श्रीनगर, 10 सितम्बर। हजरतबल दरगाह परिसर में लगे शिलापट पर अंकित राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चिह्न को तोड़ने की घटना ने कश्मीर में सियासी हलचल मचा दी है। पुलिस ने इसे गंभीर मानते हुए अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान, धार्मिक समारोह में अशांति फैलाने और हथियारों से चोट पहुंचाने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गैर-जमानती धाराओं में दर्ज हुआ केस
नगीन थाने में दर्ज एफआईआर (संख्या 76/2025) में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 300, 352, 191(2), 324(4), 196 और 61(2) सहित कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें दोष साबित होने पर छह माह से तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
26 लोग हिरासत में, आधिकारिक पुष्टि बाकी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में 26 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

राजनीतिक भूचाल
घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
- सीएम उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने दरगाह परिसर में राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की आलोचना करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
- वहीं, जम्मू-कश्मीर मुस्लिम वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी ने इसे आतंकी घटना से जोड़ते हुए कहा कि दोषियों पर पीएसए (पब्लिक सेफ्टी एक्ट) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह भूख हड़ताल करेंगी।
उपद्रवियों ने पत्थर से तोड़ा प्रतीक
दरगाह का हाल ही में सुंदरीकरण कार्य पूरा हुआ था और तीन दिन पहले ही इसे जनता को समर्पित किया गया था। शुक्रवार को नमाज-ए-जुमा के बाद हंगामा हुआ, जिसके दौरान उपद्रवियों ने पत्थर मारकर शिलापट पर अंकित राष्ट्रीय प्रतीक को क्षतिग्रस्त कर दिया।
पुलिस ने तेज की जांच
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की मदद से उपद्रवियों की पहचान में जुटी है।
निष्कर्ष
हजरतबल दरगाह परिसर में राष्ट्रीय प्रतीक तोड़ने की घटना ने कानून-व्यवस्था, धार्मिक आस्था और सियासत—तीनों को एक साथ झकझोर दिया है। अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
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