जमशेदपुर : एम०जी०एम० थाना क्षेत्र अंतर्गत गोकुल नगर निवासी श्री जीत महतो की मृत्यु का मामला अब केवल एक चिकित्सीय प्रकरण न रहकर राजनीतिक आरोपों, प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ा विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम में जहां एक ओर मेडिकल रिपोर्ट सामने है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है।
श्री जीत महतो की मृत्यु के पश्चात दंडाधिकारी की उपस्थिति में विधिवत वीडियोग्राफी के साथ मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई तथा पोस्टमार्टम कराया गया। समीक्षा के दौरान मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार की बाह्य चोट, हिंसा या प्रताड़ना का कोई निशान नहीं पाया गया, जो प्रारंभिक तौर पर किसी शारीरिक अत्याचार की संभावना को नकारता है।
चिकित्सीय प्रतिवेदन का निष्कर्ष
एम०जी०एम० अस्पताल के ऑन-ड्यूटी चिकित्सक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि मृतक की मृत्यु का कारण Complicated Cerebral Malaria (जटिल सेरेब्रल मलेरिया) था। चिकित्सकीय दृष्टि से यह एक गंभीर और प्राणघातक स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क प्रभावित होता है और रोगी की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यही तथ्य मृत्यु के कारण के रूप में सामने आया है।
राजनीतिक हस्तक्षेप और गंभीर आरोप
इस प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब पूर्वी सिंहभूम सांसद विद्युत वरण महतो और पूर्व मंत्री झारखण्ड बन्ना गुप्ता और उनकी पत्नी सुधा गुप्ता ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। इन जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जीत महतो की मौत का मुख्य कारण स्थानीय पुलिस की भूमिका है। उनका आरोप है कि पुलिस की कार्यप्रणाली और घटनाक्रम में उसकी भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इस संदर्भ में यह भी उतना ही महत्वपूर्ण तथ्य है कि पोस्टमार्टम और चिकित्सीय रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से बीमारी बताया गया है, न कि किसी बाहरी चोट या हिंसा का परिणाम। यही कारण है कि आरोप और चिकित्सीय निष्कर्षों के बीच एक स्पष्ट विरोधाभास उभर कर सामने आता है।
न्यायिक जांच : संदेहों के समाधान की दिशा
इन्हीं विरोधाभासी दावों और जनआक्रोश की संभावनाओं को देखते हुए, संपूर्ण मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष न्यायिक जांच कराए जाने हेतु अनुरोध पत्र समर्पित किया गया है।
न्यायिक जांच के माध्यम से यह परखा जाएगा कि—
- पुलिस प्रशासन की भूमिका क्या थी
- चिकित्सीय उपचार समय पर और नियमानुसार हुआ या नहीं
- किसी स्तर पर लापरवाही या अधिकारों का उल्लंघन तो नहीं हुआ
यह मामला स्पष्ट करता है कि जब किसी मृत्यु को लेकर राजनीतिक आरोप, प्रशासनिक सफाई और चिकित्सीय निष्कर्ष एक साथ सामने आते हैं, तब केवल मेडिकल रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में न्यायिक जांच ही वह माध्यम है जो सच्चाई को तथ्यात्मक रूप से सामने ला सकती है।
जीत महतो मृत्यु प्रकरण में एक ओर पोस्टमार्टम रिपोर्ट मृत्यु का कारण Complicated Cerebral Malaria बताती है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोप मामले को और जटिल बनाते हैं। ऐसे में न्यायिक जांच का निर्णय न केवल समयोचित है, बल्कि यह जनविश्वास बनाए रखने, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और सच्चाई को अंतिम रूप से सामने लाने के लिए अत्यंत आवश्यक भी है। अब पूरे प्रकरण पर अंतिम स्पष्टता न्यायिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही संभव हो सकेगी।












