गिरिडीह/सरिया। जिले के बड़की सरिया नगर पंचायत पर शीत राहत कार्यक्रम के नाम पर बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगों और असहाय मजदूर वर्ग के लोगों के साथ धोखाधड़ी का गंभीर आरोप सामने आया है। यह मामला उस वक्त उजागर हुआ जब जिला उपायुक्त के निर्देशानुसार सरिया बाघा चौक स्थित एक सरकारी स्कूल में कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
500 लोगों को बुलाया, मिले गिने-चुने कंबल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत द्वारा कंबल वितरण के लिए लगभग 500 बुजुर्ग, गरीब और असहाय लोगों को बुलाया गया था। सभी लोगों का आधार सत्यापन (वेरिफिकेशन) भी कराया गया, जिससे लोगों को उम्मीद जगी कि उन्हें ठंड से राहत मिलेगी। लेकिन घंटों इंतजार के बाद स्थिति यह रही कि महज 50 से 100 कंबलों का ही वितरण किया गया, जबकि सैकड़ों लोग खाली हाथ लौटने को मजबूर हो गए।
सूचना पर पहुंचे संवाददाता, सवाल पूछते ही भड़के अधिकारी
कंबल कम वितरण की सूचना मिलने पर जब संवाददाता मौके पर खबर संकलन करने पहुंचे और नगर पंचायत के सुपरवाइजर गोपाल प्रसाद से केवल इतना पूछा कि “कंबल वितरण कौन कर रहे हैं?” — तभी वहां मौजूद एक अधिकारी अजीत कुमार अचानक भड़क गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारी ने संवाददाता से तीखे शब्दों में पूछा, “तुम कौन हो?” जब संवाददाता ने अपना परिचय दिया, तो अधिकारी और अधिक आक्रोशित हो गए और अपमानजनक लहजे में बोले— “कौन नक्षत्र चैनल? क्या होता है? कहां से टपक जाते हो?” इसके बाद वे बड़बड़ाते हुए अपनी सरकारी गाड़ी से मौके से निकल गए।
जवाबदेही से बचते दिखे जिम्मेदार लोग
अधिकारी के जाने के बाद स्थिति और भी चौंकाने वाली हो गई। कंबल वितरण में मौजूद अन्य जिम्मेदार लोग भी जवाबदेही लेने के बजाय धीरे-धीरे वहां से गायब होने लगे। मौके पर खड़े बुजुर्ग, विधवा और विकलांग लोग असहाय नजर आए और प्रशासनिक व्यवस्था को कोसते दिखे।
गरीबों के साथ छल, प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि शीत राहत के नाम पर गरीबों और असहायों के साथ खुला छल है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन के निर्देश पर कार्यक्रम आयोजित हुआ था, तो फिर
- कंबलों की संख्या इतनी कम क्यों थी?
- 500 लोगों को बुलाने के बाद सिर्फ 50–100 कंबल क्यों बांटे गए?
- सवाल पूछने पर अधिकारियों का व्यवहार इतना आक्रामक क्यों रहा?
निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे कंबल वितरण कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने में अब भी गंभीर खामियां मौजूद हैं।
गिरिडीह संवाददाता – संतोष कुमार तरवे










