- इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो अपलोड करने वाला युवक गिरफ़्त में, POCSO और IT एक्ट में केस दर्ज
शाहजहांपुर पुलिस ने NCMEC साइबर टिपलाइन रिपोर्ट पर कार्रवाई की। Instagram पर 28 अगस्त को 26 बाल पोर्नो वीडियो अपलोड करने वाले रितिक शुक्ला के खिलाफ POCSO, IT Act धारा 67B और 296 BNS में FIR। डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित। साइबर क्राइम पर सतर्कता बढ़ी।
POCSO Act और IT Act के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज
शाहजहांपुर: शाहजहांपुर। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से प्राप्त साइबर टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर शाहजहांपुर पुलिस ने बाल पोर्नोग्राफी से जुड़े एक गंभीर मामले में POCSO Act और IT Act के प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामला थाना सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र का है, जहाँ एक युवक पर इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से संबंधित वीडियो अपलोड करने का आरोप लगा है।
साइबर क्राइम मुख्यालय, लखनऊ से SP शाहजहांपुर को भेजी गई NCMEC Cyber Tipline Report के अनुसार, 28 अगस्त 2025 को दोपहर 2:57 बजे ‘विराट’ नामक व्यक्ति के इंस्टाग्राम अकाउंट से कुल 26 अश्लील और बाल यौन शोषण संबंधित वीडियो अपलोड किए गए थे। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल उत्पीड़न निगरानी केंद्र (NCMEC) द्वारा तैयार की गई थी, जिसे गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल के माध्यम से पुलिस को भेजा गया।

जांच में तकनीकी साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट रितिक शुक्ला, निवासी ग्राम महुआगुंडे, थाना सेहरामऊ उत्तरी, (पिन-262122) के मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड था। पुलिस ने मोबाइल और सोशल मीडिया डेटा, IP लॉग, और सिम रजिस्ट्रेशन विवरण की पुष्टि कर साक्ष्य एकत्रित किए हैं।
थाना सेहरामऊ उत्तरी के उप निरीक्षक संतोष कुमार की रिपोर्ट पर आरोपी के विरुद्ध धारा 296 बीएनएस तथा आईटी एक्ट की धारा 67B के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने प्राप्त डिजिटल डेटा, साइबर रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की सॉफ्ट कॉपी पेन ड्राइव में सुरक्षित रखी है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला भारत सरकार की साइबर निगरानी प्रणाली के तहत पकड़ा गया है। साइबर सेल के अनुसार, बाल अश्लीलता और ऑनलाइन शोषण से जुड़ी गतिविधियों पर देशभर में निगरानी बढ़ा दी गई है तथा ऐसे मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिपोर्ट साइबर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता है, जो इंटरनेट पर बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ की सक्रियता सराहनीय है, जो अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट को स्थानीय कार्रवाई में बदलती है। डिजिटल साक्ष्यों का पेन ड्राइव में संरक्षण फॉरेंसिक जांच को मजबूत बनाता है। यह POCSO-IT एक्ट संयोजन ऑनलाइन बाल शोषण रोकने में सफल उदाहरण है।
POCSO एक्ट
POCSO एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, हमला, उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए बनाया गया है। यह लिंग-तटस्थ कानून है, जो लड़के-लड़कियों दोनों की रक्षा करता है। अपराधों में प्रवेशक यौन हमला (धारा 3), गंभीर हमला (धारा 5), यौन उत्पीड़न और बाल पोर्नोग्राफी शामिल हैं।
IT एक्ट की धारा 67B
IT एक्ट 2000 की धारा 67B बाल यौन सामग्री के प्रकाशन, प्रसारण या संग्रहण को दंडित करती है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील वीडियो/फोटो अपलोड या शेयर करने पर 5 वर्ष तक कैद और जुर्माना पहली बार में, दोबारा अपराध पर 10 वर्ष कैद। यह साइबर अपराधों पर केंद्रित है।
सजाएं और प्रक्रिया
POCSO में अपराध की गंभीरता पर 3 वर्ष से आजीवन कारावास या मृत्युदंड (2019 संशोधन)। विशेष अदालतें त्वरित सुनवाई करती हैं, पीड़ित की गोपनीयता सुनिश्चित। झूठी शिकायत पर 6 माह कैद। IT एक्ट के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई होती है।
सोशल मीडिया पर बाल सुरक्षा सर्वोपरि है – संदिग्ध सामग्री तुरंत साइबर टिपलाइन पर रिपोर्ट करें। माता-पिता बच्चों के ऑनलाइन उपयोग की निगरानी करें, पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर रही है। जागरूकता ही रोकथाम का आधार है।
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