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पदाधिकारी सिर्फ ड्यूटी नहीं करें, जिम्मेदारी निभायें, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुचाएं, पेयजल की समस्या नहीं हो, चापाकल-जलमीनार की युद्धस्तर पर मरम्मती करायें – श्री मिथिलेश ठाकुर, माननीय मंत्री

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जमशेदपुर  |  झारखण्ड 

माननीय मंत्री पेयजल एवं स्वच्छता विभाग-सह- प्रभारी मंत्री, पूर्वी सिंहभूम ने की 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति बैठक की अध्यक्षता, विकास कार्यों की समीक्षा कर दिए जरूरी दिशा-निर्देश। 

समाहरणालय सभागार, जमशेदपुर में माननीय मंत्री पेयजल एवं स्वच्छता विभाग-सह- जिले के प्रभारी मंत्री श्री मिथिलेश ठाकुर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक की गई। बैठक में माननीय विधायक जुगसलाई श्री मंगल कालिंदी, माननीय विधायक बहरागोड़ा श्री समीर महंती एवं अन्य सभी विधायकगण के प्रतिनिधि, जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती बारी मुर्मू, 20 सूत्री उपाध्यक्ष श्री मोहन कर्मकार, 20 सूत्री के सदस्य, उपायुक्त श्रीमती विजया जाधव समेत जिले के तमाम विभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे । उपायुक्त द्वारा पिछली बैठक में माननीय प्रभारी मंत्री द्वारा दिए गए निदेश के आलोक में कृत कार्रवाई से सदन को अवगत कराया गया । सभी विभागों द्वारा बैठक में प्रस्तुत अद्यतन प्रतिवेदन के आधार पर माननीय मंत्री द्वारा जिले में क्रियान्वित सरकार के कल्याणकारी योजनाओं में प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई । मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आपूर्ति, खनन, विद्युत, सामाजिक सुरक्षा, समाज कल्याण, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता समेत अन्य विभागों के पदाधिकारियों से संचालित योजनाओं की जानकारी लिया गया। 

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पेयजल विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए माननीय मंत्री ने कहा कि गर्मी में लोगों को पेयजल समस्या नहीं हो इसके लिए युद्धस्तर पर खराब पड़े जलमीनार एवं चापाकल की मरम्मती करायें। जिले में पेयजल स्रोत की मरम्मती के लिए एक्टिव गैंग की उन्होने जानकारी ली, शहरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को लेकर बताया गया कि जहां समस्या है वहां टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में अस्पतालों की भौतिक स्थिति व उपलब्ध मानवबल की समीक्षा की गई। चिकित्सकों की कमी पर उन्होने कहा कि जिले के सभी पीएचसी व सीएचसी में रोस्टर बनाकर डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति करें। माननीय मंत्री को बताया कि पिछले 1 साल से ज्यादा समय से राशन का उठाव नहीं करने वाले करीब 6000 लोगों का कार्ड रद्द किया गया है। माननीय मंत्री ने निदेशित किया कि जांच का दायरा बढ़ायें, राशन नहीं उठाने वालों के साथ साथ लाभुक के मकान की स्थिति, वाहन आदि हो तो इसकी भी जांच कर कार्ड रद्द करें। उन्होने स्पष्ट कहा कि गरीबों के हक पर सक्षम व्यक्ति हकमारी नहीं करें। जिले में आवास निर्माण की गति पर उन्होने संतुष्टि जताई। 

आधार सीडिंग या अन्य समस्याओं के कारण जिन लाभुकों को पेंशन राशि नहीं मिल पा रही है उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन का निदेश दिया। मनरेगा मजदूरों का मजदूरी भुगतान ससमय हो इसे सुनिश्चित करने, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना एवं पेट्रोल सब्सिडी जैसी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार का निदेश दिया गया।    

बैठक में यूसीआईएल द्वारा जादूगोड़ा क्षेत्र में खराब पेयजल आपूर्ति का भी मामला 20 सूत्री सदस्यों ने उठाया जिसपर पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता को पानी की गुणवत्ता जांचने का निदेश दिया गया । जोजोबेड़ा स्थित सीमेंट प्लांट से दूषित हो रहे पेयजल का मामला भी आया जिसपर जांच का निदेश दिया गया । विद्युत विभाग की समीक्षा में ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर 72 घंटे में बदलने का निर्देश दिया गया। माननीय मंत्री ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे 100 यूनिट फ्री बिजली योजना एवं बिजली बिल माफी योजना को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता लाने के निदेश दिए। खनन विभाग की समीक्षा के दौरान उपायुक्त एवं जिला खनन पदाधिकारी द्वारा सदन को अवगत कराया गया कि जिला अंतर्गत बालू घाटों से बालू उठाव हेतु निविदा कार्य प्रक्रियाधीन है। शिक्षा विभागीय पदाधिकारी से विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं व भौतिक स्थिति की जानकारी ली। 14वां व 15वां वित्त की योजनाओं जो फंक्शनल नहीं है उसे चालू कराने का निदेश दिया। वन पट्टा वितरण में कम भूखंड देने का मामला बीस सूत्री सदस्यों ने संज्ञान में लाया, माननीय मंत्री द्वारा इसका खास ध्यान रखने का निर्देश दिया गया कि लाभुकों को उचित भूखंड मिले जिससे उनके आवासन में दिक्कत नहीं आये। 

माननीय मंत्री ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुचे, यही हमारा लक्ष्य है। गांव गरीब, किसान के हित में कई कल्याणकारी योजनायें संचालित की जा रही हैं, आवश्यकता है कि लोगों तक सरकार की बात पहुंचे ताकि सभी सुयोग्य लाभुक योजनाओं से आच्छादित हो सकें। 

बैठक में डीएफओ, अपर उपायुक्त, निदेशक डीआरडीए, निदेशक एनईपी, एसओ जेएनएसी, डीएसओ, डीटीओ, एसओआर, डीसीएलआर, जिला योजना पदाधिकारी, ईओ मानगो नगर निगम, जिला कल्याण पदाधिकारी, डीपीआरओ (पंचायती राज), डीपीआरओ (जनसंपर्क), सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा, जिला मत्स्य पदाधिकारी समेत अन्य सभी विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे।  

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वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कथित सेक्युलर चेहरों से उतर गया नकाब : सुधीर कुमार पप्पू

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सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया है, जिसके बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथाकथित सेक्युलर चेहरों की असलियत अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को धोखा देने वाले नेताओं को अब आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में असंतोष बढ़ा है और मुस्लिम नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी इसका नुकसान होगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा भाजपा को समर्थन देना भी उनके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय अब उन्हें समर्थन नहीं देगा।

पप्पू ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जिसके जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है ताकि उन्हें पूंजीपतियों को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक गैर संवैधानिक है और इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है जो आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पक्ष और विपक्ष में तर्क:

इस विधेयक को लेकर सरकार का तर्क है कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का माध्यम है। विवादित संपत्तियों के निर्धारण, वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए इसमें कई प्रावधान जोड़े गए हैं। साथ ही, गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करने से समुदायों के बीच समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं दूसरी ओर, इसके विरोध में यह कहा जा रहा है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14, 15 और 300A का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से धारा 3E (Section 3E) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यह प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के उन सदस्यों को वक्फ के रूप में संपत्ति समर्पित करने के अधिकार से वंचित करता है जो इस्लाम धर्म अपना चुके हैं। अनुसूचित जातियों के विपरीत, अनुसूचित जनजातियों के सदस्य धर्म परिवर्तन के बाद भी अपनी जनजातीय पहचान नहीं खोते। ऐसे में इस्लाम अपनाने वाले जनजातीय व्यक्ति मुसलमान भी माने जाते हैं, परन्तु इस संशोधन द्वारा उन्हें अपने धर्म के एक आवश्यक अंग का पालन करने से रोका जा रहा है, जो कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 15 का भी उल्लंघन करता है क्योंकि यह धर्म के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के बीच और जनजातीय मुसलमानों के बीच भेदभाव करता है। इसके अतिरिक्त यह अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार को भी अप्रभावी बनाता है। इस प्रकार, यह संशोधन मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए।

निष्कर्षतः, वक्फ संशोधन विधेयक एक संवेदनशील और बहुआयामी विषय है जो धार्मिक अधिकार, अल्पसंख्यक संरक्षण और प्रशासनिक सुधार – तीनों के बीच संतुलन की मांग करता है। इसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि संविधान और न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

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रोटरी क्लब वेस्ट ने आयोजित किया प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र, डॉ. विक्रांत तिवारी ने साझा किए अनुभव

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जमशेदपुर : रोटरी क्लब वेस्ट जमशेदपुर द्वारा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में एक प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रख्यात पर्यावरणविद् और सामाजिक उद्यमी डॉ. विक्रांत तिवारी, जिन्होंने अपने दो दशक से अधिक के कार्य अनुभव के आधार पर युवाओं और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।

डॉ. तिवारी का प्रेरणास्पद संदेश

आईआईएम कलकत्ता और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने अब तक 17 मिलियन से अधिक पेड़ों का रोपण करवाया है और कई एनजीओ को संसाधन जुटाने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम न केवल हरित भारत की कल्पना को साकार कर रही है, बल्कि आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में भी कार्य कर रही है।

डॉ. तिवारी ने छात्रों को बताया कि “पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि यह अब हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर छोटे लेकिन असरदार कदम उठाने होंगे।”

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विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम की सफलता में स्कूल प्रबंधन समिति, विशेष रूप से प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह, उप प्राचार्या और समन्वयक शिक्षकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने छात्रों को न केवल आयोजन से जोड़ा, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को व्यवहार में उतारने का संदेश भी दिया।

रोटरी क्लब की प्रतिबद्धता

रोटरी क्लब वेस्ट की यह पहल संगठन की स्थिरता, हरित भविष्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाती है। क्लब ने इस सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि वे न केवल समाज सेवा में, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

छात्रों में दिखा उत्साह

सत्र के दौरान छात्रों ने पर्यावरण से जुड़ी जिज्ञासाओं को खुलकर साझा किया और डॉ. तिवारी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में “प्रकृति से संवाद” विषय पर एक लघु प्रस्तुति ने सभी को भावुक और जागरूक कर दिया।

यह आयोजन न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी बना, जो भावी पीढ़ी को हरित और टिकाऊ भारत के निर्माण की दिशा में सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

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निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला के कई निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री जारी रखने का मामला सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जमशेदपुर अभिभावक संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7(अ)(3) के अनुसार स्कूल परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत स्कूल किसी भी प्रकार के व्यापारिक गतिविधि, जैसे किताबें, यूनिफॉर्म या जूते आदि की बिक्री के लिए अभिभावकों या छात्रों को बाध्य नहीं कर सकता।

जारी हैं व्यवसायिक गतिविधियाँ, आदेश की हो रही अनदेखी

अभिभावक संघ ने दावा किया है कि despite विभागीय आदेशों के बावजूद, जमशेदपुर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूल – जैसे सेंट मैरी स्कूल बिस्टुपुर, चिन्मया स्कूल बिस्टुपुर और जुस्को स्कूल बिस्टुपुर, अपने परिसरों में किताबों की बिक्री कर रहे हैं। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी डालता है।

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पिछले आदेशों की भी हो रही अनदेखी

ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि:

  • स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षण कार्यों के लिए किया जाए।
  • स्कूल किसी भी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य न करें।
  • किसी भी परिस्थिति में परिसर में किताब या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री न हो।

अभिभावक संघ का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद कई स्कूल खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित है।

कार्रवाई की मांग

डॉ. उमेश कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी स्कूलों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप न्यायसंगत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था शिक्षा के नाम पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा न दे सके।

संघ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है और चेताया है कि यदि इस पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावकों द्वारा जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।

वीडियो देखें : 

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