जमशेदपुर : शिक्षा और समाजसेवा को समर्पित संस्था भारतीय गैर सरकारी शिक्षक संघ सह समाजसेवी संगठन IPTA द्वारा शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह जमशेदपुर के मोतीलाल स्कूल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा सहित कई प्रांतों से आए 221 शिक्षकों-शिक्षिकाओं को IPTA राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही, लगभग 500 से अधिक शिक्षकों को भी विशेष सम्मान देकर उनकी सेवाओं को सराहा गया।
निजी शिक्षकों की भूमिका पर जोर
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. परमानंद मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक ही असल में राष्ट्र निर्माता हैं और प्रत्येक गुरु समाज को दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा—
“देश की 90% शिक्षा नीति को सुदृढ़ बनाने में निजी शिक्षकों की अहम भूमिका रही है। आज भारत में 50 लाख से अधिक निजी शिक्षक कार्यरत हैं, अतः उनके अधिकारों की रक्षा हेतु ‘शिक्षक सम्मान योजना’ शीघ्र लागू की जानी चाहिए और संविधान में उनके लिए विशेष एक्ट का प्रावधान होना चाहिए।”
डॉ. मोदी ने शिक्षकों को समाज का आधार बताते हुए कहा कि जब तक गुरु का सम्मान नहीं होगा, तब तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना संभव नहीं है।

कला और मनोरंजन का समागम
सम्मान समारोह केवल गंभीरता और औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कला और संस्कृति का रंग भी देखने को मिला। टीवी धारावाहिकों—मोटू-पतलू, ओगी, भाभी जी घर पर हैं से लोकप्रिय कॉमेडी एक्टर सौरभ चक्रवर्ती ने अपनी हास्य प्रस्तुति से दर्शकों को ठहाकों से गूँजा दिया।
संगठन का नारा – “कलम के फंडे से”
IPTA के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी कमलेश गिरी ने कार्यक्रम में संगठन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा—
“हमारा संगठन सदैव इस एक ही नारे पर काम करता है –
न डंडे से, न झंडे से… हम अपने अधिकार लेंगे कलम के फंडे से।”
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण हैं और उनके अधिकारों के लिए IPTA लगातार संघर्ष करता रहेगा।

विशिष्ट अतिथि व गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर मोतीलाल स्कूल के सचिव डी.पी. शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग भी शामिल हुए।
उपस्थित प्रमुख अतिथियों में डॉ. नथुनी सिंह, एस.डी. प्रसाद, अखिलेश कुमार, आनंद गौर, वकील कुमार, अशोक प्रसाद, आर.बी. निराला, रमेश शर्मा, बबीता ठाकुर, संजीव श्रीवास्तव, अनामिका श्रीवास्तव, प्रेम दीक्षित, मोहम्मद ताहिर, हुसैन, सुमित कुमार मिश्रा, जटाशंकर पांडे, जे.एन. दास और विनीत शाह के नाम उल्लेखनीय रहे।
समारोह की विशेषता
इस अवसर पर हजारों की संख्या में उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने न केवल अपने सम्मान को गर्व की दृष्टि से स्वीकार किया, बल्कि एकजुट होकर निजी शिक्षकों के अधिकारों की माँग को भी स्वर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान प्रदान करना नहीं था, बल्कि यह भी संदेश देना था कि निजी शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका उचित स्थान समाज व शासन दोनों में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस प्रकार IPTA का यह भव्य शिक्षक सम्मान समारोह न केवल शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने वाला साबित हुआ, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि शिक्षा और शिक्षक समाज के उत्थान की नींव हैं।












