सपने में देवी के आदेश के बाद पिता-पुत्र ने बनाया मां मंषा का भव्य मंदिर
गिरिडीह/बगोदर । झारखंड के बगोदर क्षेत्र के पहाड़ी मोहरी टोला से आस्था, विश्वास और मेहनत की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां एक पिता और उनके पुत्र ने मिलकर मां मंषा देवी का भव्य मंदिर बनाकर पूरे इलाके में श्रद्धा और समर्पण की अनोखी मिसाल पेश की है।
बताया जाता है कि गांव के एक व्यक्ति को कुछ समय पहले सपने में मां मंषा का दर्शन हुआ। सपने में देवी ने उन्हें मंदिर बनाने का संकेत दिया। इस अनुभव को उन्होंने अपनी आस्था का आह्वान मानते हुए अपने बेटे के साथ मंदिर निर्माण का संकल्प ले लिया।
अपनी मेहनत और पैसे से शुरू किया मंदिर निर्माण
मंदिर निर्माण की शुरुआत किसी बड़ी संस्था या सरकारी सहायता के बिना ही की गई। पिता-पुत्र ने मिलकर करीब 7 लाख रुपये अपनी जेब से खर्च किए और खुद ही मंदिर के निर्माण का काम शुरू कर दिया।
दोनों ने ईंट, पत्थर, सीमेंट और डिजाइन तक का काम अपनी निगरानी में कराया। कई जगहों पर उन्होंने खुद श्रमदान भी किया। उनकी लगन और मेहनत देखकर गांव के लोग भी प्रभावित हुए और बाद में ग्रामीणों ने भी सहयोग देना शुरू कर दिया।

आस्था का नया केंद्र बना मंदिर
आज यह मंदिर पूरे इलाके में श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। मंदिर की सुंदर बनावट और कारीगरी लोगों को आकर्षित कर रही है। आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज़ से भी श्रद्धालु यहां मां मंषा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
मंदिर परिसर में समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है, जिससे गांव में धार्मिक और सामाजिक माहौल मजबूत हुआ है।
पिता-पुत्र की मेहनत बनी मिसाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि पिता-पुत्र की आस्था, मेहनत और समर्पण की जीवंत मिसाल है।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार,
“आज के समय में लोग छोटी-छोटी मुश्किलों से घबरा जाते हैं, लेकिन इस पिता-पुत्र ने अपने विश्वास और परिश्रम से यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं।”
सामाजिक एकता का प्रतीक बना मंदिर
अब यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक एकता और आस्था का प्रतीक बन चुका है। यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में सभी समुदायों के लोग भाग लेते हैं, जिससे गांव में आपसी भाईचारा और मजबूत हुआ है।
बगोदर के पहाड़ी मोहरी टोला में बना मां मंषा का यह मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बल्कि विश्वास, श्रम और समर्पण की वह कहानी है जो यह बताती है कि सच्ची आस्था से असंभव भी संभव हो जाता है।














