📍 चांडिल, झारखंड : झारखंड के अंगीभूत महाविद्यालयों से इंटरमीडिएट की पढ़ाई को हटाने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ विरोध की आग तेज़ होती जा रही है। इसी कड़ी में इंटरमीडिएट बचाओ संघर्ष समिति की ओर से कोल्हान प्रमंडल स्तरीय ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें तीनों जिलों – पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां – के छात्र-छात्राएं, छात्र प्रतिनिधि एवं युवा नेता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
📌 क्या है मामला?
सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत अंगीभूत कॉलेजों से इंटरमीडिएट (11वीं–12वीं) की पढ़ाई को हटाकर इसे विद्यालय स्तर पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत राज्य भर में कुछ चुनिंदा विद्यालयों को ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ बनाया जा रहा है, जहाँ कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में कराई जाएगी।
📣 छात्रों ने जताई आपत्ति
ऑनलाइन बैठक में पूर्वी सिंहभूम के छात्र प्रतिनिधि प्रभात कुमार महतो ने कहा—
“यह फैसला छात्रों के भविष्य को अंधकार में डालने जैसा है। इंटरमीडिएट जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। कॉलेज स्तर की पढ़ाई को स्कूलों में ले जाकर इसकी गुणवत्ता और गरिमा दोनों को कमजोर किया जा रहा है।”
उन्होंने बताया कि झारखंड के अधिकांश विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की अनुपलब्धता, और संसाधनों की घोर कमी है। ऐसी स्थिति में यदि 11वीं और 12वीं की पढ़ाई को भी वहीं समाहित कर दिया जाता है, तो पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होगी और छात्रों को उच्च शिक्षा की तैयारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
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🗓️ आंदोलन की रणनीति तैयार
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस निर्णय के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।
- पहले चरण में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संबोधित कर एक वृहद ईमेल अभियान चलाया जाएगा, जिसमें छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील की जाएगी कि वे सरकार के इस निर्णय का विरोध दर्ज करें।
- दूसरे चरण में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन, जनजागरूकता अभियान और शिक्षा नीति पर परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी।
👥 प्रतिनिधियों की भागीदारी
इस बैठक में कोल्हान प्रमंडल के विभिन्न जिलों के प्रमुख छात्र प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें शामिल हैं:
- सत्येन महतो – छात्र प्रतिनिधि, पश्चिमी सिंहभूम
- जतिन दास, युधिष्ठिर प्रमाणिक, विश्वेश्वर महतो और अमन सिंह – सरायकेला-खरसावां जिला से
बैठक में सभी ने सरकार के इस फैसले को छात्रविरोधी बताते हुए कहा कि यह ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक होगा, जहाँ स्कूलों की स्थिति पहले से ही बदतर है।
🧾 प्रमुख बिंदु जो उठाए गए
- कॉलेज की पढ़ाई का माहौल, संसाधन और शैक्षणिक दृष्टिकोण इंटरमीडिएट स्तर के छात्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- स्कूलों में जूनियर छात्रों के साथ 11वीं–12वीं के छात्रों को समाहित करने से अनुशासन, माहौल और एकाग्रता प्रभावित होगी।
- शिक्षक और संसाधनों की पहले से ही भारी कमी झेल रहे सरकारी विद्यालयों में इस बोझ को बढ़ाना शिक्षा की गुणवत्ता के खिलाफ है।
इंटरमीडिएट को अंगीभूत कॉलेजों से हटाकर विद्यालयों में स्थानांतरित करने के सरकारी फैसले का छात्रों में व्यापक विरोध शुरू हो चुका है। इंटरमीडिएट बचाओ संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो कोल्हान से लेकर राजधानी तक व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
सरकार की नई शिक्षा नीति के स्थानीय क्रियान्वयन को लेकर छात्रों में बढ़ती असंतुष्टि आने वाले समय में झारखंड में शिक्षा संबंधी नीतियों के खिलाफ बड़े छात्र आंदोलन का संकेत दे रही है।













