जमशेदपुर, 29 सितम्बर 2025: भाजपा की डबल इंजन सरकार ने पहाड़ी और मैदानी समुदायों के बीच जानबूझकर विभाजन पैदा किया। इसका उद्देश्य था अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन, संपत्ति और धार्मिक प्रतिष्ठानों पर हमला कर समाज को बांटना तथा पहाड़, जंगल और खनिज संसाधनों को बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंपना।
झारखंड आंदोलन से जुड़े विभिन्न संगठनों, सामाजिक न्याय के कार्यकर्ताओं और जनांदोलन के प्रतिनिधियों ने आज एक संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए देशभर के मेहनतकश, आदिवासी, सदानी और अल्पसंख्यक समुदायों से अपील की है कि वे अपने बीच एकता बनाए रखें और भारत के संघीय ढांचे पर हो रहे सुनियोजित हमलों के खिलाफ आवाज उठाएं।
नेताओं ने कहा कि मणिपुर, लद्दाख, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कश्मीर और झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में आदिवासी, दलित, धार्मिक अल्पसंख्यक और दबे-कुचले समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और स्वायत्तता पर लगातार हमले हो रहे हैं। इन हमलों के पीछे आरएसएस-भाजपा की “एक राष्ट्र, एक भाषा, एक धर्म” की विचारधारा काम कर रही है, जिसका मकसद भारत की विविधता को खत्म करना और कारपोरेट पूंजी के हितों को साधना है।
मणिपुर की घटनाओं को उदाहरण बताते हुए कहा गया कि वहां भाजपा की डबल इंजन सरकार ने पहाड़ी और मैदानी समुदायों के बीच जानबूझकर विभाजन पैदा किया। इसका उद्देश्य था अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन, संपत्ति और धार्मिक प्रतिष्ठानों पर हमला कर समाज को बांटना तथा पहाड़, जंगल और खनिज संसाधनों को बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंपना।
लद्दाख में भी यही पैटर्न अपनाया जा रहा है, जहां सोनम वांगचुक जैसे शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग को कुचलने का प्रयास हुआ है। छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और स्वायत्तता को कमजोर करने की नीतियां लगातार जारी हैं। झारखंड को अपने आंतरिक मसलों में उलझाकर रखने की साजिश रची जा रही है, ताकि जनता राष्ट्रीय स्तर की इन चालों के खिलाफ एकजुट न हो सके।
नेताओं ने चेतावनी दी कि वर्तमान में चल रहे SIR (वोटर लिस्ट पुनरीक्षण) की प्रक्रिया को भी एक बड़े षड्यंत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। दबे-कुचले वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिशें की जा रही हैं। यह कदम उनकी राजनीतिक ताकत को कमजोर कर कॉरपोरेट समर्थित स्वर्णवादी सत्ता स्थापित करने का प्रयास है।
प्रेस बयान में झारखंड के लोगों से अपील की गई कि वे संकीर्ण राजनीतिक मतभेदों में उलझने के बजाय अपने साझा सामाजिक रिश्तों और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करें। वक्ताओं ने कहा कि हमारी वर्तमान सरकार से कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यह भी सच है कि एक सेकुलर और लोकतांत्रिक सरकार का बने रहना हमारी साझा इच्छा है। संघीय ढांचे और संविधान की रक्षा करना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने समाज से आह्वान किया कि एक-दूसरे के बीच एकता बनाए रखें, मणिपुर, लद्दाख, छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों के संघर्षों के साथ एकजुटता जताएं, संघीय ढांचे और संविधान पर हो रहे हमलों का विरोध करें, मतदाता सूची से अपना नाम हटने न दें, मताधिकार की रक्षा करें और कारपोरेट लूट व सांप्रदायिक विभाजन के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाएं।
झारखंड आंदोलन से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं ने संकल्प दोहराया कि वे भारत की विविधता, संघीय ढांचे और मेहनतकश तबकों—आदिवासी, सदानी, अल्पसंख्यक सभी समुदायों—के अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि एकजुट होकर ही इस साजिश को नाकाम किया जा सकता है।
हस्ताक्षरकर्ता:
- बिन्दे सोरेन, माझी बाबा, 18 मौजा पुंडसी पिंडा, (माझी महाल), जमशेदपुर
- अजीत तिर्की, संयोजक, झारखंड ऑर्गेनाइजेशन फॉर सोशल हार्मनी
- पुष्कर महतो, महासचिव, झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा (JASM)
- मदन मोहन सोरेन, भारत आदिवासी पार्टी, कोल्हान
- रजनी मुर्मू, आदिवासी स्त्रीवादी मंच
- अलोका कुजूर, झारखंड जनाधिकार महासभा
- दीपक रंजीत, झारखंड जनतांत्रिक महासभा
- नासिर खान, झारखंड आंदोलनकारी एवं सदस्य, संयोजक मंडल, झारखंड कौमी एकता मंच
- संगीता बेक, झारखंड घरेलू महिला कामगार यूनियन
- लक्ष्मी गोप, महिला उत्पीड़न विरोधी समिति
- विश्वजीत प्रमाणिक, झारखंड आंदोलनकारी, संयोजक JASM, कोल्हान
- गौतम कुमार बोस, झारखंड आंदोलनकारी














