दो नाबालिग लड़कियों की सच्ची कहानी: रात गहरी हो चुकी थी। पश्चिमी सिंहभूम के सोनुआ इलाके का गाँव, जहाँ हर कोई अपने घरों में चैन की नींद सो रहा था। लेकिन उसी रात, दो मासूम नाबालिग लड़कियाँ घर से बाहर निकलीं… वजह साधारण थी—शौच के लिए जाना।
उन्हें क्या पता था कि अंधेरे में कुछ परछाइयाँ पहले से घात लगाए बैठी हैं।
जैसे ही दोनों खेत की ओर बढ़ीं, अचानक पीछे से शोर उठा। एक छोटा हाथी वाहन उनके पास आकर रुका। इससे पहले कि वे कुछ समझ पातीं, नकाबपोश बदमाशों ने झपट्टा मारकर दोनों को गाड़ी में ठूंस दिया।
गाड़ी तेजी से आगे बढ़ी… और पीछे से एक दूसरी गाड़ी पीछा करने लगी। अब यह साफ था—यह कोई सोचीसमझी साजिश थी।
गाड़ी की रफ्तार कभी तेज, कभी धीमी हो रही थी। डर से दोनों के दिल की धड़कनें तेज हो चुकी थीं। चारों ओर अंधेरा, बीच जंगल, और अपहरणकर्ताओं से भरी गाड़ी…
लेकिन तभी उनमें से एक लड़की ने धीमी आवाज़ में फुसफुसाया—
“अगर अभी नहीं कूदे तो शायद कभी मौका नहीं मिलेगा…”
दूसरी ने उसकी आँखों में देखा और सिर हिला दिया।

गाड़ी जैसे ही स्पीड ब्रेकर पर धीमी हुई, दोनों ने अचानक दरवाज़ा धक्का देकर छलांग लगा दी। ज़ोरदार धमाके के साथ वे सड़क पर गिरीं… शरीर में चोटें लगीं, लेकिन डर पर हिम्मत भारी पड़ी।
वे दौड़ पड़ीं… दौड़ती रहीं…
पीछे से गाड़ियों की हेडलाइट्स अंधेरे को चीर रही थीं। लेकिन दोनों बिना पीछे देखे भागती चली गईं।
काफी दूर जाने के बाद उन्हें गाँव की कुछ रोशनियाँ दिखीं। यह गोइलकेरा थाना क्षेत्र का गोटम्बा गांव था। थकी, डरी और घायल लड़कियाँ वहाँ पहुँचीं और गाँव की सहिया के घर पनाह ली।
सुबह होते ही गाँव के मुखिया आए और दोनों को सुरक्षित सोनुआ थाना ले गए। वहाँ पुलिस को पूरी घटना बताई गई।
अब पुलिस अलर्ट हो चुकी है। अपहरणकर्ताओं की तलाश शुरू कर दी गई है। लेकिन एक सवाल आज भी हवा में तैर रहा है—
“क्या बदमाश दोबारा लौटेंगे?”
यह सोचकर ही गाँव के लोग सिहर उठते हैं।
यह कहानी किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती, लेकिन यह हकीकत है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ किसी हीरो ने नहीं, बल्कि दो मासूम नाबालिग लड़कियों ने अपनी हिम्मत से खुद की जान बचाई।
यह एक सच्ची घटना है जिसे कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि हर कोई दोनों लड़कियों की मनःस्थिति को समझ सके और वास्तविकता को महसूस कर सके। डर का सामना करके उन्होंने न केवल अपनी जान बचाई बल्कि हर लड़की को हिम्मत भी दी।

खबर के रूप में पढ़ें
अपहरणकर्ताओं की साजिश नाकाम : दो नाबालिग लड़कियों की बहादुरी से बची जान
पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र में बीती रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। शौच के लिए घर से निकलीं दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण कर लिया गया। लेकिन साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए दोनों ने बीच रास्ते गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचा ली।
जानकारी के मुताबिक, देर रात दोनों लड़कियां अपने घर के पास शौच के लिए गई थीं। तभी घात लगाए बदमाशों ने उन्हें जबरन पकड़ लिया और एक छोटा हाथी वाहन में बैठाकर ले गए। अपहरणकर्ता दो वाहनों में सवार थे। पहला वाहन जिसमें दोनों लड़कियां थीं, आगे बढ़ रहा था, जबकि दूसरा वाहन अपराधियों से भरा पीछे-पीछे चल रहा था।
रास्ते में जैसे ही वाहन की गति धीमी हुई, दोनों बहादुर लड़कियों ने मौका देखते ही छलांग लगा दी। अंधेरी रात और सुनसान रास्ते में जान जोखिम में डालते हुए वे भागते-भागते गोइलकेरा थाना क्षेत्र के गोटम्बा गांव पहुँच गईं। वहाँ उन्होंने सहिया के घर शरण ली।
सुबह घटना की जानकारी मिलते ही गांव के मुखिया मौके पर पहुँचे और दोनों को सुरक्षित सोनुआ थाना ले गए। पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अपहरणकर्ताओं की पहचान कर उन्हें पकड़ने के लिए छानबीन तेज कर दी है।
यह घटना न केवल इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कठिन परिस्थिति में साहस और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी विपत्ति से निकला जा सकता है।
सवाल यह है कि नाबालिग लड़कियों को अपहरण की साजिश रचने वाले अपराधी कब तक खुलेआम घूमेंगे? अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्द इस गिरोह को पकड़कर सलाखों के पीछे पहुँचाती है।
संवाददाता – जय कुमार, चाईबासा/सोनुआ













