वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क, अक्टूबर 2025: अमेरिका की रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) ने ऐसा तकनीकी कमाल कर दिखाया है जो आने वाले दशकों में ऊर्जा वितरण की परिभाषा ही बदल सकता है।
DARPA ने अपने नवीनतम प्रयोग में लगभग 5.3 मील (8.6 किलोमीटर) दूर तक बिना किसी तार के बिजली भेजने में सफलता हासिल की है। यह प्रयोग रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम “POWER” (Persistent Optical Wireless Energy Relay) के तहत किया गया — और इसे अब तक का सबसे लंबी दूरी का सुरक्षित वायरलेस पावर ट्रांसमिशन माना जा रहा है।
कैसे किया गया यह चमत्कार?
इस तकनीक में DARPA वैज्ञानिकों ने बिजली को सीधे हवा में नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली लेज़र बीम (Laser Beam) के रूप में भेजा।
- एक स्थान पर बिजली को लेज़र रूप में परिवर्तित किया गया।
- फिर इस बीम को सटीक फोकस कर 8 किलोमीटर दूर स्थित रिसीवर यूनिट पर भेजा गया।
- वहां लगे फोटोवोल्टाइक सेल (Solar Cell जैसी व्यवस्था) ने उस लेज़र को फिर से बिजली में बदल दिया।
परीक्षण में वैज्ञानिकों ने करीब 800 वॉट बिजली भेजी और उसका उपयोग पॉपकॉर्न बनाने जैसी छोटी गतिविधियों में किया — ताकि देखा जा सके कि वास्तविक ऊर्जा उपयोग किस हद तक संभव है।
DARPA की यह तकनीक क्यों खास है?
यह प्रयोग केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- अब जहां बिजली के तार नहीं पहुंच सकते, वहां भी ऊर्जा पहुंचाना संभव होगा।
- पहाड़ी इलाकों, रिमोट बेस कैंप्स, सैन्य ठिकानों और प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली तुरंत भेजी जा सकेगी।
- भविष्य में यह तकनीक ड्रोन, सैटेलाइट, इलेक्ट्रिक वाहन, यहाँ तक कि मोबाइल उपकरणों को भी बिना चार्जिंग तार के ऊर्जा देने में मदद कर सकती है।
भविष्य में संभावित उपयोग
1️⃣ सैन्य उपयोग — युद्ध क्षेत्र या दूरस्थ बेस पर उपकरणों और सेंसरों को लगातार ऊर्जा देना।
2️⃣ आपदा राहत कार्य — बाढ़, भूकंप या तूफ़ान के बाद जब बिजली व्यवस्था ठप हो जाए, तब हवा के जरिए बिजली भेजी जा सके।
3️⃣ ड्रोन और सैटेलाइट नेटवर्क — लंबे समय तक उड़ान बनाए रखने के लिए ड्रोन को हवा में ही चार्ज किया जा सकेगा।
4️⃣ नागरिक उपयोग — भविष्य में घर, ऑफिस और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी वायरलेस चार्जिंग जोन से ऊर्जा मिल सकेगी।
5️⃣ अंतरिक्ष मिशन — चंद्रमा या मंगल पर ऊर्जा आपूर्ति के लिए पृथ्वी या सौर उपग्रहों से बीम के ज़रिए बिजली भेजने की संभावनाएँ।
क्या चुनौतियाँ बाकी हैं?
हालांकि यह खोज क्रांतिकारी है, पर अभी इसे वाणिज्यिक स्तर पर लाने में कई तकनीकी अड़चनें हैं —
- लेज़र बीम की दिशा, मौसम और बाधाओं से प्रभावित होने का खतरा
- ऊर्जा रूपांतरण की सीमित दक्षता (Efficiency अभी बहुत कम है)
- सुरक्षा पहलू — इतनी शक्ति वाले लेज़र को खुले वातावरण में संचालित करने की चुनौतियाँ
- लागत और नियामक अनुमति की जटिलताएँ
विशेषज्ञों की राय
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज बिलकुल वैसी ही है जैसे इंटरनेट के शुरुआती दौर में वायरलेस नेटवर्क का जन्म हुआ था।
“आज हमने जो किया है, वह वैसा ही क्षण है जैसा कभी वाई-फाई की शुरुआत में हुआ था। आने वाले दशक में बिजली भी डेटा की तरह वायरलेस होकर हर जगह पहुंचेगी।” — DARPA वैज्ञानिक टीम सदस्य
DARPA का यह प्रयोग बताता है कि ऊर्जा का अगला युग वायरलेस युग होगा — जहाँ बिजली भी इंटरनेट सिग्नल की तरह हवा में बहती नज़र आएगी।
यह तकनीक अभी प्रयोगशाला स्तर पर है, पर आने वाले वर्षों में यह दुनिया की ऊर्जा प्रणाली को उतनी ही गहराई से बदल सकती है, जितनी इंटरनेट ने संचार जगत को बदला था।
🔋 “वायरलेस एनर्जी ट्रांसफर” — अब सपना नहीं, साकार होता भविष्य है।














