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पत्रकारिता जगत और सरकारी मीडिया पर बड़ा सवाल! DD NEWS के एंकर सुधीर चौधरी पर गंभीर आरोप।

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On: October 30, 2025 4:53 PM
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पत्रकारिता जगत और सरकारी मीडिया पर बड़ा सवाल ! डी डी न्यूज़ के एंकर सुधीर चौधरी पर गंभीर आरोप।
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“सुधीर चौधरी पर गंभीर आरोप: सरकारी मंच पर मेहनतकश कलाकार से किया आर्थिक अन्याय?”

400 घंटे की मेहनत, आठ महीने की प्रतीक्षा और एक अधूरी उम्मीद की कहानी — क्या न्याय मिलेगा?

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पत्रकारिता जगत और सरकारी मीडिया प्रतिष्ठानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मशहूर टीवी एंकर और वर्तमान में सरकारी चैनल पर चल रहे चर्चित प्रोग्राम ‘DECODE’ से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी पर एक स्वतंत्र पेशेवर कलाकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि सुधीर चौधरी ने “DECODE” प्रोग्राम के लिए तैयार किए गए तमाम क्रिएटिव और तकनीकी कार्यों का भुगतान करने से इंकार कर दिया।

पीड़ित का दावा: “400 घंटे काम किया, 15 लाख की बात हुई थी — मिला एक भी पैसा नहीं”

शिकायतकर्ता सुरेन्द्र सिंह नामक स्वतंत्र क्रिएटिव प्रोफेशनल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक भावनात्मक पोस्ट जारी की है।
अपने खुले पत्र में उन्होंने लिखा —

“मैंने सरकारी चैनल के शो ‘DECODE’ के लिए दो महीने में 400 घंटे से ज़्यादा काम किया। दर्जनों एनीमेशन, इंटरफ़ेस, प्रोग्राम आईडी और वीडियो वॉल बनाए। काम उम्मीद से ज़्यादा दिया। प्रोडक्शन मैनेजर से 15 लाख रुपये पर बात हुई थी। लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो रक़म घटाकर सिर्फ़ आठ लाख कर दी गई — वो भी अब तक नहीं मिली।”

सुरेन्द्र का कहना है कि अब सुधीर चौधरी उनके संदेशों का जवाब नहीं देते, न कॉल उठाते हैं, और केवल वकील के ज़रिए जवाब भेजते हैं।

“मित्रता का इनाम — अपमान और शोषण”

पोस्ट में सुरेन्द्र सिंह ने लिखा है कि वह कभी सुधीर चौधरी के साथ काम कर चुके थे, उनके बीच पेशेवर रिश्ता और मित्रता दोनों थी।
उन्होंने लिखा —

“मैंने यह काम मित्रता में भरोसे पर किया। लेकिन आज वही मित्र मुझे कोर्ट-कानून में उलझा रहा है। मेरे पास अब वकील करने तक के पैसे नहीं हैं। 11 साल से बेरोजगार हूं, घर और जमीन बेचकर गुज़ारा चल रहा है।”

मामला सरकारी चैनल से जुड़ा, सवाल सरकारी सिस्टम पर भी

यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच का आर्थिक विवाद नहीं रह गया है। पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि —

“जब सरकारी संस्थान जैसे प्रसार भारती या दूरदर्शन में ऐसे लोग महत्वपूर्ण पदों पर हों, जो एक कलाकार की मेहनत का सम्मान न करें, तो बाकी पेशेवरों का क्या होगा?”

सुरेन्द्र ने प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की अपील की है ताकि “जिम्मेदार पदों पर संवेदनशील और ईमानदार लोगों की नियुक्ति” हो सके।

क्या है DECODE शो?

‘DECODE’ सरकारी चैनल पर रात 9 बजे आने वाला एक टेलीविज़न प्रोग्राम है, जिसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी करते हैं। यह शो देश के प्रमुख सामाजिक, राजनीतिक और तकनीकी मुद्दों को आसान भाषा में समझाने का दावा करता है।

लेकिन अब इस कार्यक्रम से जुड़े यह आर्थिक विवाद और क्रिएटिव अधिकारों का मसला, इसकी साख पर सवाल खड़ा कर रहा है।

सोशल मीडिया पर भी उठी आवाज़

सुरेन्द्र सिंह की यह पोस्ट धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कई पत्रकार, कलाकार और इंडस्ट्री से जुड़े लोग “#JusticeForSurendra” और “#DecodeControversy” हैशटैग के साथ इसे शेयर कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि “अगर सरकारी चैनल में यह हाल है, तो फ्रीलांस कलाकारों की सुरक्षा कहां है?”

जनता की मांग: जांच हो, इंसाफ मिले

अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय या प्रसार भारती इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं।
क्या एक क्रिएटिव पेशेवर को उसकी मेहनत की कीमत और न्याय मिलेगा?
या यह मामला भी “फाइलों” और “ईमेल्स” में खो जाएगा?

यह सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं, पूरे क्रिएटिव भारत की आवाज़ है

यह मामला उन हजारों कलाकारों, डिजाइनरों और तकनीकी पेशेवरों का प्रतीक बन गया है, जो रोज़ बड़े नामों के लिए काम करते हैं — पर मेहनताना मांगते ही ‘ब्लॉक’ कर दिए जाते हैं।

अगर सरकार वाकई “वोकल फॉर लोकल” और “डिजिटल इंडिया” की भावना को मजबूत करना चाहती है,
तो इस आवाज़ को सुनना “राष्ट्रीय जिम्मेदारी” होगी।

#JusticeForSurendraSingh #DecodeControversy #MediaEthics #Doordarshan #FreelancerRights

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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