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डायबिटिक रेटिनोपैथी – मधुमेह की स्थिति में आंखों की रोशनी की सुरक्षा – डॉ. अभिषेक पटनायक

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On: November 13, 2025 8:29 PM
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डायबिटीज आज दुनिया की सबसे सामान्य दीर्घकालिक बीमारियों में से एक है, जो सभी आयु वर्ग के लगभग 82.8 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित कर रही है। अधिकांश लोग डायबिटीज को केवल हाई ब्लड शुगर से जोड़ते हैं, लेकिन इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है। डायबिटीज की सबसे गंभीर और दृष्टि को प्रभावित करने वाली जटिलताओं में से एक है डायबिटिक रेटिनोपैथी (DR) — यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख के पिछले हिस्से में स्थित रेटिना (प्रकाश-संवेदनशील ऊतक) को नुकसान पहुंचता है। अनुमान है कि वर्ष 2045 तक वयस्क जनसंख्या में इसके मामलों की संख्या बढ़कर लगभग 16 करोड़ तक पहुंच सकती है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी तब होती है जब लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक बना रहता है। इससे आंखों की रेटिना में मौजूद बेहद महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है। धीरे-धीरे ये रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं, उनमें से तरल रिसने लगता है या वे बंद हो जाती हैं, जिसके कारण रेटिना तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति कम हो जाती है।

जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, रेटिना की सतह पर नई और असामान्य रक्त वाहिकाएं बनने लगती हैं। ये कमजोर होती हैं और आसानी से फट सकती हैं, जिससे रक्तस्राव, स्कारिंग और कभी-कभी रेटिना के अलग हो जाने (रेटिनल डिटैचमेंट) जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यदि समय पर पहचान और उपचार न किया जाए, तो यह समस्या दृष्टि में स्थायी और गंभीर कमी या यहां तक कि पूर्ण अंधत्व का कारण भी बन सकती है।

मौन खतरा:
डायबिटिक रेटिनोपैथी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह धीरे-धीरे और बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती है। शुरुआती चरणों में मरीज को न दर्द होता है, न लालिमा दिखती है, न ही दृष्टि धुंधली होती है। जब तक नजर कमजोर पड़नी शुरू होती है, तब तक रोग अक्सर काफी बढ़ चुका होता है। इसीलिए, हर डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के लिए नियमित और संपूर्ण नेत्र जांच अत्यंत आवश्यक है — भले ही दृष्टि सामान्य प्रतीत हो।

चेतावनी संकेतों की पहचान:
लक्षण:

  • दृष्टि धुंधली होना
  • आंखों के सामने काले धब्बे या तैरते हुए धुएं जैसे धब्बे दिखाई देना
  • रात में देखने में कठिनाई होना
  • अचानक कम दिखाई देना या बिल्कुल न दिखना
  • इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
  • समय पर पहचान और उपचार से डायबिटिक रेटिनोपैथी के लगभग 90% तक मामलों में दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।

निदान और उपचार: टाटा मेन हॉस्पिटल का नेत्र विभाग उच्च स्तरीय जांच सुविधाओं के लिए जाना जाता है। यहां अत्याधुनिक Zeiss OCT, Clarus FFA और रेटिनल लेज़र मशीन जैसी उन्नत तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से रेटिना को हुए नुकसान की सटीक जांच और मूल्यांकन किया जाता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का उपचार इसके चरण और गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती अवस्था में, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर सख्त नियंत्रण रोग की प्रगति को काफी हद तक धीमा कर सकता है।

अधिक गंभीर अवस्थाओं में किए जाने वाले उपचार में शामिल हो सकता है — लेज़र फोटोकोएग्यूलेशन, इंट्राविट्रियल इंजेक्शन — जिसमें एंटी-VEGF (वैस्कुलर एंडोथेलियल ग्रोथ फैक्टर) दवाओं या स्टेरॉयड्स का उपयोग किया जाता है, और कुछ मामलों में, विट्रेक्टॉमी सर्जरी, जिसके माध्यम से आंख के भीतर जमा रक्त या स्कार टिश्यू को हटाया जाता है।

रोकथाम ही सबसे बेहतर इलाज है: डायबिटिक रेटिनोपैथी से दृष्टि हानि को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है — समय पर जागरूकता और नियमित नेत्र जांच। डायबिटीज से पीड़ित हर व्यक्ति को कम से कम वर्ष में एक बार संपूर्ण डाइलेटेड आई एग्ज़ामिनेशन अवश्य करवाना चाहिए, ताकि किसी भी शुरुआती बदलाव का पता समय रहते लगाया जा सके। डॉक्टर की सलाह पर यह जांच और भी अधिक बार की जा सकती है। साथ ही, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से परहेज और दवाओं का नियमित सेवन जैसी आदतें अपनाकर रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हर डायबिटिक मरीज के लिए संदेश: आंखों की रोशनी हमारी सबसे कीमती इंद्रियों में से एक है, फिर भी डायबिटिक रेटिनोपैथी कामकाजी उम्र के वयस्कों में अंधत्व का प्रमुख कारण बनी हुई है। अच्छी खबर यह है कि आज आधुनिक उपचार और नियमित नेत्र देखभाल के माध्यम से डायबिटिक आंखों की बीमारियों से होने वाली नेत्रहीनता को काफी हद तक रोका जा सकता है।

याद रखें:

  • डायबिटिक आंखों की बीमारी अक्सर बिना किसी लक्षण के बढ़ती है — आपको महसूस न हो, पर आपके नेत्र विशेषज्ञ उसकी शुरुआत चरण में पहचान सकते हैं।
  • इसलिए देर न करें, अपनी नियमित नेत्र जांच कराएं। समय पर जांच और उपचार ही आपकी दृष्टि को बचा सकते हैं। नवंबर माह ‘विश्व मधुमेह जागरूकता माह’ के रूप में भी मनाया जाता है।

– डॉ. अभिषेक पटनायक, कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट, टाटा मेन हॉस्पिटल, जमशेदपुर (झारखंड)।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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