जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में 25 से 29 जुलाई 2025 तक ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के लिए उत्पाद डिज़ाइन और विकास पर केंद्रित एक पाँच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का आयोजन एनआईटी के डिज़ाइन एंड इनोवेशन सेंटर ने किया, जिसमें आईआईटी खड़गपुर के एनआईडीआई हब का सहयोग रहा। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय की एनआईडीआई योजना के तहत हुआ।
इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और नवाचार के क्षेत्र में काम करने वालों को ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की समस्याओं के लिए नए डिज़ाइन और समाधान तैयार करने में मदद करना था। कार्यक्रम की शुरुआत एनआईटी के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के उद्घाटन भाषण से हुई। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए डिज़ाइन की भूमिका और ऐसे आयोजनों की जरूरत को रेखांकित किया।
कार्यशाला में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी गुवाहाटी, एनआईडी अहमदाबाद, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, हजारी एग्रो जैसी प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण सत्र लिए, जिनमें कम लागत में प्रोटोटाइप बनाना, ग्रामीण नवाचार, डिज़ाइन की सोच, और कृषि उत्पादों का व्यावसायीकरण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें शिक्षक, छात्र, उद्यमी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और नवप्रवर्तक शामिल थे। भाग लेने वाले प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में अरका जैन यूनिवर्सिटी, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी, आरवीएस कॉलेज, रामगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज आदि शामिल रहे। ग्रामीण संस्थाओं जैसे जेएसएलपीएस, टैगोर सोसाइटी, माचा स्कूल और स्थानीय फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने किया। समापन सत्र में डीन एकेडमिक प्रो. एम.के. सिन्हा और आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. प्रतुल सी. कलिता ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।
कार्यशाला का नेतृत्व डॉ. अशोक मंडल (संयोजक) ने किया। उन्हें डॉ. ओंमहरि गुप्ता, डॉ. तुषार बनर्जी, डॉ. गोपा भौमिक और डॉ. नेहा जायसवाल का सहयोग मिला। छात्र स्वयंसेवकों—अजीत कुमार सिंह, आनंद सिंह और आमिया रंजन काबी—के योगदान की भी सराहना की गई।
इस आयोजन ने दिखाया कि डिज़ाइन और नवाचार के ज़रिए ग्रामीण भारत को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।













