पंचकूला: हरियाणा के सरकारी खातों से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि यह फर्जीवाड़ा अक्तूबर से दिसंबर 2025 के बीच करीब 90 दिनों तक लगातार चलता रहा, जबकि विभाग की ओर से बैंक को सिग्नेचर अपडेट की आधिकारिक सूचना भी भेज दी गई थी। इसके बावजूद पुराने और कथित जाली हस्ताक्षरों के आधार पर करोड़ों रुपये का लेन-देन जारी रहा।
यह मामला IDFC First Bank से जुड़े खातों से सामने आया है। फरवरी 2026 में घोटाले का खुलासा होने के बाद विजिलेंस ने जांच तेज कर दी है और कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
सिग्नेचर अपडेट के बाद भी जारी रहे ट्रांजेक्शन
जांच एजेंसियों के अनुसार, 10 दिसंबर 2025 को हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग ने बैंक को हस्ताक्षर अपडेट करने के लिए पत्र भेजा था, जो 12 दिसंबर को बैंक को मिल गया। इसके बावजूद पुराने सिग्नेचर और डेबिट नोट के आधार पर भुगतान होते रहे, जिससे बैंकिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की हेराफेरी
विजिलेंस का कहना है कि सरकारी खातों से फर्जी हस्ताक्षरों और कथित जाली बैंक स्टेटमेंट्स के जरिए रकम को ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम की फर्म के खातों में ट्रांसफर किया गया। इस दौरान दस्तावेजों से छेड़छाड़ के भी सबूत मिले हैं।
चार नाम सामने आए, डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे
जांच में पंचकूला निवासी ऋषभ ऋषि, चंडीगढ़ निवासी अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने बैंक रिकॉर्ड और अपनी फर्म से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर की। सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तारी से पहले आरोपियों ने कई संदिग्ध संपर्क किए थे। डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है।
GST वेंडर वेरिफिकेशन और बैंकिंग प्रक्रिया पर सवाल
नियमों के अनुसार बड़े सरकारी भुगतान से पहले GST वेरिफिकेशन और वेंडर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है। अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ को किस प्रक्रिया के तहत वेंडर बनाया गया। अनियमितता मिलने पर विभाग के आईटी सेल और लेखा शाखा की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
ट्राईसिटी कनेक्शन की जांच
जांच में सेक्टर-32 चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank के एक खाते का जिक्र भी सामने आया है, जहां से रकम आगे ज्वेलर्स तक पहुंचने की बात कही जा रही है। विजिलेंस अब पंचकूला–चंडीगढ़–मोहाली (ट्राईसिटी) कनेक्शन को जोड़कर जांच कर रही है।
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर भी सवाल
विजिलेंस का आरोप है कि नोटिस के बावजूद AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। ऐसे में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
SIT ने की गिरफ्तारी, जांच जारी
16 फरवरी 2026 को जांच समिति बनाई गई और 24 फरवरी को एसआईटी ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। डीसीपी सृष्टि गुप्ता के अनुसार, मामले की बहुआयामी जांच चल रही है। आरोपियों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते और लॉकर भी खंगाले जा रहे हैं फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता है या फिर इसके पीछे किसी बड़े संगठित नेटवर्क की साजिश छिपी है।













