रांची | राजधानी रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल ‘लिटिल हार्ट हॉस्पिटल’ में नवजात शिशु की मौत छुपाकर तीन दिन तक इलाज के नाम पर पैसा वसूली का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जब परिजनों को बच्चा सौंपा गया तो उसका शव सड़ चुका था और उसमें कीड़े लग चुके थे।
बता दें की नवजात की मौत के बाद भी तीन दिनों तक अस्पताल इलाज के नाम पर परिजनों से पैसे वसूलता रहा, और जब शव सड़ने लगा, तब जाकर डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित किया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शव को वेंटिलेटर पर रखे जाने का झूठा दावा कर उन्हें लगातार गुमराह किया और इलाज के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूल लिए, जबकि परिवार के पास आयुष्मान भारत कार्ड भी था।
इस मामले ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों द्वारा अरगोड़ा थाना में एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद मामला गरमा गया है।
अरगोड़ा स्थित निजी अस्पताल पर मानवता को शर्मसार करने वाला आरोप, जांच के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
क्या है पूरा मामला?
- 4 जुलाई को मुकेश सिंह के बच्चे का जन्म सदर अस्पताल में हुआ।
- 8 जुलाई को सांस में तकलीफ की शिकायत के बाद बच्चे को लिटिल हार्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
- भर्ती के बाद से अस्पताल प्रबंधन बच्चे को परिजनों से नहीं मिलने दे रहा था।
- डॉक्टर बार-बार खून की मांग करते रहे, लेकिन बच्चे की हालत के बारे में कुछ नहीं बताया गया।
- शुक्रवार से बच्चे को पूरी तरह छिपाकर रखा गया और परिजनों को भ्रमित कर इलाज के नाम पर पैसे लिए गए।
- जब तीन दिन बाद शव सौंपा गया, तो शव में गलन और कीड़े लगे हुए थे।
- पैसे की वसूली का आरोप
- परिवार का आरोप है कि आयुष्मान भारत कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने ₹1 लाख से अधिक वसूले।
- परिजनों को बताया गया कि बच्चा वेंटिलेटर पर है, जबकि वह पहले ही मर चुका था।
FIR और पोस्टमार्टम
- बच्चे का शव गुरुवार की देर शाम रिम्स अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
- अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, और जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री की सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित निजी अस्पताल संचालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह मानवता के खिलाफ अपराध जैसा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मरीज से मिलने नहीं दिया गया तो स्वास्थ्य विभाग या मंत्री कार्यालय को पहले सूचना दी जानी चाहिए थी, लेकिन अब जब मामला सामने आ चुका है, तो सिविल सर्जन से विस्तृत रिपोर्ट मंगाई जाएगी।
डीसी ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश
रांची के उपायुक्त (डीसी) ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
इस समिति में शामिल होंगे: कार्यपालक दंडाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, एक विशेषज्ञ चिकित्सक
यह समिति नवजात की मौत, वेंटिलेटर पर रखने की सच्चाई और इलाज में लापरवाही की निष्पक्ष जांच करेगी।
मुख्य बिंदु (Highlights):
- नवजात की मौत के बाद शव को छिपाकर रखा गया
- इलाज के नाम पर तीन दिन तक पैसे की मांग
- शव सड़ चुका था, कीड़े लगे थे
स्वास्थ्य मंत्री और डीसी ने दिया जांच का आदेश, रिम्स में शव का पोस्टमार्टम, रिपोर्ट से खुलेगा सच













