इटावा: इटावा रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। कालका एक्सप्रेस के इंजन से पुलिस ने एक फर्जी लोको पायलट को गिरफ्तार किया है। युवक न केवल पूरी यूनिफॉर्म और नकली आईडी कार्ड में था, बल्कि हाथ में लाल-हरी झंडी और लॉगबुक भी लिए बैठा था।
कैसे पकड़ा गया फर्जी पायलट?
जानकारी के अनुसार, ट्रेन के असली लोको पायलट को उसके व्यवहार और तौर-तरीकों पर शक हुआ। जब उससे गहराई से पूछताछ की गई, तो उसकी ‘नौकरी का नाटक’ तुरंत उजागर हो गया।
आरोपी कौन है?
गिरफ्तार युवक की पहचान आकाश कुमार, निवासी फिरोजाबाद के कौसल्या नगर, के रूप में हुई है। वह सिर्फ दसवीं पास है। आकाश ने पुलिस को बताया कि वह पिछले दो सालों से खुद को लोको पायलट बताकर ट्रेनों के इंजनों में सफर करता आ रहा था।
उसके पास से पुलिस ने लोको पायलट की नकली यूनिफॉर्म, आईडी कार्ड, नेमप्लेट, लाल-हरी झंडी और एक लॉगबुक बरामद की है। पूछताछ में उसने कबूला कि वह यह सब सिर्फ ट्रेन का किराया बचाने के लिए करता था।
दो साल से कर रहा था सफर
आकाश ने स्वीकार किया कि कभी एक्सप्रेस तो कभी पैसेंजर ट्रेनों के इंजनों में बैठकर सफर करता था। उसकी वर्दी और नकली पहचान पत्र असली जैसे दिखते थे, इसलिए किसी ने भी उस पर संदेह नहीं किया।
रेलवे सुरक्षा पर सवाल
रेलवे सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल किराया बचाने की ट्रिक नहीं हो सकती। अगर यह युवक किसी तरह ट्रेन चलाने की कोशिश करता, तो हजारों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
जीआरपी अधिकारियों ने युवक को जेल भेज दिया है और अब यह जांच की जा रही है कि कहीं इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
यह घटना रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कोई फर्जी लोको पायलट दो साल तक कैसे बिना पकड़े ट्रेनों के इंजन में बैठता रहा।











