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शीत, कोहरा और भावनाओं के बीच — करुणामय मंडल की ‘वर्ष विदाई’ कविता ने मन को छुआ

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On: December 31, 2025 8:30 PM
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पूर्व जिला पार्षद पोटका, करुणामय मंडल ने वर्ष 2025 के अंतिम दिन एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की है, जिसने इस ठिठुरन भरी सुबह में मानो गर्माहट भर दी हो। कोहरा छाया है… धरती कंपित है… पर आशा की रोशनी अभी भी आसपास है — यही संदेश देती है यह रचना।

कविता पढ़ें :

“छाए हुए घनघोर कोहरे
चारों ओर अंधियार है।
अदृश्य है धरती में सब
शीत कंपित संसार है।।
ऐसे क्षण में वर्ष विदाई
क्या गम क्या उल्लास है।
अपनी सतर्क अपनी सुरक्षा
मानो सब के प्रयास है।।
प्रतिकूल है परिवेश आज
फिर भी सब उत्साहित है।
कोहरे शीत का खलल है
वावजूद भय रहित है।।
बनभोज का धूम पड़ी है
शीत लहरे कोहरे संग।
बीमार, बच्चे, बूढ़े-बुजुर्ग
भारी ना पड़ जाए उमंग।।
अभी अभी ज्योत दिखी है
मानो अभी हुई प्रभात।
शीत के ये अंधेरे कोहरे
पलभर सूर्य हुई साक्षात।।
रोशनी उसकी प्यारी लगी
मानो अर्से बाद मिला।
फूल खिली चेहरे खिला
जैसे मिटे शिक्वा गिला।।
बीत गए वर्ष सुख दुःख में
आशा निराशा साथ लिए।
उठा पटक जद्दोजहद में
हर पल नई जज्बात लिए।।
कितने नए मित्र बनें सब
छूट गए पुराने मित्र।
महकते रहे पुराने वर्ष
लिए प्रेम पावन इत्र।।
वर्ष के आज अंतिम तिथि
वर्ष विदाई की घड़ी है।
क्या खोया और क्या पाया
हिसाब लंबी चौड़ी है।।
हिसाब की उस उलझन में
ये समय ना जाय बीत।
मंगलमय हो वर्ष बिदाई
मधुमय हो जीवन संगीत।।”

कोहरे और सन्नाटे के बीच उम्मीद की किरण

कविता की शुरुआत में कवि बताते हैं कि
घनघोर कोहरे ने चारों ओर अंधकार बिछा दिया है, मानो धरती अदृश्य हो गई हो।
ऐसे कठिन क्षणों में वर्ष विदाई के भाव — न गम, न उल्लास — बस अपनी सुरक्षा, अपनी सतर्कता की पुकार।

और वहीं दूसरी ओर, जनता उत्साहित भी है…
बनभोज, मिलन, उमंग —
पर कवि संवेदना जगाते हुए याद दिलाते हैं कि
बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों का ध्यान रखें।

अंधियारे में उजाले की दस्तक

कवि लिखते हैं —
अचानक एक ज्योत दिखती है… मानो प्रभात हो उठी
सूर्य की हल्की किरणें चेहरे खिला देती हैं,
दुख—गम जैसे पलभर में मिट जाते हैं।

ये दृश्य संकेत है कि
नई उम्मीदें हमेशा अंधेरों के बाद आती हैं।

गुज़रते वक्त का भावुक लेखा-जोखा

कविता पुरानी यादों को भी सहजता से छूती है —
सुख-दुःख, आशा-निराशा, संघर्ष, नए दोस्त, छूटते साथी…
सब मिलकर बना चुके हैं एक पूरा वर्ष।

कवि कहते हैं —
वर्ष ने हमें पावन प्रेम और इत्र जैसी यादें दीं,
अब विदाई की घड़ी है…
हम लंबा-चौड़ा हिसाब न निकालें,
बस इस पल को प्रेम और मधुर स्मृतियों संग विदा करें।

संदेश — मधुमय हो जीवन संगीत

करुणामय मंडल आत्मीय भाव से कामना करते हैं:

“मंगलमय हो वर्ष बिदाई,
मधुमय हो जीवन संगीत”

यह संदेश सिर्फ शब्द नहीं —
बल्कि ठंड में एक गरमाहट भरी दुआ है,
जो हर दिल से सीधे जुड़ जाती है।

कवि परिचय
करुणामय मंडल
पूर्व जिला पार्षद, पोटका — पूर्वी सिंहभूम, झारखंड
प्रस्तुति — 31 दिसंबर 2025, मध्यान्ह 12:25 बजे
📞 9693623151

“शुभ वर्ष बिदाई” — नई सुबह बेहतर हो!

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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