जमशेदपुर । शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार, 5 सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम दोपहर बाद 4 बजे मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, गरम नाला के सभागार में होगा। संगोष्ठी का आयोजन स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट के तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय होंगे।
5 सितंबर को मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में कार्यक्रम, विधायक सरयू राय होंगे मुख्य अतिथि
इस अवसर पर जमशेदपुर पश्चिम और पूर्व विधानसभा क्षेत्र के सभी विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। विशेष रूप से क्षेत्र के प्रधानाध्यापकों और पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्रेरणास्त्रोत के रूप में सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, संगोष्ठी में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
विशेष आकर्षण :
- जमशेदपुर पश्चिम और पूर्व के सभी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मान
- तीन शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा आलेख प्रस्तुति
- प्रधानाध्यापकों व पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का विशेष सम्मान
- सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर गंभीर चर्चा
कार्यक्रम में तीन शिक्षा विशेषज्ञ अपने-अपने आलेख प्रस्तुत करेंगे, जिनमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर नई शिक्षा नीति के प्रभावों का विश्लेषण होगा। इसके बाद उपस्थित शिक्षकों से प्रतिक्रिया भी ली जाएगी।
संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षकों और अभिभावकों के बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि झारखंड में पिछले पाँच वर्षों में एनईपी को समग्रता में लागू करने की ठोस रणनीति विकसित नहीं हो पाई है। इसका असर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की पढ़ाई पर पड़ा है।
झारखंड में शिक्षा नीति से जुड़ी चुनौतियाँ
- आधारभूत संरचना का अभाव – स्कूलों में भवन, पुस्तकालय और प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं की कमी।
- शिक्षकों की कमी – योग्य शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षा का स्तर प्रभावित।
- नीतिगत असमंजस – घंटी आधारित शिक्षकों के समायोजन की सरकारी नीति से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर नकारात्मक असर।
इन सभी पहलुओं पर संगोष्ठी में गंभीर विमर्श होगा, ताकि आगे के लिए ठोस सुझाव और समाधान निकल सके।
यह संगोष्ठी न सिर्फ शिक्षकों के सम्मान का अवसर बनेगी, बल्कि शिक्षा के भविष्य को दिशा देने वाली सार्थक पहल भी साबित हो सकती है।














