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झारखंड में चुनाव का बहिष्कार: बड़की सरिया नगर पंचायत चुनाव के दौरान श्रीरामडीह में वोट बहिष्कार का आह्वान।

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On: February 16, 2026 2:04 PM
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Badki Sariya
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  • ग्रामीणों का ऐलान— “सरकारी सुविधा नहीं तो वोट नहीं”

बड़की सरिया : नगर पंचायत में जहां एक ओर चुनावी सरगर्मी चरम पर है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले श्रीरामडीह गांव में हालात बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने आक्रोश रैली निकालकर पूरे श्रीरामडीह में भ्रमण किया और वोट बहिष्कार के नारे लगाए।

ग्रामीणों का सीधा आरोप

ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक बुनियादी सरकारी सुविधाएं नहीं, तब तक कोई वोट नहीं। उनका आरोप है कि श्रीरामडीह को जबरन एक साजिश के तहत शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया गया, जबकि यह गांव सरिया नगर क्षेत्र से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित है। इस शहरीकरण के बदले गांव को मिला—होल्डिंग टैक्स का बोझ, जिसने ग्रामीणों को भारी सरकारी कर्ज के दलदल में धकेल दिया।

सुविधाओं का घोर अभाव

ग्रामीणों के मुताबिक गांव में:

  • बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई ढंग का स्कूल नहीं
  • बीमारों के इलाज के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा तक उपलब्ध नहीं
  • सड़कों की हालत बदहाल, नालियों की कोई व्यवस्था नहीं
  • सिंचाई की कोई सरकारी सुविधा नहीं, जबकि अधिकांश लोग खेती पर निर्भर

खेती के बाद पलायन की मजबूरी

श्रीरामडीह में करीब 70 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। लेकिन खेती महज चार–पांच महीने ही चल पाती है। इसके बाद रोज़ी-रोटी, इलाज और बच्चों की पढ़ाई के लिए लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत, हैदराबाद जैसे महानगरों की ओर पलायन कर जाते हैं। कुछ ग्रामीण तो मजबूरी में विदेश तक चले जाते हैं, ताकि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।

चुनावी वादों से ऊब चुके ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में समाजसेवी और नेता गांव आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं—गांव को “स्वर्ग” बनाने के दावे होते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे ऐसे गायब हो जाते हैं कि दर्शन भी दुर्लभ हो जाता है।

होल्डिंग टैक्स बना ‘महामारी’

ऊपर से शहरी क्षेत्र घोषित होने के बाद लगा होल्डिंग टैक्स ग्रामीणों के लिए किसी महामारी से कम नहीं। बिना सुविधा, सिर्फ टैक्स—यह अन्याय अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका है।

ग्रामीणों का दो टूक संदेश

श्रीरामडीह के ग्रामीणों ने एक सुर में चेतावनी दी है—

“जब तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी सरकारी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक कोई वोट नहीं।”

अब देखना होगा कि चुनावी मौसम में उठा यह वोट बहिष्कार का मुद्दा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को नींद से जगाता है या फिर यह आवाज भी बाकी वादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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