- ग्रामीणों का ऐलान— “सरकारी सुविधा नहीं तो वोट नहीं”
बड़की सरिया : नगर पंचायत में जहां एक ओर चुनावी सरगर्मी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले श्रीरामडीह गांव में हालात बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने आक्रोश रैली निकालकर पूरे श्रीरामडीह में भ्रमण किया और वोट बहिष्कार के नारे लगाए।
ग्रामीणों का सीधा आरोप
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक बुनियादी सरकारी सुविधाएं नहीं, तब तक कोई वोट नहीं। उनका आरोप है कि श्रीरामडीह को जबरन एक साजिश के तहत शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया गया, जबकि यह गांव सरिया नगर क्षेत्र से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है। इस शहरीकरण के बदले गांव को मिला—होल्डिंग टैक्स का बोझ, जिसने ग्रामीणों को भारी सरकारी कर्ज के दलदल में धकेल दिया।
सुविधाओं का घोर अभाव
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में:
- बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई ढंग का स्कूल नहीं
- बीमारों के इलाज के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा तक उपलब्ध नहीं
- सड़कों की हालत बदहाल, नालियों की कोई व्यवस्था नहीं
- सिंचाई की कोई सरकारी सुविधा नहीं, जबकि अधिकांश लोग खेती पर निर्भर
खेती के बाद पलायन की मजबूरी
श्रीरामडीह में करीब 70 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। लेकिन खेती महज चार–पांच महीने ही चल पाती है। इसके बाद रोज़ी-रोटी, इलाज और बच्चों की पढ़ाई के लिए लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत, हैदराबाद जैसे महानगरों की ओर पलायन कर जाते हैं। कुछ ग्रामीण तो मजबूरी में विदेश तक चले जाते हैं, ताकि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।
चुनावी वादों से ऊब चुके ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में समाजसेवी और नेता गांव आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं—गांव को “स्वर्ग” बनाने के दावे होते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे ऐसे गायब हो जाते हैं कि दर्शन भी दुर्लभ हो जाता है।
होल्डिंग टैक्स बना ‘महामारी’
ऊपर से शहरी क्षेत्र घोषित होने के बाद लगा होल्डिंग टैक्स ग्रामीणों के लिए किसी महामारी से कम नहीं। बिना सुविधा, सिर्फ टैक्स—यह अन्याय अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।
ग्रामीणों का दो टूक संदेश
श्रीरामडीह के ग्रामीणों ने एक सुर में चेतावनी दी है—
“जब तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी सरकारी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक कोई वोट नहीं।”
अब देखना होगा कि चुनावी मौसम में उठा यह वोट बहिष्कार का मुद्दा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को नींद से जगाता है या फिर यह आवाज भी बाकी वादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।












