गुरुग्राम । हरियाणा के गुरुग्राम शहर के डीएलएफ फेज‑3 इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत में चोरी के संदेह में 5 नाबालिग लड़कों को 18 घंटे तक बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न और यातना के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। आयोग ने इस घटना को पीड़ित बच्चों के मानवाधिकारों का “गंभीर उल्लंघन” बताया और गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
घटना क्या हुई?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुग्राम के DLF फेज‑3 में एक पेइंग गेस्ट (PG) इकाई के कमरे में 11 से 14 वर्ष की आयु के 5 बच्चों को ठेकेदार और उसके कुछ सहयोगियों ने चोरी के संदेह में बंधक बनाकर रखा। इन पांचों बच्चों में से चार मामले की मुख्य जांच रिपोर्ट में शामिल होने के बावजूद भी सभी बालकों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
सूत्रों के अनुसार:
- बच्चों को धमकी देकर लगभग 18 घंटे तक कमरे में बंद रखा गया।
- उन्हें निर्वस्त्र किया गया, प्रताड़ित किया गया और उनका यौन उत्पीड़न भी हुआ।
- आरोपियों ने उन्हें जलाने की धमकी देने के लिए उनके शरीर, विशेषकर निजी भागों पर पेट्रोल डाला।
घटना तब सामने आई जब 2–3 फरवरी, 2026 के बीच किसी एक पीड़ित बच्चे की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को खबर मिलने पर घटनास्थल पर पहुंचने पर पाया कि बच्चों की माताओं को भी वहीं बैठाकर और उन्हें अपमानित करके आरोपी उनसे पूरी स्थिति छुपाने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस और कार्रवाई
पुलिस सूत्रों के अनुसार:
- आरोपियों ने यह दलील दी कि बच्चों के माध्यम से निर्माण स्थल पर लूट या चोरी की जा सकती है, इसलिए उन्हें “सबक सिखाने” के लिए रोका गया।
- इसके बाद दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य के खिलाफ तलाश जारी है।
- पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। कथित तौर पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और किशोर न्याय अधिनियम से जुड़ी धाराएं लगाई गईं हैं।
NHRC का स्वतः संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 5 फरवरी, 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट और उसके बाद के अफवाहों पर आधारित अध्ययन के बाद इस मामले पर स्वतः संज्ञान ले लिया। आयोग ने कहा है कि यदि प्रकाशित समाचारों में वर्णित तथ्य सत्य हैं, तो घटना नाबालिगों के जीवन व सम्मान के मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
अगले कदम में:
- एनएचआरसी ने गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।
- NHRC ने आयुक्त से दो सप्ताह के भीतर घटना की विस्तृत, लिखित रिपोर्ट मांगी है।
- रिपोर्ट आने पर आयोग फैसला लेगा कि क्या मामले में अतिरिक्त मानवाधिकार हस्तक्षेप, सीमा समिति भेजना या अन्य कानूनी‑प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
संदेश और उपलब्धता
यह घटना स्थानीय प्रशासन, पुलिस और मुआवजा/समर्थन प्रणाली की जिम्मेदारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। पीड़ित बच्चों और परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक समर्थन, चिकित्सा सुविधा और आगे की सुरक्षा के लिए बाल सुरक्षा आयोगों व कानूनी सहायता एजेंसियों की भागीदारी जरूरी है।
NHRC की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति आयोग की वेबसाइट nhrc.nic.in पर देखी जा सकती है, जहां मामले की आगे की प्रगति अपडेट की जाएगी।









