- माँ का प्रेम मृत्यु से परे
Mother’s Love : कहते हैं माँ का प्रेम न कभी कम होता है, न ही समय, दूरी या मृत्यु से हारता है। जम्मू की सर्द और ठिठुरन भरी सुबह में एक ऐसा ही दृश्य सामने आया, जिसने हर संवेदनशील हृदय को झकझोर दिया। जब तापमान गिर रहा था, हवा बर्फ़ सी चुभ रही थी, तब सरदारनी जसवंत कौर ने अपने शहीद बेटे गुरनाम सिंह की प्रतिमा को अपने हाथों से कंबल ओढ़ाया। यह कोई साधारण क्रिया नहीं थी—यह माँ के अटूट प्रेम, त्याग और शहादत के सम्मान का मौन लेकिन शक्तिशाली प्रतीक था।
गुरनाम सिंह, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 173वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। वर्ष 2016 में उन्होंने सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम किया। वह क्षण देश की सुरक्षा के लिए निर्णायक था—एक ऐसा क्षण, जिसमें ड्यूटी सर्वोपरि थी और निजी जीवन पीछे छूट गया। परंतु उसी दौरान, दुश्मन की ओर से चली स्नाइपर की गोली उनके सिर में लगी। गंभीर रूप से घायल गुरनाम सिंह ने जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष किया, लेकिन अंततः उन्होंने कर्तव्य पथ पर वीरगति पाई। वह सिर्फ़ एक सैनिक नहीं रहे—वह शहीद बन गए।
माँ जसवंत कौर के लिए बेटा कभी “शहीद की प्रतिमा” नहीं बना। वह आज भी वही बच्चा है, जिसकी चिंता माँ को हर ठंड, हर बारिश, हर रात होती है। जम्मू की सर्दी में प्रतिमा को कंबल ओढ़ाते समय उनकी आँखों में आँसू थे, पर चेहरे पर गर्व भी। वह जानती हैं कि उनका बेटा देश की रक्षा करते हुए अमर हुआ, फिर भी माँ का दिल माँ ही रहता है—जो ठंड में अपने बेटे को ठिठुरता नहीं देख सकती, चाहे वह संगमरमर की प्रतिमा ही क्यों न हो।
यह दृश्य केवल जम्मू तक सीमित नहीं रहा। यह पूरे देश के लिए एक संदेश बन गया—कि शहादत सिर्फ़ रणभूमि पर नहीं होती, वह घरों में भी गूँजती है। हर शहीद के पीछे एक माँ होती है, जो अपने दिल का टुकड़ा देश को सौंप देती है। हर माँ का वह मौन त्याग किसी पदक से कम नहीं।
आज जब हम आरामदायक कमरों में सर्दी से बचते हैं, तब सीमाओं पर तैनात जवान बर्फ़ीली हवाओं का सामना करते हैं। गुरनाम सिंह जैसे जवानों की वजह से ही हम सुरक्षित हैं। और जसवंत कौर जैसी माताओं की वजह से ही यह देश अडिग खड़ा है। कंबल ओढ़ाने की वह छोटी-सी क्रिया, दरअसल एक महान प्रतीक बन गई—प्रेम का, कर्तव्य का, और उस अमर सम्मान का, जो शहीदों को मिलता है।
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि शहीद कभी मरते नहीं। वे अपने परिवारों की साँसों में, देश की मिट्टी में और माँ की हर धड़कन में जीवित रहते हैं। जसवंत कौर का वह स्पर्श, वह कंबल, मानो कह रहा हो—“बेटा, तू अमर है, पर माँ का दिल आज भी तुझे महसूस करता है।”
आज देश को ज़रूरत है कि वह केवल नारों तक सीमित न रहे, बल्कि शहीदों के परिवारों के साथ खड़ा हो। उनका सम्मान करे, उनके त्याग को समझे और उस स्वतंत्रता की कीमत पहचाने, जो हमें ऐसे ही बलिदानों से मिली है।
शहीद गुरनाम सिंह को शत-शत नमन। माँ जसवंत कौर के अदम्य साहस और प्रेम को सलाम। जय हिन्द।














