बिहार का भविष्य: अमित शाह ने सातवीं पढ़े, सम्राट चौधरी को गृह विभाग इसलिए दिए, कि पुलिस, थाना, जेल, जालसाजी, गंभीर अपराध का इन्हें स्वयं प्रैक्टिकल अनुभव है। दुर्भाग्य है कि ऐसे व्यक्तित्व को गृह विभाग मिल रहे हैं। साथ ही उपमुख्यमंत्री तो हैं ही।
अब इस तरह के लोग राजनीति में रोल मॉडल बनेंगे? मैं सोच रहा हूं कि ऐसे देश के शीर्ष पर बैठे दो जिम्मेदार व्यक्ति अमित शाह और मोदी जी की अंतरात्मा कहां चली जाती है? ये कुछ चिंतन करते भी है? या अनपढ़ों की तरह खेल जाते हैं? ज्यादा होशियारी ही नीतीश बाबू को इनसे अलग करता रहा है। क्योंकि नीतीश बाबू का आचरण बनिया वाला नहीं रहा है।
खैर सम्राट साहब का करियर ‘राजद’ फिर जेडीयू’ तुरंत कम समय में ही हनुमान कूद, बीजेपी ज्वाइन कर शीघ्र उप मुख्यमंत्री बन बैठे, इतने दाग (सात मर्डर के अभियुक्त, इनके कई नाम) लेकर शिखर पर है तो इनमें कुछ तो काला और कला कूट-कूट कर भरी होगी ही? राजनीति में इतना सब कुछ यह सब पाना आसान तो नहीं?
अमित शाह और मोदी जी की एक विशेषता रही है। पिछले सात वर्षों में आपने देखा होगा। सभी दागी, अपराधी, भ्रष्ट/करप्ट इनके पास है। आप सब ने देखा होगा की, बहुत बड़का पाखंडी, पढ़ाई लिखाई, रोजगार के डर से बाबा बन गए, जो बागेश्वर बाबा हैं।
जब इनको एक बाबा शंकराचार्य ने भला-बुरा कहने लगे तब मोदी जी ने तुरंत इनके आश्रम में पधारकर इन्हें बड़ा बना दिया। मोदी जी ऐसे आश्रमों में जाते रहे हैं, आशा राम बापू तो कभी ढोंगी राम रहीम के पास। मोदी जी और अमित शाह का काम ही यही है कि दुनिया ने अगर गलत कहा, किसी पर अपनी अंगुली उठाई तो ये दोनों वैसे व्यक्ति को महान बना देते हैं इनका ये प्रचलन है।
इन्हें ये लगता ही नहीं? ऐसे बेकार चरित्र पर इनका पूर्ण आस्था और विश्वास भी रहता है। कि गलत किरदार निभाने वाला आदमी हो न हो चतुर तो है? और आप तो जानते हैं , राजनीत में क्षुद्र, चाटुकार और चतुर ही आदमी की आवश्यकता होती है। जो बिन बताए बहुत कुछ समझ जाए। कोई सुनील पिंटू है जिसके नंगे महिला के साथ mms है, लोगों ने इनपर अंगुली उठाई, फिर क्या अमित शाह ने इन्हें सिर्फ टिकट ही नहीं दिया, उन्हें जीता भी दिया।
आगे कुछ तो काम आएगा ही। समझ लीजिए। बल्कि अमित शाह ने कहा कि इसे हम और बड़ा आदमी बनाएंगे। लोगों ने कहा कि मैथिली को टिकट नहीं मिलना चाहिए, टिकट मिल गए, चाणक्य ने जीता भी दिया। क्योंकि EVM तो गुजराती मेड है। बताओ किसको जितना है? बस लो जीत गए। जितने एंकर जेल गए, वह इनका सबसे प्रिय एंकर है। जितने दागी हैं वे सब अमित शाह के पास हैं। क्योंकि खेल तो दागी ही खेलते है। ईमानदार आदमी तो बस दो वक्त की रोटी ही कमा पाता है।
नीतीश कुमार जी ने अपने राजनीतिक करियर में कोई बात फेंकी नहीं है। इनके पास कोई छल-कपट नहीं रहा, ईमानदारी इतनी रही कि बिहार के आर्थिक कोष को कभी लुटा नहीं। जात-पात की राजनीति नहीं की। व्यवसायियों को कभी तंग नहीं किए। चोरों के साथ उठक-बैठक नहीं किए। आज इनके अपने ही साथी विभीषण बने बैठे हैं। सत्ता की लालच सबको रहता है। लेकिन शुद्ध विचारों में कहें तो नीतीश जी बड़ी ईमानदारी से बिहार में अंतर्मन से बड़े बदलाव किए।
2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के शासन के ख़िलाफ कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं थी। जिस तरह नीतीश सरकार ने सहायता एक समूह बनाकर एक करोड़ 40 लाख जीविका दीदियों को आत्मनिर्भर बनाने की प्रयास किए उससे भी नीतीश कुमार के पीछे महिलाएँ एकजूट हुईं। नीतीश कुमार बनना इतना आसान नहीं। आज ढलता हुआ उम्र है। परन्तु इनका कद मोदी जी, अमित शाह जैसा वर्चुअल (बनावटी) नहीं।













