नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025 (PIB): प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक महत्वपूर्ण लेख साझा किया, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जलवायु के साथ न्याय (Climate Justice) केवल एक नीतिगत विषय नहीं, बल्कि भारत का नैतिक कर्तव्य और वैश्विक जलवायु कार्रवाई का केंद्रबिंदु है। प्रधानमंत्री ने यह लेख उस समय साझा किया जब देश और विश्व स्तर पर पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को लेकर नई नीतिगत चर्चाएँ चल रही हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण जलवायु न्याय के प्रति भारत की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Union Environment Minister Shri @byadavbjp emphasises that for India, climate justice is a moral duty and central to global climate action.
— PMO India (@PMOIndia) October 27, 2025
He highlights the need for fair, grant-based climate finance that recognises historical responsibilities and supports developing nations… https://t.co/EwTnMWOSBc
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि —
“जलवायु के साथ न्याय केवल विकासशील देशों के लिए एक आवश्यकता नहीं, बल्कि वैश्विक न्याय का एक मूल तत्व है। हमें ऐसे वित्तीय ढाँचे की आवश्यकता है जो निष्पक्ष, अनुदान-आधारित और ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को मान्यता देने वाला हो। इससे विकासशील देशों को समान रूप से समर्थन मिल सकेगा।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए लेख में भारत की जलवायु नीति की मूल भावना दोहराई गई है —
“सभी के लिए न्यायसंगत विकास और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी।”
प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के सिद्धांत के तहत जलवायु संरक्षण को सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का रूप दिया है।
यह लेख ऐसे समय सामने आया है जब विश्व जलवायु सम्मेलन (COP) की तैयारियाँ तेज हो रही हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यह कहा है कि विकसित देशों को अपने ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी लेते हुए विकासशील देशों को पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री का यह संदेश वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट आह्वान है — जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध लड़ाई में न्याय, सहयोग और साझा जिम्मेदारी ही स्थायी समाधान का मार्ग है।
प्रधानमंत्री का संदेश:
“जलवायु के साथ न्याय केवल पर्यावरण की सुरक्षा नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है।”













