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चाईबासा कांड पर सीएम हेमंत सोरेन सख्त — इस मामले में कार्रवाई तेज, कई अधिकारी निलंबित!

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On: October 26, 2025 7:40 PM
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चाईबासा/रांची, 26 अक्टूबर 2025 | द न्यूज़ फ्रेम

चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने का मामला अब राज्यव्यापी संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शनिवार को जांच में चार और बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद संक्रमित बच्चों की संख्या 5 तक पहुंच गई थी। अब इस मामले पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सख्त रुख अपनाया है।

मुख्यमंत्री ने इस घटना को “अत्यंत पीड़ादायक और अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली में इस तरह की लापरवाही को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को इस पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस सम्बन्ध में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा

“हेमंत सोरेन जी को अवगत कराना चाहता हूँ कि दो दिन पूर्व यह मामला मेरे संज्ञान में आया था, जिसके बाद मैंने तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। जांच के क्रम में एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे में एचआईवी संक्रमण की प्राथमिक पुष्टि हुई है। इस गंभीर मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए चाईबासा के सिविल सर्जन,एचआईवी यूनिट के प्रभारी चिकित्सक तथा संबंधित टेक्नीशियन सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है। मैंने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है और उसे एक सप्ताह के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह स्पष्ट रूप से कहा है कि जांच में यह सुनिश्चित किया जाए कि रक्त आपूर्ति रक्त अधिकोष (Blood Bank) से हुई थी या बाहर से। यह भी ध्यान देने योग्य है कि एचआईवी संक्रमण की पूरी पुष्टि में लगभग चार सप्ताह का समय लगता है। विंडो पीरियड के दौरान यदि संक्रमित व्यक्ति का रक्त ट्रांसफ्यूज हो जाए, तो संक्रमण की ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।”

सीएम ने दिए बड़े निर्देश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य में स्थित सभी ब्लड बैंकों का ऑडिट तत्काल किया जाए और पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्रक्रिया में लचर व्यवस्था को सुधारना अब अनिवार्य है।

इस बीच, चाईबासा में सामने आए इस मामले के बाद सरकार ने पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन और अन्य संबंधित पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “इस तरह की घटना में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवज़ा

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि संक्रमित बच्चों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को बच्चों के आगे के इलाज और निगरानी के लिए विशेष मेडिकल टीम गठित करने का निर्देश भी दिया गया है।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब एक 7 वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता ने डीसी से शिकायत की कि सदर अस्पताल में चढ़ाए गए खून के बाद उनका बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। माता-पिता दोनों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मामला स्पष्ट हुआ कि खून ही संक्रमण का स्रोत था।

इसके बाद डीसी ने जांच के आदेश दिए और झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

जनता में आक्रोश, सिस्टम पर सवाल

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की ब्लड सेफ्टी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों में भय का माहौल है, और कई लोग अब सरकारी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने से परहेज़ कर रहे हैं।

🩸 “संवेदनशील बच्चों की जिंदगी से हुआ यह खिलवाड़ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरी चोट है।”
द न्यूज़ फ्रेम विश्लेषण

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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