- परिवार का आरोप — डॉक्टरों की लापरवाही से मासूम की हालत गंभीर, अब तक ढाई लाख रुपये खर्च
बैतूल (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के टीकाबर्री गांव का 3 साल 8 माह का मासूम हर्ष यदुवंशी इन दिनों नागपुर मेडिकल कॉलेज के वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। परिवार का आरोप है कि दो डॉक्टरों की लापरवाही और उनके द्वारा लिखी गई Coldrif Syrup के सेवन से उसकी दोनों किडनी फेल हो गईं। परिवार ने अब तक इलाज में करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर दिए हैं, लेकिन बच्चे की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है।
डॉक्टरों ने बार-बार वही दवा लिखी
परिवार के मुताबिक, करीब एक माह पहले हर्ष को हल्का बुखार आया था। परिजन उसे परासिया के डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास लेकर गए। उन्होंने पर्चे पर Coldrif Syrup और कुछ अन्य दवाइयां लिखीं। दवा देने के बाद भी बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं हुआ।

25 सितंबर को जब हर्ष की हालत और बिगड़ गई, तब परिजन उसे परासिया के ही डॉक्टर अमित ठाकुर के पास लेकर गए। उन्होंने भी इलाज किया, लेकिन स्थिति और गंभीर हो गई।
यूरिन बंद हुआ, हालत हुई नाजुक
कुछ दिनों बाद हर्ष का यूरिन पूरी तरह बंद हो गया। परिजन उसे बैतूल के चार अलग-अलग अस्पतालों में ले गए, लेकिन किसी ने भी भर्ती नहीं किया। लगातार बिगड़ती हालत को देखकर परिवार ने उसे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया।
प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन न कर पाने के कारण अंततः बच्चे को नागपुर मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया। वहां जांच में पता चला कि उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी हैं।
वेंटिलेटर पर मासूम, परिवार बेहाल
अब हर्ष वेंटिलेटर पर है। उसके दादा देवा यदुवंशी का कहना है कि “हमारा पोता अब कोई मूवमेंट नहीं कर पा रहा है। डॉक्टरों की लापरवाही ने उसकी जान खतरे में डाल दी।”
परिवार का कहना है कि उन्होंने दोनों डॉक्टरों से कई बार पूछा कि सिरप से नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन उन्हें बार-बार वही दवा दी गई।
इलाज में ढाई लाख रुपये खर्च, मदद की गुहार
परिजन बताते हैं कि अब तक इलाज पर लगभग ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अब मदद की गुहार लगा रहा है। गांव के लोग और सामाजिक संगठन भी आगे आकर सहायता की अपील कर रहे हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी
घटना के बाद भी अभी तक स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई जांच शुरू नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि डॉक्टरों की लापरवाही की जांच कर उन्हें सस्पेंड किया जाए और परिवार को मुआवजा दिया जाए।
संभावित सवाल उठे — क्या कोल्ड्रिफ सिरप सुरक्षित है?
यह घटना कई सवाल खड़े करती है —
- क्या बच्चों के लिए Coldrif Syrup का उपयोग सुरक्षित है?
- क्या डॉक्टरों ने सही डोज़ और दवा दी थी?
- क्या सिरप के साइड इफेक्ट पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही?
टीकाबर्री गांव का यह मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का आईना है। एक मासूम, जो महज़ बुखार से पीड़ित था, आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। सवाल उठता है — अगर समय रहते डॉक्टरों ने सावधानी बरती होती, तो क्या हर्ष आज भी मुस्कुरा रहा होता?







