📍जमशेदपुर, 07 नवम्बर 2025 । भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जमशेदपुर प्रधान डाकघर में एक विशेष एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में “वंदे मातरम्” के योगदान को याद करते हुए देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
कार्यक्रम की अध्यक्षता जमशेदपुर प्रधान डाकघर के अध्यक्ष श्री शंकर कुजूर ने की। उनके नेतृत्व में सभी डाककर्मी और अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे तथा उन्होंने पूरे उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक अवसर को मनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन से हुआ, जिसने पूरे माहौल को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया। सभी कर्मचारियों ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों और भारत माता को नमन करते हुए गीत के माध्यम से अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त किया।
वंदे मातरम् के पूरे छंद का सामूहिक गायन
कार्यक्रम का सबसे खास और भावनात्मक क्षण था “वंदे मातरम्” के पूरे छंद का सामूहिक अभ्यास और प्रस्तुति। इस गायन में प्रमुख रूप से — सुश्री ज्योति कुमारी, सुश्री नताशा सिंह, सुश्री स्वाति रानी, सुश्री वेफ़ी मणिस, सुश्री रक्षा प्रसाद, सुश्री लक्ष्मी बारी, श्रीमती प्रियंका मांनकी, सुश्री मौसमी हेम्ब्रम ने अपनी मधुर आवाज़ से सबका मन मोह लिया। उनका साथ श्री दीपू कुमार और श्री निशांत कुमार ने दिया।
देशभक्ति का सशक्त संदेश
श्री शंकर कुजूर ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारी आज़ादी की आत्मा और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। इसका 150वाँ वर्ष हमें अपने कर्तव्यों और देश के प्रति निष्ठा की याद दिलाता है।”
यह आयोजन भारत सरकार की उस पहल का भी हिस्सा था, जिसके माध्यम से देशभर में लोगों को राष्ट्रीय गीत के महत्व और उसके ऐतिहासिक योगदान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम का समापन
समारोह का समापन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत माहौल में हुआ, जहाँ सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्र के प्रति अपनी अटूट निष्ठा और समर्पण का संकल्प लिया। “वंदे मातरम्” के जयघोष से डाकघर का प्रांगण गूंज उठा।
विशेष टिप्पणी:
यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक देशभक्ति का पुनर्जागरण था — जहाँ “वंदे मातरम्” की गूँज ने यह स्मरण कराया कि भारत की एकता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की जड़ें इसी गीत की भावना से सींची गई हैं।













