घाटशिला | पूर्व जिला पार्षद करुणामय मंडल (पोटका, पूर्वी सिंहभूम) ने आज सुबह 6:28 बजे सोशल मीडिया के माध्यम से एक बेहद भावुक और तीखी कविता साझा की। इस कविता में उन्होंने खुकड़ाडीह पुलिया की जर्जर स्थिति को लेकर सरकार और जनप्रतिनिधियों पर गहरा सवाल उठाया है। कविता के हर अंतरे में सड़क की दयनीय दशा और जनता की मजबूरी का चित्रण है, जो इलाके में चर्चाओं का विषय बन गया है।
कविता है –
“अपना सीट अपने जीते
अब तो खुश हो सरकार।
खुकड़ाडीह के पुलिया पर
कुछ तो करो इसबार।।
घाटशिला जब आए होंगे
उप चुनाव के प्रचार में।
जरूर हाल तो देखे होंगे
अपने खुद के नजर में।।
बड़ी शर्मिंदगी है हुजूर
अद्भुत ये कारनामा है।
मुख्य पथ की ये दुर्गती
अद्भुत ये महिमा है।।
ये नमूना है विकास की
या दुर्घटना की गैरेंटी है।
मुख्य पथ पर दौड़े मौतें
बजती खतरों की घंटी है।।
जनार्दन भी अद्भुत यंहा
मानो कितनी लाचार है।
प्रतिवाद नहीं प्रतिकार नहीं
सिर्फ जय जय कार है।।
मौत मंडराए जिसके कारण
फिर भी उसे धिक्कार नहीं।
छल के दे दे जहर का प्याला
फिर भी मानो इंकार नहीं।।
जागो जनार्दन जागो अब
करवट बदलने की बारी है।
काम ना आए सुई जंहा पर
उठा लो जो तरवारी है।।”
भावार्थ — “मुख्य सड़क पर मौत का साया”
कवि करुणामय मंडल ने अपनी कविता में कहा है कि:
- नेताओं ने चुनाव तो जीत लिया, लेकिन जनता की मूल समस्या—पुलिया की मरम्मत—आज तक अधूरी है।
- घाटशिला उपचुनाव के दौरान नेताओं ने यह रास्ता जरूर देखा होगा, पर सड़क की हालत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- कविता सड़क की दुर्दशा को “शर्मिंदगी और अद्भुत कारनामा” बताकर कटाक्ष करती है।
- मंडल ने लिखा है कि मुख्य मार्ग पर चलना ख़तरे से खेलना जैसा है, मानो मौत खुलेआम दौड़ रही हो।
- सबसे मार्मिक पंक्तियाँ वे हैं जहाँ वे जनता (जनार्दन) को “लाचार” बताते हैं—जो दुर्घटनाओं के कारणों को जानते हुए भी आवाज़ नहीं उठा पा रहे।
- अंत में उन्होंने जनता को चेताया—
“जागो जनार्दन जागो… अब करवट बदलने की बारी है।”
इलाके में सड़क और पुलिया की स्थिति क्या है?
स्थानीय लोगों के अनुसार—
- खुकड़ाडीह पुलिया पिछले कई महीनों से टूटी, धंसी और खतरनाक स्थिति में है।
- बारिश के बाद इस पुलिया पर गड्ढे और भी गहरे हो गए हैं।
- कई छोटे—बड़े हादसे हो चुके हैं लेकिन स्थायी मरम्मत अब तक नहीं हुई।
- यह मार्ग घाटशिला–पोटका मुख्य आवागमन मार्ग होने के कारण प्रतिदिन हजारों लोग इसे उपयोग करते हैं।
जनता में आक्रोश, कविता बनी आवाज़
कविता के वायरल होते ही स्थानीय लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएँ साझा कीं।
- कुछ ने इसे “जनता का दर्द”,
- तो कुछ ने “सरकारी लापरवाही का आईना” बताया।
कई युवाओं ने कहा—
“हर बार चुनाव में वादा होता है, पर पुलिया अपनी जगह वैसे की वैसी…”
प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी नहीं
समाचार लिखे जाने तक इस कविता और उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
लेकिन कविता के सार्वजनिक होने के बाद उम्मीद है कि स्थानीय विभाग जल्द निरीक्षण और कार्रवाई करेगा।
करुणामय मंडल की यह कविता सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि जमीनी सत्य का दस्तावेज है।
यह सवाल खड़ा करती है— क्या विकास सिर्फ कागज पर है? या जनता की आवाज़ उठने पर ही सड़कें सुधरेंगी?
जनता और कवि अब एक ही बात कह रहे हैं—
“मुख्य सड़क सुरक्षित होनी चाहिए… वरना मौत नहीं राजनीति दौड़ेगी।”














