मेरठ/उत्तर प्रदेश: मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर भारतीय सेना के जवान से की गई बर्बर पिटाई का मामला अब बड़े विवाद में बदल चुका है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, जिसके बाद देशभर से लोगों में गुस्सा देखने को मिला। भारतीय सेना ने भी इस मामले पर नाराज़गी जताते हुए सरकार और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस पूरे प्रकरण के बाद प्रशासन हरकत में आया और टोल प्लाजा के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही टोल प्रबंधन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
कैसे हुआ विवाद?
जानकारी के अनुसार, जवान कपिल कावड़ सेना में कार्यरत हैं और हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में शामिल होकर छुट्टी पर घर आए थे। छुट्टी समाप्त होने पर जब वह अपनी ड्यूटी पर वापस लौट रहे थे तो रात लगभग 8 बजे उनकी गाड़ी मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर पहुंची।
कपिल ने अपना आर्मी आईडी कार्ड दिखाकर बताया कि वह ड्यूटी के लिए श्रीनगर जा रहे हैं और दिल्ली से उनकी फ्लाइट है, इसलिए उन्हें बिना टोल शुल्क लिए जाने दिया जाए। लेकिन टोल कर्मचारियों ने बात मानने के बजाय बहस शुरू कर दी। देखते-देखते मामला इतना बढ़ गया कि कर्मचारियों ने जवान और उनके भाई को खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
वायरल वीडियो और ग्रामीणों का गुस्सा
जवान की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। अगले ही दिन करीब 500 ग्रामीण टोल प्लाजा पर इकट्ठा हो गए और वहां जमकर हंगामा किया। उन्होंने टोल प्लाजा के कंप्यूटर और अन्य उपकरण तोड़ दिए।
पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभालने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों के सामने काबू पाना आसान नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुरेश, सचिन, अंकित, विजय और अनुज नाम के पांच टोल कर्मियों को गिरफ्तार किया है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर सेना के जवान और ग्रामीणों के समर्थन में लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
एक यूजर ने लिखा – “इस बार सही फंसे टोल प्लाजा वाले।”
दूसरे ने कहा – “आरोपी नहीं, आतंकवादी हैं ये सुरेश, सचिन, अंकित, विजय, अनुज।”
तीसरा लिखता है – “बहुत अच्छा किया, इन्हें अच्छे से सबक सिखाना जरूरी था।”
संदेश
इस घटना ने न केवल प्रशासन को हिला दिया, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी झकझोर दिया है। एक ओर वह जवान, जो देश की सीमाओं पर खड़ा होकर सुरक्षा करता है, और दूसरी ओर कुछ लोग उसकी वर्दी और सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं।
सरकार और प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई (लाइसेंस रद्द और जुर्माना) से साफ संदेश गया है कि देश के जवानों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और उम्मीद है कि आगे से ऐसी घटनाओं पर और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।













