जमशेदपुर: टाटा स्टील और टाटा स्टील फाउंडेशन ने जमीनी स्तर की महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी पहल के तहत नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने का अवसर प्रदान किया। भारत मंडपम में हुए इस राष्ट्रीय समिट के अंतर्गत पहली बार आयोजित ‘टाटा एआई सखी इमर्शन प्रोग्राम’ में झारखंड, ओडिशा और लुधियाना से जुड़ी 600 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया।
भारत सरकार द्वारा आयोजित और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नेतृत्व में संचालित इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य जमीनी स्तर की महिलाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग से परिचित कराना और उन्हें आजीविका, उद्यमिता तथा डिजिटल कौशल में सक्षम बनाना था। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और डिजिटल दुनिया से जुड़ने का अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एलायंस फॉर ग्लोबल गुड, जेंडर, इक्विटी एंड इक्वैलिटी (सीआईआई) की अध्यक्ष स्मृति ईरानी उपस्थित रहीं। उनके साथ टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय, विभिन्न सरकारी अधिकारी और टाटा समूह की कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। समिट में कुल 1600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 635 महिलाएं टाटा स्टील फाउंडेशन से जुड़ी थीं। इनमें झारखंड से 311, ओडिशा से 315 और लुधियाना से 9 महिलाएं शामिल थीं।
इस इमर्सिव कार्यशाला में प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई तकनीक किस प्रकार रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान, आजीविका बढ़ाने, उत्पाद डिजाइन, विपणन, दस्तावेजीकरण और सरकारी योजनाओं तक पहुंच में सहायक हो सकती है। महिलाओं ने छोटे-छोटे समूहों में प्रशिक्षित मेंटर्स के मार्गदर्शन में एआई टूल्स का व्यावहारिक उपयोग समझा।
टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा लाई गई प्रतिभागियों ने विभिन्न सामुदायिक पहलों का प्रतिनिधित्व किया। इनमें स्वास्थ्य कार्यक्रम (मानसी+), कृषि आधारित आजीविका, महिला नेतृत्व (दिशा), सामुदायिक उद्यम (नवजीवन, सृजनिका, प्रगति) और जनजातीय पहचान से जुड़ी पहलें (संवाद, जोहार हाट) शामिल थीं। इससे संगठन के समावेशी और एकीकृत विकास मॉडल की झलक देखने को मिली।
टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने कहा कि संस्था लंबे समय से महिलाओं के नेतृत्व और आजीविका सशक्तिकरण पर काम कर रही है और एआई सखी इमर्शन उसी प्रयास का विस्तार है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की महिलाओं को एआई के व्यावहारिक उपयोग से जोड़कर उन्हें आर्थिक अवसरों का विस्तार, जानकारी तक बेहतर पहुंच और दैनिक चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम बनाया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाली सभी महिलाओं की जिज्ञासा और सीखने की तत्परता की सराहना की।
समिट में एक सांस्कृतिक पहल भी देखने को मिली, जहां टाटा समूह की विभिन्न योजनाओं से जुड़ी 1600 महिलाओं ने तसर सिल्क के शॉल धारण किए। ये शॉल टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा समर्थित ‘नवजीवन’ उत्पादक समूह से खरीदे गए थे। इससे ग्रामीण कारीगरों को अतिरिक्त आय का अवसर मिला और राष्ट्रीय मंच पर जनजातीय वस्त्र परंपरा को भी प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को उनकी डिजिटल समझ और आकांक्षाओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में बांटा गया। कारीगर महिलाओं ने एआई आधारित डिजाइन और मार्केटिंग की संभावनाएं जानीं, जबकि डिजिटल रूप से साक्षर महिलाओं ने दस्तावेजीकरण, संचार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच में एआई के उपयोग को समझा। उन्नत प्रतिभागियों ने एआई टूल्स के जरिए व्यवसाय विस्तार और नए कौशल विकसित करने के अवसरों का भी अनुभव लिया।
टाटा स्टील फाउंडेशन की यह पहल डिजिटल समावेशन और महिला-नेतृत्व वाले विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं का मानना है कि एआई की समझ उन्हें अपने काम, समुदाय और आजीविका को नए स्तर तक ले जाने में मदद करेगी।











