- आत्म–सुरक्षा एवं संवेदनशीलता को बढ़ाने के उद्देश्य से छात्राओं ने लिया सक्रिय हिस्सा
जमशेदपुर । आज दिनांक 04 दिसंबर 2025 को मुरली इंटर कॉलेज, जमशेदपुर में बालिकाओं को सुरक्षा एवं संवेदनशीलता के विषय में जागरूक करने हेतु “सायबर सिक्योरिटी एवं गुड टच–बैड टच जागरूकता कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं में आत्म–सुरक्षा की भावना विकसित करना, अनुचित स्पर्श की पहचान करना, तथा असुरक्षित परिस्थिति में प्रभावी ढंग से मदद लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना था।
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नूतन रानी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ की गई।
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा:
“वर्तमान समय में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण एवं आवश्यक जानकारी प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। जागरूकता ही सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।”
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव — छात्राओं ने लिए नोट्स
टाटा स्टील रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के विशेषज्ञ वक्ताओं ने छात्राओं को सरल और व्यावहारिक तरीके से निम्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जागरूक किया—
🔹 गुड टच एवं बैड टच के अंतर को उदाहरणों द्वारा समझाया गया
🔹 कोई भी स्पर्श जो असहज या भय महसूस कराए, उसे बैड टच माना जाएगा
🔹 “NO MEANS NO” — मना करने का अधिकार और आवाज उठाने पर विशेष जोर
🔹 सेफ़ सर्कल (Safe Circle) — भरोसेमंद लोगों की पहचान करने की जानकारी
🔹 आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर साझा किए गए – 1098, 112 आदि
🔹 साइबर सिक्योरिटी एवं ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया सावधानियों पर विशेष सत्र आयोजित
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया एवं प्रश्न पूछकर सत्र को और अधिक प्रभावी बनाया।
समापन एवं धन्यवाद
अंत में प्राचार्या डॉ. नूतन रानी ने सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—
“ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। संस्थान भविष्य में भी इसी प्रकार के उपयोगी कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।”
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सुश्री मिताली नमाता द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम ने बालिकाओं में स्व–सुरक्षा, साइबर सावधानी, साहसपूर्वक “ना” कहने का अधिकार और सहायता लेने के सही तरीकों के प्रति मजबूत जागरूकता पैदा की। विद्यालय प्रशासन और छात्राओं दोनों की सहमति रही कि ऐसे कार्यक्रम समाज में बालिकाओं की सुरक्षा और आत्मबल बढ़ाने हेतु अत्यंत सार्थक हैं।














