विशेष संवाददाता | नई दिल्ली/आईएनएस विक्रांत | 20 अक्टूबर 2025
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज आईएनएस विक्रांत पर सशस्त्र बलों के वीर जवानों के साथ दिवाली का पर्व मनाया और उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन, यह क्षण और यह दृश्य — “अद्भुत” है। प्रधानमंत्री ने कहा, “एक ओर विशाल समुद्र की असीमता है और दूसरी ओर भारत माता के वीर सैनिकों की अजेय शक्ति।”
श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि समुद्र पर चमकती सूर्य किरणें दीपावली के दीपों की भांति हैं — “जो भारतीय वीरों की बहादुरी और आत्मबल की दिव्य माला बनाती हैं।” उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया कि वे भारतीय नौसेना के जवानों के बीच दीपावली मना रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत पर बिताई अपनी रात को “अविस्मरणीय अनुभव” बताते हुए कहा कि यह दिवाली उनके जीवन की सबसे यादगार दीपावली रही। उन्होंने देश के 140 करोड़ नागरिकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र को समर्पित करने के क्षण को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा — “विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की कड़ी मेहनत, प्रतिभा और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रमाण है।” उन्होंने कहा कि “विक्रांत का नाम ही दुश्मन के दुस्साहस को समाप्त करने के लिए पर्याप्त है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत की सेनाएँ आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति कर चुकी हैं।
उन्होंने बताया —
- अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का स्वदेशी रक्षा उत्पादन हो चुका है।
- 2014 से अब तक भारतीय शिपयार्ड ने 40 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियाँ नौसेना को सौंपे हैं।
- औसतन हर 40 दिन में एक नया स्वदेशी पोत नौसेना में शामिल हो रहा है।
उन्होंने गर्वपूर्वक कहा कि ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों ने अपनी क्षमता से दुनिया को प्रभावित किया है और कई देश भारत से इन मिसाइलों को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत आज दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में स्थान पाने की दिशा में अग्रसर है, और रक्षा निर्यात में पिछले दशक में 30 गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा — “हमारा विज्ञान, समृद्धि और शक्ति मानवता की सेवा और सुरक्षा के लिए है — ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय यही भारत की परंपरा रही है।”
श्री मोदी ने भारतीय नौसेना को “हिंद महासागर का संरक्षक” बताते हुए कहा कि विश्व की 66% तेल आपूर्ति और 50% कंटेनर शिपमेंट इसी मार्ग से गुजरते हैं, और नौसेना इनकी सुरक्षा में निरंतर तत्पर है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और तटरक्षक बल, सभी मिलकर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की अजेय ढाल हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और माओवादी आतंकवाद के लगभग समाप्त होने को भारतीय सुरक्षा बलों की वीरता, समर्पण और बलिदान का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा — “2014 से पहले 125 जिले माओवादी हिंसा से प्रभावित थे, अब यह संख्या घटकर मात्र 11 रह गई है। आज सैकड़ों गांव पहली बार भयमुक्त होकर दीपावली मना रहे हैं।”
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा —
“हमारी सेनाएँ केवल धारा के साथ नहीं चलतीं, वे धारा को दिशा देती हैं। पर्वतों की ऊँचाइयाँ और समुद्र की गहराइयाँ भारत की विजय का प्रतीक बनेंगी। और जब ये गर्जना गूँजेगी, तो एक ही स्वर उठेगा — भारत माता की जय!”
प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “भारत आज आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और अदम्य राष्ट्रशक्ति के पथ पर अग्रसर है।”
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(विशेष रिपोर्ट: द न्यूज़ फ्रेम, राष्ट्रीय डेस्क)













