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Illegal occupation of government accommodation: 5 साल से सरकारी आवास पर अवैध कब्जा

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On: July 9, 2025 12:37 PM
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Illegal occupation: सरकारी आवास पर अवैध कब्जा, पांच साल से खाली नहीं कराया गया डोरंडा औषधालय परिसर का आवास, अब फिर मिला एक सप्ताह का अल्टीमेटम।

हमारे देश में सरकारी संपत्ति का उपयोग जनता की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। लेकिन जब वही संपत्ति कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए अवैध रूप से कब्जा कर लेते हैं और वर्षों तक सरकारी आदेशों की अनदेखी होती है, तो सवाल उठना लाज़िमी है – आखिर कब तक ऐसे मामलों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा?

ऐसा ही एक मामला झारखंड की राजधानी रांची के डोरंडा स्थित राजकीय औषधालय परिसर से सामने आया है। जहां एक पूर्व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ने सेवा समाप्त होने के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं किया और अब तक वहाँ डटा हुआ है।

सरकारी आवास पर Illegal occupation को लेकर क्या है मामला

श्री शशिभूषण सिंह, जिनकी नियुक्ति 2015 में माननीय मंत्री की अनुशंसा पर बाह्य स्रोत से दैनिक लिपिक के रूप में हुई थी, उनका सेवा काल समाप्त हो चुका है। बावजूद इसके वे अब तक डोरंडा स्थित राजकीय औषधालय परिसर के एक सरकारी क्वार्टर पर अवैध रूप से काबिज हैं

इतना ही नहीं, उनके विरुद्ध स्थानीय लोगों को परेशान करने, गाली-गलौज, और अभद्र व्यवहार की भी शिकायतें सामने आई हैं।

श्रीमती शिल्पी सिन्हा नामक महिला ने 28 मई 2025 को विभाग को पत्र लिखकर बताया कि शशिभूषण सिंह और उनके परिवार द्वारा उनके साथ तथा उनके मेहमानों के साथ अभद्रता की गई।

क्या कहते हैं सरकारी पत्र?

इस मामले में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने दो बार स्पष्ट आदेश जारी किए:

पहला पत्र – दिनांक 22 जून 2020

इस पत्र में डॉ. नितीन कुलकर्णी, (प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग) ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया था कि:

“श्री शशिभूषण सिंह द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्वार्टर को एक सप्ताह के भीतर खाली कराया जाए और कार्रवाई की सूचना दी जाए।”

हालांकि इस आदेश के पाँच साल बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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दूसरा पत्र – दिनांक 17 जून 2025

पाँच वर्षों की चुप्पी और लापरवाही के बाद डॉ. सी. के. शाही (निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं) ने पुनः गंभीर चेतावनी के साथ सिविल सर्जन, रांची को निर्देश भेजा:

“वर्ष 2020 के आदेश का अनुपालन अब तक नहीं हुआ है। अतः अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई एक सप्ताह के भीतर की जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसे अत्यावश्यक समझा जाए।”

इस पत्र में यह भी कहा गया कि सभी संबंधित दस्तावेज पहले भी सिविल सर्जन को भेजे जा चुके हैं, फिर भी चुप्पी बनी हुई है।

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मुद्दे की गंभीरता और सवाल

  • यह मामला सिर्फ एक अवैध कब्जा नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की लापरवाही और शिथिलता का भी उदाहरण है।
  • पाँच वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अगर विभागीय आदेशों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासन की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
  • सवाल यह भी है कि क्या सिविल सर्जन कार्यालय जानबूझकर कार्रवाई टाल रहा है?

संवेदनशील पहलू

सरकारी क्वार्टरों में कुछ लोग वर्षों से बिना किसी अधिकार के रह रहे हैं, जबकि कई ज़रूरतमंद सरकारी कर्मी आवास के लिए भटकते हैं। ऐसे में यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो अन्य लोग भी ऐसे कब्जों को जायज़ ठहराएंगे

लेखक का संदेश

सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा एक गंभीर अपराध है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विभागीय आदेशों की अनदेखी सिर्फ व्यवस्था को खोखला करती है।

प्रशासन को चाहिए कि वह कानून और निर्देशों का पालन कर इस तरह के मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करे, ताकि दूसरों को भी संदेश मिले कि सरकारी संपत्ति कोई जागीर नहीं होती, यह जनता की धरोहर होती है।

अब देखने की बात यह है कि इस बार दिए गए एक सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद क्या वाकई कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी पुराने आदेशों की तरह फाइलों में दबा रह जाएगा?

https://thenewsframe.com/jamshedpur-food-safety-raid-at-khalsa-hotel/

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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