य न केवल दुग्ध उत्पादन और संग्रहण बढ़ाना है, बल्कि मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और महिला भागीदारी को भी प्रोत्साहित करना है।
तेजी से बढ़ी डेयरी सहकारी समितियां
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के मुताबिक, 15 फरवरी 2023 से 24 दिसंबर 2024 तक देशभर में 9,429 बहुद्देशीय डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत हुई थीं। इसके बाद श्वेत क्रांति 2.0 के औपचारिक शुभारंभ के साथ इस संख्या में तेजी आई और 31 दिसंबर 2025 तक कुल पंजीकृत समितियों की संख्या 22,332 तक पहुंच गई। इनमें से 20,104 समितियां वर्तमान में सक्रिय हैं और किसानों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी सहकारिता के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छोटे व सीमांत किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। इससे दूध की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संगठित बनेगी।

असंगठित क्षेत्र की चुनौतियां
सरकार ने स्वीकार किया है कि अभी तक ऐसा कोई अलग अध्ययन नहीं हुआ है, जिससे यह स्पष्ट तुलना की जा सके कि श्वेत क्रांति 2.0 से जुड़ने के बाद किसानों की औसत मासिक आय में कितनी वृद्धि हुई है।
हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि असंगठित डेयरी क्षेत्र लंबे समय से कई समस्याओं से जूझ रहा है। इनमें दूध में मिलावट, किसानों का शोषण, उचित मूल्य का अभाव और मूल्य संवर्धन की कमी प्रमुख हैं। इन कारणों से किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता रहा है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए श्वेत क्रांति 2.0 को सहकारिता आधारित मॉडल के रूप में शुरू किया गया है, ताकि डेयरी क्षेत्र को अधिक संगठित, टिकाऊ और पारदर्शी बनाया जा सके।
क्या है श्वेत क्रांति 2.0 का लक्ष्य
श्वेत क्रांति 2.0 का उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में व्यापक सुधार लाना है। इसके प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं:
- सहकारी डेयरी नेटवर्क का विस्तार
- दूध संग्रहण और उत्पादन में वृद्धि
- प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
- महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला किसानों को सशक्त बनाना
- डेयरी क्षेत्र में टिकाऊ और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना
सरकार का मानना है कि इन उपायों से डेयरी किसानों को अधिक स्थायी और बेहतर आय प्राप्त करने में मदद मिलेगी, खासकर छोटे और सीमांत किसानों को।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर
श्वेत क्रांति 2.0 के तहत महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई राज्यों में महिला डेयरी सहकारी समितियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
महिला स्वयं सहायता समूहों को डेयरी गतिविधियों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में सहकारिता आधारित मॉडल के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन में भी कमी आ सकती है।
इसके अलावा, संगठित डेयरी नेटवर्क से दूध की गुणवत्ता में सुधार, मिलावट पर नियंत्रण और उपभोक्ताओं को सुरक्षित डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
आगे की राह
सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में श्वेत क्रांति 2.0 के तहत और अधिक सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। साथ ही, डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड चेन और विपणन नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा। हालांकि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि का आंकलन करने के लिए भविष्य में विस्तृत अध्ययन किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, श्वेत क्रांति 2.0 को भारत के डेयरी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक पहल माना जा रहा है। सहकारिता आधारित यह मॉडल किसानों को बेहतर कीमत, पारदर्शी व्यवस्था और स्थायी आय के अवसर प्रदान करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।











