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रचनात्मकता, संस्कृति और तकनीक की सहयात्रा — नौवां अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव 2025

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On: December 14, 2025 8:58 PM
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नौवां अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव 2025 :  दिसंबर 2025 में हिंदी की चमक लौहनगरी में एक बार फिर लौट रही है। 17, 18 और 19 दिसंबर को आयोजित होने वाले श्रीनाथ अंतर्राष्ट्रीय हिंदी महोत्सव तीन दिनों तक अनगिनत सांस्कृतिक और रचनात्मक अनुभवों से शहर को सराबोर कर देगा। इस खास आयोजन में साहित्य की खुशबू, संस्कृति की रौनक, शिक्षा और सृजन की नई उड़ान के साथ-साथ मन को छू लेने वाली संगीत प्रस्तुतियाँ सम्मिलित होंगी।

यह ऐसा उत्सव है जहाँ हिंदी सिर्फ बोली नहीं जाती, बल्कि पूरे मनोयोग से आत्मसात की जाती है। दिनांक 17, 18 और 19 दिसंबर को आयोजित होने वाले नौवां अन्तर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिन्दी महोत्सव  अपने विकास की यात्रा में एक नए पड़ाव पर पहुँच चुका है। यह महोत्सव आज जिस ऊँचाई पर खड़ा है, वहाँ तक पहुँचने के पीछे विद्यार्थियों, हिन्दी शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, कला–साधकों, तकनीकी विशेषज्ञों और सामाजिक–राजनीतिक व्यक्तित्वों का निरंतर बढ़ता सहयोग रहा है। वर्षों पहले यह आयोजन एक छोटे से क्षेत्रीय मंच के रूप में आरंभ हुआ था, पर समय के साथ इसकी लोकप्रियता ऐसी बढ़ी कि अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बन चुकी है।

आरंभिक चरणों में यह उत्सव केवल कोल्हान प्रमंडल के महाविद्यालयों तक सीमित था। उस समय प्रतियोगिताएँ भी सिर्फ अंतर–महाविद्यालय स्तर पर ही होती थीं। धीरे–धीरे जब झारखण्ड के दूरस्थ इलाकों से युवा इसमें शामिल होने लगे, तब यह महोत्सव प्रदेश–स्तरीय स्वरूप लेने लगा। ग्रामीण क्षेत्रों से विद्यार्थियों का उत्साह और उनके साथ आने वाले शिक्षकों का मार्गदर्शन, आयोजन के दायरे को और विस्तृत करता गया।

साल 2021 में विश्वविद्यालय की स्थापना ने महोत्सव की दिशा ही बदल दी। पहली बार विद्यालय स्तर के बच्चों को भी इस उत्सव का हिस्सा बनाया गया। किशोरवय प्रतिभाओं को जब अपने विचार, कल्पनाशक्ति और कौशल को मंच पर रखने का अवसर मिला, तब महोत्सव की ऊर्जा पहले से कहीं अधिक जीवंत होकर सामने आई। इस बदलाव ने हिन्दी महोत्सव को नई सोच, नई उमंग और नई प्रतिभाओं से समृद्ध कर दिया।

आज का अन्तर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिन्दी महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भाषा और समाज के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को हिन्दी साहित्य, भाषा और भारतीय मूल्यों तथा संस्कृति से सकारात्मक रूप से जोड़ना है   ताकि नई पीढ़ी तकनीकी प्रगति के साथ–साथ अपनी भाषाई जड़ों से भी जुड़ी रहे।

इस महोत्सव की आत्मा पाँच स्तम्भों पर टिकी हुई है साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, सृजन और संगीत। हर वर्ष आयोजित होने वाली सभी गतिविधियों और प्रतिस्पर्धाओं की रूपरेखा इन्हीं स्तम्भों पर आधारित होती है साथ ही पिछले कई वर्षों से एक थीम के साथ हिंदी महोत्सव की पूरी परिकल्पना तैयार की जा रही है। इस वर्ष नौवां अंतर्राष्ट्रीय हिंदी महोत्सव का थीम हिंदी साहित्य़ के नौ रस है। इस वर्ष महोत्सव इन्हीं नौ रसो पर आधारित है जिसमें सभी प्रतियोगिताओं को इसी के आधार पर तैयार की गई है। हिंदी साहित्य भारतीय संस्कृति का दर्पण है इसमें जीवन के हर रंग हर भाव और हर अनुभव झिलमिलाते है। हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंग इसके नौ रस है जिसमें श्रृंगार रस, वीर रस, करुण रस, अदभूत रस, हास्य रस, रौद्र रस, भयानक रस, वीभत्स रस, शांत रस आदि हैं। प्रत्येक रस का अपना एक स्थाई भाव है इस वर्ष का महोत्सव इन्हीं रसो के स्थाई भाव पर आधिरित है।  

17, 18 और 19 दिसंबर का यह तीन दिवसीय आयोजन न सिर्फ कौशल–प्रदर्शन का मंच है, बल्कि यह उन अनुभवों का उत्सव है जो भाषा को जीवित रखते हैं, संस्कृति को संवारते हैं, शिक्षा में नई दृष्टि देते हैं और सृजन को निरंतर आगे बढ़ाते हैं। यह महोत्सव उस समर्पित यात्रा का प्रतीक है जिसमें स्थानीय शुरुआत ने वैश्विक पहचान हासिल की और जिसमें हर वर्ष नई प्रतिभाएँ, नए विचार और नई उम्मीदें शामिल होती जा रही हैं।

हिंदी महोत्सव : एक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक यात्रा

हिन्दी महोत्सव केवल एक वार्षिक कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवंत सांस्कृतिक यात्रा है, जहाँ भाषा अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर एक अनुभव, संवाद, कलात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक चेतना के रूप में उभरती है।

आज के समय में, जब डिजिटल माध्यमों ने संचार की परिभाषाएँ बदल दी हैं और वैश्विक संस्कृति का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है, ऐसे में यह महोत्सव हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, आकर्षण और नवीन प्रयोगधर्मिता का एक सशक्त मंच तैयार करता है। यहाँ भाषा केवल पढ़ाई या पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं रहती, बल्कि एक ऐसा सृजनात्मक अनुभव बन जाती है, जिसमें शब्दों के भीतर संवेदनाएँ, विचारों के भीतर दृष्टि और अभिव्यक्तियों के भीतर संस्कृति धड़कती है।

कार्यक्रम के तीन दिनों के दौरान दर्शक विभिन्न विधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लेंगे। इन गतिविधियों में आधुनिक भारत के बदलते सामाजिक परिदृश्य, युवाओं की चुनौतियाँ, तकनीक के प्रभाव और संस्कृति के भविष्य से जुड़े विषयों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि दर्शक केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि नए विचारों के साथ भी लौटें।

देशभर से शिक्षाविद्, लेखक, कलाकार, मीडिया विशेषज्ञ, पत्रकार, शोधकर्ता और युवा प्रतिभाएँ इस आयोजन में भाग लेने पहुँचेंगे। अलग–अलग राज्यों से आने वाले प्रतिनिधि अपनी सांस्कृतिक विशिष्टताओं, अपने अनुभवों और अपने विचारों को साझा करेंगे, जिससे महोत्सव एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का रूप लेता है। यह विविधता न केवल कार्यक्रम की व्यापकता बढ़ाती है, बल्कि भाषा और संस्कृति की समृद्धता को भी उजागर करती है।

महोत्सव के अंतर्गत होने वाली रचनात्मक प्रतियोगिताएँ—वाद-विवाद, निबंध लेखन, कविता-पाठ, कहानी लेखन, नाट्य प्रस्तुति, चित्रकला, संगीत और डिजिटल क्रिएटिविटी—प्रतिभागियों की भाषा-क्षमता, प्रस्तुति कौशल, आत्मविश्वास और तार्किक चिंतन को विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं।

आज के दौर में, जहाँ युवा केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि कम्युनिकेशन स्किल्स, क्रिटिकल थिंकिंग, और रचनात्मकता के आधार पर आगे बढ़ते हैं, यह प्रतियोगिताएँ उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं।

विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का यह अनूठा अवसर एक समृद्ध सांस्कृतिक आदान-प्रदान को जन्म देता है, जहाँ प्रत्येक प्रतिभागी दूसरों से सीखता है और अपनी दृष्टि का विस्तार करता है।

श्रीनाथ विश्वविद्यालय सदैव से यह मानता आया है कि उच्च शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती।

एक अच्छा विद्यार्थी वह नहीं जो सिर्फ अकादमिक ज्ञान में श्रेष्ठ हो, बल्कि वह है जिसमें मानवीय मूल्य, सामाजिक समझ, सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक सोच भी विकसित हो।

हिन्दी महोत्सव इस विचारधारा का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ युवा न केवल भाषा से जुड़ते हैं, बल्कि उस भाषा से जुड़े समाज, संस्कृति, कला और विरासत को भी समझते हैं।

आज जब पूरी दुनिया तेज़ी से बदल रही है एआई, डिजिटल मीडिया, ग्लोबलाइजेशन, सोशल नेटवर्किंग इन सबके बीच भाषा वह आधार है जो व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ती है। महोत्सव का उद्देश्य यही है कि युवा पीढ़ी नई तकनीकों और आधुनिक विचारों के साथ आगे बढ़े, पर अपनी सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय परंपराओं और हिन्दी भाषा की आत्मा को भी सहेजकर रखे।

हिन्दी महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है यह भविष्य निर्माण का संकल्प भी है।

यह आयोजन हर उस युवा को स्पर्श करता है जो साहित्य में अपनी पहचान ढूँढना चाहता है, जो कला में अपना भविष्य देखता है, जो समाज को नए दृष्टिकोण से समझना चाहता है, और जो भाषा के माध्यम से दुनिया में अपनी जगह बनाना चाहता है।

एआई और तकनीक के युग में हिंदी महोत्सव का महत्व: परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम

आज जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल मीडिया और तेजी से बदलती तकनीक के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भाषा और संस्कृति को नए संदर्भों में समझना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर द्वारा आयोजित “अंतरराष्ट्रीय हिंदी महोत्सव” केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवर्तनशील समय में हिंदी की नई संभावनाओं को पहचानने और उसे भविष्य के लिए तैयार करने का हमारा एक लघु प्रयास है।

तकनीकी युग ने हिंदी भाषा की भूमिका को सीमित नहीं किया है, बल्कि इसके दायरे और प्रभाव को कई गुना बढ़ाया है। एक समय था जब हिंदी मुख्यतः कागज़, कक्षा या साहित्यिक गोष्ठियों तक सीमित थी, लेकिन आज यही भाषा ब्लॉगिंग, डिजिटल पत्रकारिता, सोशल मीडिया कंटेंट, यूट्यूब स्टोरीटेलिंग, पॉडकास्ट, मोबाइल रिपोर्टिंग और एआई आधारित उपकरणों के माध्यम से वैश्विक संचार की महत्वपूर्ण शक्ति बन चुकी है। इसलिए यह महोत्सव आधुनिक संदर्भों में हिंदी की प्रासंगिकता को समझने और उसे नई तकनीकी दिशा देने का एक व्यावहारिक मंच प्रदान करता है।

महोत्सव में आयोजित प्रतियोगिताएँ इसकी आधुनिकता को और भी स्पष्ट करती हैं। रील निर्माण, संचार कौशल, और विशेष रूप से स्टार्ट-अप “श्रीनाथ” जैसे प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को यह सिखाना है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों, नवाचारों और उद्यमिता की आधारशिला भी है। इसके साथ ही वाद-विवाद और नाट्य-प्रस्तुति जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आज का युवा इसके महत्व को समझे।

वस्तुत: यह महोत्सव एक ऐसा मंच तैयार करता है जहाँ परंपरा और तकनीक का संतुलन दिखाई देता है यह संगम आधुनिक पीढ़ी को यह समझने का अवसर देता है कि भाषा तभी  जीवित रह सकती है जब वह समय के साथ बदलने और विस्तार करने की क्षमता रखती हो।

नौवां अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव 2025 के मुख्य अतिथि

उदघाटन सत्र : सुदिव्य कुमार सोनू, उच्च शिक्षा एंव तकनीकमंत्री, झारखंड सरकार

समापन समारोह : रविन्द्र नाथ महतो, विधानसभा अध्य़क्ष, झारखंड

नौवां अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव 2025 के वक्तागण

१७ दिसंबर  प्रथम दिवस : अंतराष्ट्रीय हिंदी महोत्सव के पहले दिन वक्ता के रूप में श्री बुद्धिनाथ मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार एंव रेनू यादव, साहित्यकार, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोयडा, यूपी 

१८ दिसम्बर  द्वीतिय दिवस : श्री पीयूष पांडेय, वरीय पुलिस अधीक्षक, पूर्वी सिंहभूम तथा कर्नल विनय अहूजा, इंडियन आर्मी वक्ता के रूप में शामिल होकर आयोजन को रचनात्मक स्वरूप देंगे।

१९ दिसंबर  तृतीय दिवस : आयोजन के अंतिम दिन वक्ता के रूप में श्री रचित त्रिखा असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट – सेल्स
कॉलेज दुनिया  और श्री राजेश वैरियार वी.वी.,वाइस प्रेसिडेंट, सेल्स, केवेंटर एग्रो लिमिटेड अपनी उपस्थिति से मंच की शोभा बढ़ाएंगे।

इसके अलावा ९वें अंतराष्ट्रीय हिंदी महोत्सव में देश-विदेश से भी जुड़ रहे हैं।  

  • यूरोप से – हमारे साथ जया किरण सतीश हैं, जो चार्टर्ड एफसीआईपीडी तथा यूरोप एवं एम एंड ए की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं मानव संसाधन प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।

हिंदी महोत्सव में भाग ले रहे है।

  • अमेरिका से- राजकिशोर पांडे युकोन हेल्थ, यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट हेल्थ सेंटर में कार्यरत है और महोत्सव में भाग ले रहे है।
  • अमेरिका से – सुमंता भद्र जो कैलिफ़ोर्निया राज्य में लैम रिसर्च कॉरपोरेशन में मानव संसाधन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के प्रमुख हैं और हिंदी महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • अमेरिका से- फिर्दौस आलम जो अमेरिका में लिंकन फ़ाइनेंस सेवा के डिलीवरी मैनेजर हैं महोत्सव में जुड़ रहे हैं।
  • अमेरिका से- डॉ. अंकिता गुरु जो अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ में पोस्ट डॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में कार्यरत हैं, हिंदी महोत्सव में भाग ले रही हैं।
  • अमेरिका से- डॉ. राजीव पाठक जो अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन में स्टाफ वैज्ञानिक हैं महोत्सव को अपनी वाणी से समृद्ध कर रहे है।
  • अमेरिका से- श्री बिनीत पांडा जो अमेरिका के मिनियापोलिस, मिनेसोटा में कार्यरत हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • अमेरिका से – डॉ. सुजीत कश्यप जो अमेरिका के शिकागो स्थित नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में शोध सहायक के रूप में कार्य कर रहे हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • सऊदी अरब से- मोहम्मद परवेज ज़ेया रियाद स्थित किंग सऊदी विश्वविद्यालय में आईटी प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • सऊदी अरब से- डॉ. मौइदुर रहमान जो सऊदी अरब के जाज़ान विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रहे हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • सऊदी अरब से- मोहम्मद शारिक जो अरब के बिशा विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं,महोत्सव से जुड़ेंगे।
  • सऊदी अरब से- मग़्दी उस्मान रियाद जो सऊदी अरब के किंग सऊद विश्वविद्यालय में आईटी प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं हिन्दी महोत्सव में जुड़ रहे हैं।
  • अमेरिका से- डॉ. शिवानी रोर जो अमेरिका के आयोवा विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं महोत्सव में भाग ले रही हैं।
  • जर्मनी से – शहज़ाद रिज़वी जो जर्मनी में एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ के जनरल मैनेजर एवं डिलीवरी हेड के रूप में कार्यरत हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।
  • युगांडा से- श्री चतुर्भुज पाणिग्रही जो युगांडा के कंपाला नगर से संबद्ध हैं महोत्सव में भाग ले रहे हैं।

हिंदी महोत्सव पर होने वाली प्रतियोगिताएं

1 हास्य कवि सम्मेलन

हास्य कविता हिन्दी साहित्य की एक मनोरंजक विधा है, जिसे पढ़ना और सुनना दोनों ही आनंददायक अनुभव प्रदान करते हैं। यह दैनिक जीवन की घटनाओं को प्रतीकात्मक और हास्यपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक व श्रोता गुदगुदी महसूस करते हैं। प्रतियोगिता में प्रतिभागी अपने संवाद शैली और प्रस्तुति कौशल का प्रदर्शन करेंगे। इस वर्ष दिए गए विशेष विषयों पर आधारित रचनाएँ प्रस्तुत की जाएँगी, ताकि तनावपूर्ण जीवन में दर्शकों को हँसी और आनंद के कुछ क्षण मिल सकें।

2. प्रश्नोत्तरी

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिभागियों के हिन्दी भाषा-ज्ञान, समझ, सामान्य ज्ञान और अनुप्रयोग क्षमता को विकसित करना है। दो चरणों में आयोजित इस प्रतियोगिता के माध्यम से भाषा, साहित्य, संस्कृति, संगीत और सृजनात्मकता के विभिन्न पक्षों पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। अंतिम चरण में तकनीक का उपयोग कर प्रतियोगिता को और अधिक रोचक बनाया जाएगा, ताकि आधुनिकता के साथ संतुलन रखते हुए हिन्दी भाषा का संरक्षण और संवर्धन हो सके।

3. दीवार सज्जा

भारत की सांस्कृतिक विविधता में दीवार सज्जा हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। यह प्रतियोगिता सिर्फ चित्रकारी नहीं, बल्कि साहित्यिक और शैक्षिक संदेशों को रचनात्मक रूप से चित्रित करने का माध्यम होगी। प्रतिभागियों में कलात्मकता, रचनात्मकता, सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना विकसित करना ही इसका उद्देश्य है। इस प्रतियोगिता में हिंदी साहित्य के “नौ रसों” पर आधारित चित्रांकन किया जाएगा।

4. मुद्दे हमारे—विचार आपके

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सार्थक वार्ता कर समाधान की दिशा में सामूहिक विचार उत्पन्न करना है। यह प्रतियोगिता युवाओं में जागरूकता बढ़ाती है, समस्याओं की पहचान कराती है और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने का अवसर प्रदान करती है। सीमित समय में विचार-मंथन से विद्यार्थियों में त्वरित सोच और विश्लेषण क्षमता विकसित होती है।

5. साहित्यिक कृति

यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों की सृजनात्मकता, प्रस्तुतीकरण कौशल और भारतीय साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए आयोजित की जाती है। प्रतिभागी हिंदी साहित्य के ९ रसों में से किसी एक रस से संबंधित रचनाओं और लेखक का अध्ययन करेंगे तथा उसी आधार पर प्रदर्शनी प्रस्तुत करेंगे। इससे साहित्य की समझ गहरी होगी और अध्ययन का एक नया दृष्टिकोण विकसित होगा।

6. मुखड़े पर मुखड़ा

चित्रकारी प्राचीन काल से ही अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। कहानी एवं काव्य में दृश्य संकेतों का उपयोग साहित्य को और प्रभावी बनाता है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा और साहित्य की समझ के आधार पर चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्ति की कला विकसित करना है, जहाँ संप्रेषण पूरी तरह दृश्य प्रस्तुति पर आधारित होगा।

7. व्यक्तित्व झांकी

भारत की विविध संस्कृति—भाषा, खान-पान, परिधान और परंपराओं—का रचनात्मक रूप से प्रदर्शन इस प्रतियोगिता का मुख्य ध्येय है। इस वर्ष प्रतिभागी हिन्दू पौराणिक कथाओं को हिंदी साहित्य के विभिन्न रसों से जोड़कर प्रस्तुत करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पौराणिक ज्ञान के साथ-साथ साहित्यिक संवेदनाओं की समझ विकसित करना है।

8. शब्द संग्राम

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति सजगता और सही प्रयोग की क्षमता विकसित करना है। प्रतिभागियों की वर्तनी, शब्द चयन, वाक्य संरचना और शुद्ध लेखन कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा। यह कार्यक्रम हिंदी भाषा में आत्मविश्वास बढ़ाता है और व्यावहारिक रूप से भाषा-सुधार का अवसर प्रदान करता है।

9. नुक्कड़ नाटक

नुक्कड़ नाटक विद्यार्थियों के अभिनय, संवाद और वाचन कौशल को प्रखर बनाने के लिए आयोजित किया जाता है। विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रस्तुति देने से प्रतिभागियों में आत्मविश्वास बढ़ता है। इस प्रतियोगिता में समसामयिक विषयों को हिंदी साहित्य के ९ रसों के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैल सके।

10. रेडियो श्रीनाथ

यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लेखन और वाचन कौशल को निखारने के लिए मंच प्रदान करती है। रेडियो जॉकी की शैली में प्रभावी अभिव्यक्ति प्रस्तुत करना इसका मुख्य लक्ष्य है। साथ ही, युवाओं को पत्र लेखन जैसी पारंपरिक कला से पुनः जोड़ने का प्रयास भी किया जाता है।

11. हिन्दी टंकण

समकालीन समय में विद्यार्थी हिन्दी टंकण से दूरी बना रहे हैं। यह प्रतियोगिता उन्हें हिन्दी टंकण का अभ्यास कराने और वर्तनी ज्ञान का मूल्यांकन करने का अवसर देती है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों में भाषा-रुचि, कठिन शब्दों की पहचान और प्रतियोगी भावना का विकास होता है।

12. वाक्य वीर

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी शब्दावली की समझ और शुद्ध प्रयोग की क्षमता बढ़ाना है। प्रतिभागियों को PPT के माध्यम से प्रदर्शित देशज-विदेशज शब्दों का शुद्ध हिंदी में अनुवाद करना होगा। इससे वाक्य-विन्यास कौशल, शब्द चयन और भाषा की सटीकता विकसित होती है।

13. साहित्य के नौ रस (रंगोली)

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों में पारंपरिक भारतीय कला के प्रति संवेदनशीलता और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना है। प्रतिभागी nवरसों में से किसी एक रस को रंगोली के माध्यम से अभिव्यक्त करेंगे, जिससे साहित्यिक भावों को दृश्य कला में बदलने की क्षमता विकसित होगी। टीमवर्क, रचनात्मकता और समय-प्रबंधन भी इस प्रक्रिया में निखरते हैं।

14. लघु नाटिका

लघु नाटिका जीवन की परिस्थितियों को संक्षेप में प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों के संवाद कौशल, अभिनय, हाव-भाव और प्रस्तुति-कौशल का मूल्यांकन करना है। सीमित समय में सामाजिक या सांस्कृतिक विषय को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना इसकी मूल भावना है।

15. रील्स संचार

तेजी से बदलते संचार माध्यमों के बीच यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों को आधुनिक अभिव्यक्ति शैली के माध्यम से हिंदी से जोड़ने का प्रयास है। इसका उद्देश्य संप्रेषण क्षमता, रचनात्मकता और तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना है, ताकि विद्यार्थी हिंदी को डिजिटल मीडिया की मुख्यधारा से जोड़ सकें।

16. नृत्य नाटिका

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य भारतीय पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक धरोहर को नृत्य एवं अभिनय के माध्यम से जीवंत करना है। प्रतिभागी अपनी रचनात्मकता, भाव-व्यक्तिकरण और प्रदर्शन कौशल का उपयोग कर कथाओं को मंचित करेंगे, जिससे कला और साहित्य दोनों का संरक्षण हो सके।

17. सूचना सृजन

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में औपचारिक पत्र-लेखन, साहित्यिक संवेदनाओं और “शांत रस” की समझ विकसित करना है। प्रतिभागी प्रशासनिक शैली में शांत रस पर आधारित पत्र तैयार करेंगे, जिससे अनुशासन, शब्द-संयम और प्रासंगिक अभिव्यक्ति की क्षमता बढ़ेगी। यह प्रतियोगिता विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों को आधिकारिक लेखन में अपनी दक्षता दिखाने का अवसर देती है।

18. सिनेमा की यादों में

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य टीमवर्क, रचनात्मक प्रस्तुति और नौ रसों की समझ को विकसित करना है। प्रतिभागी दिए गए वीडियो के आधार पर चुने गए रस की प्रस्तुति सीमित समय और संसाधनों के भीतर तैयार करेंगे। इससे कल्पनाशक्ति, मंच-कौशल और सामग्री प्रबंधन जैसे कौशल निखरते हैं।

19. स्टार्टअप श्रीनाथ

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवोन्मेषी सोच, तकनीकी प्रस्तुति कौशल और “अद्भुत रस” की समझ बढ़ाना है। प्रतिभागी एक इनोवेटिव प्रोडक्ट तैयार कर 10-स्लाइड वाली PPT के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। इसका लक्ष्य रचनात्मकता, शोध दृष्टि, समूहकार्य और निर्धारित भाषा-संयम में काम करने की क्षमता को बढ़ावा देना है।

20. समय यात्रा

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिभागियों में रचनात्मक अभिव्यक्ति, संवाद कौशल और युगानुकूल शब्दावली के प्रयोग की क्षमता विकसित करना है। निर्धारित विषय पर प्रस्तुति तैयार करने से कल्पनाशक्ति, चरित्र निर्माण और मंचीय नवाचार में वृद्धि होती है। यह विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और सांस्कृतिक-साहित्यिक समझ के साथ प्रस्तुति देने के लिए प्रेरित करती है।

21. लोरी लेखन

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिभागियों में सृजनात्मक लेखन, भावनात्मक संवेदना और दृश्य-प्रेरित कल्पनाशक्ति विकसित करना है। विशेष चित्रों के आधार पर निर्धारित समय में लोरी की रचना कर वे अपनी साहित्यिक क्षमता और भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रदर्शित करेंगे। साथ ही टीमवर्क, समय-प्रबंधन और शब्द-संयम जैसे कौशल भी सशक्त होंगे।

22. प्रकरण अध्ययन

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान और तार्किक तर्क क्षमता विकसित करना है। दिए गए विषय पर केस स्टडी तैयार करने से वास्तविक परिस्थितियों को समझने और समाधान प्रस्तुत करने की क्षमता बढ़ती है। लिखित और मौखिक दोनों चरण प्रतिभागियों के प्रस्तुतीकरण, संरचना और अभिव्यक्ति कौशल का मूल्यांकन करते हैं।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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