📍 जमशेदपुर, मानगो — क्षेत्र में बेकाबू सांड का आतंक लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार सुबह सुभाष कॉलोनी निवासी 61 वर्षीय शोमा सरकार की जान इस हिंसक सांड ने ले ली। सुबह वे अपने पति के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकली थीं, तभी अचानक बेकाबू सांड ने उन पर हमला कर दिया। स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल टीएमएच (टाटा मेन हॉस्पिटल) पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
भ्रामक सूचना बनी जानलेवा
स्थानीय समाजसेवी विकास सिंह ने बताया कि बुधवार शाम कुछ मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर फैलाई गई थी कि सांड को पकड़ लिया गया है। लोगों ने राहत की सांस ली और सामान्य दिनचर्या में लौट आए। लेकिन यह खबर झूठी निकली — वही सांड गुरुवार को फिर सक्रिय हो गया और शोमा सरकार की जान ले ली। विकास सिंह ने कहा, “लोगों ने झूठी वाहवाही के लिए भ्रामक सूचना फैलाई और उसका नतीजा किसी की जान जाने के रूप में सामने आया।”
लगातार दो दिन का आतंक
बुधवार को भी यही सांड शंकोसाई गौड़ बस्ती इलाके में 15 लोगों को घायल कर चुका था। जानकारी के अनुसार, उस दिन टाटा जूलॉजिकल पार्क की टीम ने सांड को ट्रैंक्यूलाइज कर बेहोश तो कर दिया था, लेकिन अंधेरा होने के कारण उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाना संभव नहीं हो पाया। रातभर सांड उसी इलाके में पड़ा रहा और सुबह होश में आते ही फिर हिंसक हो उठा।
स्थानीयों में दहशत और गुस्सा
इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों का आरोप है कि अगर प्रशासन ने बुधवार रात ही सांड को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया होता, तो गुरुवार की यह दर्दनाक घटना नहीं होती। पुलिस और टाटा जू की टीम ने घटना के बाद दोबारा कार्रवाई करते हुए सांड को काबू में लिया और उसे जू अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।
घायल अब भी अस्पताल में
बुधवार को घायल हुए 15 लोगों में से अधिकांश का इलाज एमजीएम अस्पताल में जारी है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को टीएमएच में भर्ती कराया गया है।
लोगों की मांग
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से आवारा पशुओं की नियमित निगरानी की माँग की है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे।
मानगो क्षेत्र में दो दिनों से जारी सांड आतंक ने शहर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर नागरिक भयभीत हैं, वहीं दूसरी ओर झूठी सूचनाओं का दुष्परिणाम समाज के लिए सबक बन गया है — सावधानी और सच्ची सूचना ही सुरक्षा की पहली शर्त है।












