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झारखंड

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा इलेक्ट्रोल बांड की जानकारी चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय को अविलंब उपलब्ध कराये – आनन्द बिहारी दुबे

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा इलेक्ट्रोल बांड की जानकारी चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय को अविलंब उपलब्ध कराये - आनन्द बिहारी दुबे

जमशेदपुर : अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वाधान में जमशेदपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक मुख्य ब्रांच के समक्ष प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन जिलाध्यक्ष आनन्द बिहारी दुबे के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में भाजपा की चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक मानते हुए उसपर रोक लगा दी है। अदालत ने राजनीतिक दलों को इस योजना के तहत प्राप्त दान का खुलासा करने का निर्देश दिया साथ ही भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को चुनावी चंदे की पूरी जानकारी 6 मार्च 2024 से पहले सार्वजनिक करने और चुनाव आयोग को सौंपने का भी निर्देश दिया है। इस फैसले का देशभर में काले धन के खिलाफ निर्णायक कदम के तौर पर व्यापक स्वागत किया गया। चुनावी बांड योजना को प्राथमिक लाभार्थी होने के नाते सत्तारूढ भाजपा को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। 2017 में चुनावी बांड योजना की शुरुआत के बाद से राजनीतिक दलों को सामूहिक रूप से अनुमानत: 2,12,000 करोड रुपए से अधिक प्राप्त हुए। अकेले भाजपा को लगभग 86,566.11 करोड़ प्राप्त हुए। जो की कुल राशि का 55% है स्पष्ट रूप से भाजपा दानदाताओं के बारे में जानकारी सार्वजनिक होने के बाद चुनिंदा कॉर्पोरेट के साथ अपने संबंधों के संभावित जोखिम को लेकर चिंतित है।

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यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि मोदी सरकार ने भारतीय स्टेट बैंक पर जानकारी साझा न करने का दबाव डाला है। एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दायर किया जिसमें विवरण साझा करने के लिए 30 जून 2024 तक विस्तार की मांग की गई। जैसा कि आप जानते हैं चुनावी बांड की विवरण साझा करने में देरी संदिग्ध है, क्योंकि देश के सबसे बड़े और पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत बैंक को चुनावी बांड के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए 5 महीने की आवश्यकता क्यों ? जबकी स्टेट बैंक पूरी तरह से कम्प्यूटर युक्त है और डाटा मात्र एक दिन में भी उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे यह पता चलता है कि एसबीआई का इस्तेमाल भाजपा की वित्तीय अनियमिताओं और कालेधन के स्रोत को छिपाने के लिए किया जा रहा है। देश की जनता यह जान चुकी है कि किस तरह सरकारी एजेंसियों और संस्थानों पर दबाव डालकर सच्चाई को छुपाया जा रहा है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा इलेक्ट्रोल बांड की जानकारी चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय को अविलंब उपलब्ध कराये - आनन्द बिहारी दुबे

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के द्वारा उपरोक्त विषय को लेकर राष्ट्रव्यापी स्तर पर एसबीआई के मुख्यालयों पर प्रदर्शन के माध्यम से मांग की जाती है कि महामहिम राष्ट्रपति महोदया उपरोक्त विषय पर अपना निजी संज्ञान लेते हुए अभिलंब आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने का कृपा करें। उपरोक्त मांग पत्र जिला उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को जिला कांग्रेस कमिटी के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के द्वारा प्रेषित किया गया।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा इलेक्ट्रोल बांड की जानकारी चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय को अविलंब उपलब्ध कराये - आनन्द बिहारी दुबे

उपस्थित नेताओं में विशिष्ट अतिथि प्रदेश महामंत्री विजय खान, राकेश कुमार तिवारी, प्रदेश सचिव के के शुक्ला, रियाजुद्दीन खान, खगेनचन्द्र महतो, कार्यकारी अध्यक्ष नगर धर्मेन्द्र सोनकर, जिला उपाध्यक्ष ब्रजेन्द्र तिवारी, अवधेश सिंह, संजय सिंह आजाद, जितेन्द्र सिंह, अरूण कुमार सिंह, अमरजीत नाथ मिश्र, राजकिशोर यादव, महामंत्री राजेश चौधरी, बबलू झा, इंदुभुषण यादव, अतुल गुप्ता, अधिवक्ता उमेश कुमार सिंह, पुनीता चौधरी, नलिनी कुमारी, अमित दुबे, शमीम गद्दी, सचिन कुमार सिंह, सरोज पाण्डेय, रजनी चावला, शबाना परवीन, महामंत्री गुरदीप सिंह, दिबेश राज, बादशाह खान, रंजीत सिंह, प्रभात रंजन श्रीवास्तव, सतीश कुमार, राजा सिंह राजपूत, कुलदीप सिंह, सन्नी सिंह, उपेन्द्र नाथ वर्मा, अजय महतो, राजकिशोर प्रसाद, अमृत गुप्ता, कुमार गौरव, सरदार सुरेन्द्र सिंह, हरे कृष्णा लोहार, राकेश कुमार गुप्ता, मो सलीम, लक्की शर्मा, प्रशेनजीत सेन, मो नसीम, सीताराम चौधरी सहित कांग्रेसजन शामिल हुए।

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भवदीय
संजय सिंह आजाद
उपाध्यक्ष
पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी

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वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कथित सेक्युलर चेहरों से उतर गया नकाब : सुधीर कुमार पप्पू

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सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया है, जिसके बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथाकथित सेक्युलर चेहरों की असलियत अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को धोखा देने वाले नेताओं को अब आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में असंतोष बढ़ा है और मुस्लिम नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी इसका नुकसान होगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा भाजपा को समर्थन देना भी उनके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय अब उन्हें समर्थन नहीं देगा।

पप्पू ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जिसके जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है ताकि उन्हें पूंजीपतियों को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक गैर संवैधानिक है और इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है जो आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पक्ष और विपक्ष में तर्क:

इस विधेयक को लेकर सरकार का तर्क है कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का माध्यम है। विवादित संपत्तियों के निर्धारण, वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए इसमें कई प्रावधान जोड़े गए हैं। साथ ही, गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करने से समुदायों के बीच समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं दूसरी ओर, इसके विरोध में यह कहा जा रहा है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14, 15 और 300A का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से धारा 3E (Section 3E) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यह प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के उन सदस्यों को वक्फ के रूप में संपत्ति समर्पित करने के अधिकार से वंचित करता है जो इस्लाम धर्म अपना चुके हैं। अनुसूचित जातियों के विपरीत, अनुसूचित जनजातियों के सदस्य धर्म परिवर्तन के बाद भी अपनी जनजातीय पहचान नहीं खोते। ऐसे में इस्लाम अपनाने वाले जनजातीय व्यक्ति मुसलमान भी माने जाते हैं, परन्तु इस संशोधन द्वारा उन्हें अपने धर्म के एक आवश्यक अंग का पालन करने से रोका जा रहा है, जो कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 15 का भी उल्लंघन करता है क्योंकि यह धर्म के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के बीच और जनजातीय मुसलमानों के बीच भेदभाव करता है। इसके अतिरिक्त यह अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार को भी अप्रभावी बनाता है। इस प्रकार, यह संशोधन मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए।

निष्कर्षतः, वक्फ संशोधन विधेयक एक संवेदनशील और बहुआयामी विषय है जो धार्मिक अधिकार, अल्पसंख्यक संरक्षण और प्रशासनिक सुधार – तीनों के बीच संतुलन की मांग करता है। इसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि संविधान और न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

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रोटरी क्लब वेस्ट ने आयोजित किया प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र, डॉ. विक्रांत तिवारी ने साझा किए अनुभव

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THE NEWS FRAME

जमशेदपुर : रोटरी क्लब वेस्ट जमशेदपुर द्वारा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में एक प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रख्यात पर्यावरणविद् और सामाजिक उद्यमी डॉ. विक्रांत तिवारी, जिन्होंने अपने दो दशक से अधिक के कार्य अनुभव के आधार पर युवाओं और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।

डॉ. तिवारी का प्रेरणास्पद संदेश

आईआईएम कलकत्ता और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने अब तक 17 मिलियन से अधिक पेड़ों का रोपण करवाया है और कई एनजीओ को संसाधन जुटाने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम न केवल हरित भारत की कल्पना को साकार कर रही है, बल्कि आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में भी कार्य कर रही है।

डॉ. तिवारी ने छात्रों को बताया कि “पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि यह अब हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर छोटे लेकिन असरदार कदम उठाने होंगे।”

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विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम की सफलता में स्कूल प्रबंधन समिति, विशेष रूप से प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह, उप प्राचार्या और समन्वयक शिक्षकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने छात्रों को न केवल आयोजन से जोड़ा, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को व्यवहार में उतारने का संदेश भी दिया।

रोटरी क्लब की प्रतिबद्धता

रोटरी क्लब वेस्ट की यह पहल संगठन की स्थिरता, हरित भविष्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाती है। क्लब ने इस सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि वे न केवल समाज सेवा में, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

छात्रों में दिखा उत्साह

सत्र के दौरान छात्रों ने पर्यावरण से जुड़ी जिज्ञासाओं को खुलकर साझा किया और डॉ. तिवारी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में “प्रकृति से संवाद” विषय पर एक लघु प्रस्तुति ने सभी को भावुक और जागरूक कर दिया।

यह आयोजन न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी बना, जो भावी पीढ़ी को हरित और टिकाऊ भारत के निर्माण की दिशा में सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

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निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला के कई निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री जारी रखने का मामला सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जमशेदपुर अभिभावक संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7(अ)(3) के अनुसार स्कूल परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत स्कूल किसी भी प्रकार के व्यापारिक गतिविधि, जैसे किताबें, यूनिफॉर्म या जूते आदि की बिक्री के लिए अभिभावकों या छात्रों को बाध्य नहीं कर सकता।

जारी हैं व्यवसायिक गतिविधियाँ, आदेश की हो रही अनदेखी

अभिभावक संघ ने दावा किया है कि despite विभागीय आदेशों के बावजूद, जमशेदपुर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूल – जैसे सेंट मैरी स्कूल बिस्टुपुर, चिन्मया स्कूल बिस्टुपुर और जुस्को स्कूल बिस्टुपुर, अपने परिसरों में किताबों की बिक्री कर रहे हैं। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी डालता है।

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पिछले आदेशों की भी हो रही अनदेखी

ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि:

  • स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षण कार्यों के लिए किया जाए।
  • स्कूल किसी भी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य न करें।
  • किसी भी परिस्थिति में परिसर में किताब या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री न हो।

अभिभावक संघ का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद कई स्कूल खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित है।

कार्रवाई की मांग

डॉ. उमेश कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी स्कूलों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप न्यायसंगत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था शिक्षा के नाम पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा न दे सके।

संघ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है और चेताया है कि यदि इस पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावकों द्वारा जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।

वीडियो देखें : 

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