जमशेदपुर:-जिला प्रशासन द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों के प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करना था।
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, ग्रामीण विकास, आपूर्ति, नगर निकाय, परिवहन सहित सभी तकनीकी विभागों के पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अंचलाधिकारी (सीओ) एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त ने विभागवार योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि आपसी संवादहीनता अथवा समन्वय के अभाव में किसी भी योजना की प्रगति बाधित नहीं होनी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि कई योजनाएं बहु-विभागीय प्रकृति की होती हैं, ऐसे में सभी संबंधित विभागों के बीच नियमित सूचना साझा करना और समय पर निर्णय लेना अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से आधारभूत संरचना निर्माण, भूमि हस्तांतरण, विद्युत संयोजन, भौतिक सत्यापन, लाभुक सत्यापन एवं भुगतान प्रक्रिया में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि शून्य ऑक्यूपेंसी, 50 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी अथवा वे छात्रावास जिनका संचालन तत्काल शुरू किया जा सकता है, उनका भौतिक सत्यापन कर कारणों को चिन्हित करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करें। वहीं स्कूल भवन निर्माण एवं हैंडओवर से संबंधित समस्याओं पर संबंधित बीडीओ और सीओ को प्राथमिकता के आधार पर समन्वय बनाकर प्रक्रिया पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।
मइयां सम्मान योजना के तहत एक लाख से अधिक लाभुकों का भौतिक सत्यापन लंबित होने पर उपायुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और शीघ्र सत्यापन पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि सत्यापन कार्य में किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि की शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध तत्काल सेवा से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा जिन विभागों को अंचल से भूमि हस्तांतरित की जा चुकी है, उन स्थलों पर संबंधित विभाग को बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया। आदिम जनजाति सबर परिवारों को लेकर सभी प्रखंडों में कराए गए सर्वे की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बीडीओ को निर्देशित किया कि सबर समुदाय के बच्चों में ड्रॉप-आउट की संख्या कम करें, उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ें और समुदाय के प्रत्येक परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए सैचुरेशन मोड में लाएं।
समीक्षा के दौरान कुछ योजनाओं में तकनीकी एवं प्रशासनिक कारणों से विलंब की बात सामने आई। इस पर उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि आपसी समन्वय से इन समस्याओं का शीघ्र समाधान करें ताकि लाभुकों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्त करना नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।














