जमशेदपुर, बारीडीह: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन मंगलवार सुबह बारीडीह शिव मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। व्रतियों ने भगवान भास्कर को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पूरे विधि-विधान से पूजा सम्पन्न की और अपने परिवार व समाज की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्यता की कामना की।
इससे पूर्व सोमवार की शाम व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया था। उसके बाद मंगलवार की सुबह पारण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त किया। छठ के दोनों अर्घ्य के अवसर पर बारीडीह शिव मंदिर का पूरा परिसर छठमय हो उठा — हर ओर “उगे हो सूरज देव…” और “केलवा के पात पर उगेला सूरज देव…” जैसे पारंपरिक गीत गूंजते रहे।
भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम
नदी व मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी बिजली की झालरों और पुष्प सज्जा से सजाया गया था। सामाजिक संगठनों और स्थानीय समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच दूध, दातून और प्रसाद का वितरण किया गया। सुरक्षा और स्वच्छता की दृष्टि से मंदिर समिति और स्वयंसेवकों ने व्यवस्था को बखूबी संभाला।
समिति और समाजसेवियों की भूमिका
कार्यक्रम की सफलता में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर और नमन शहीदो को नमन संस्था के संयोजक वरुण कुमार का विशेष योगदान रहा।
इसके अलावा समिति के महामंत्री आशीष झा, रतन कुमार शुक्ला, रवि कुमार शुक्ला, दुद्धेश्वर मिश्रा, कार्तिक झा, रोशन झा, पंडित हीरालाल मिश्रा, पंडित हीराकांत झा, शिबु जी, सतीश कुमार झा, बीबी सिंह आदि ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लाइटिंग और साज-सज्जा में नीतीश और मुकेश का विशेष योगदान रहा।
बारीडीह शिव मंदिर में सम्पन्न छठ महापर्व ने एक बार फिर लोक आस्था, अनुशासन और सामूहिकता की मिसाल कायम की। भक्ति, समर्पण और सेवा भावना से ओतप्रोत इस आयोजन ने पूरे शहर को आस्था की एक डोर में बाँध दिया।








