जमशेदपुर: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को कुटीर उद्योग से जुड़ने और छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के पहले चरण में महिलाओं को थ्योरी क्लास के माध्यम से स्वरोजगार के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को यह समझाया गया कि किस प्रकार कम लागत में घर बैठे छोटे-छोटे उद्योग शुरू किए जा सकते हैं और धीरे-धीरे उन्हें आय का स्थायी स्रोत बनाया जा सकता है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर प्रशिक्षकों ने महिलाओं को कुटीर उद्योग की संभावनाओं, बाजार की मांग और उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि अगरबत्ती और फिनाइल जैसे उत्पाद ऐसे हैं जिनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है और इन्हें कम लागत में तैयार कर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
आयोजकों ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण का अगला चरण सोमवार, 9 मार्च 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस दिन प्रतिभागियों को अगरबत्ती और फिनाइल बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें इन उत्पादों के निर्माण और विपणन की प्रक्रिया से जोड़ते हुए उनकी कमाई शुरू कराने की योजना है। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा उन्हें रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर प्रदान करते हैं। कई महिलाओं ने बताया कि वे लंबे समय से घर से कोई छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के अभाव में ऐसा नहीं कर पा रही थीं। अब इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही अपनी आय का स्रोत शुरू कर पाएंगी।
कार्यक्रम के आयोजकों ने समाज के सभी महिला और पुरुष युवाओं से अपील की कि वे इस संगठन से जुड़कर स्वरोजगार के इस अभियान का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटे स्तर के उद्योग और कुटीर उद्योग रोजगार के महत्वपूर्ण साधन बनते जा रहे हैं। अगर सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले तो लोग अपने घर से ही सफल व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
इस अवसर पर देश के शिक्षकों से भी विशेष अपील की गई कि यदि वे अपने खाली समय में कोई अतिरिक्त आय का स्रोत बनाना चाहते हैं तो वे अपने घरों में कुटीर उद्योग स्थापित कर सकते हैं। आयोजकों ने कहा कि शिक्षक समाज के मार्गदर्शक होते हैं और यदि वे इस प्रकार के कार्यों से जुड़ते हैं तो समाज के अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इनमें प्रमुख रूप से किरण करवा, संध्या मुखी, ममता करवा, लखी मुखी, मंजू मुखी, नेहा गोराई और सरस्वती मुखी शामिल रहीं। इन सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी प्राप्त की और आगामी प्रशिक्षण में भी उत्साह के साथ भाग लेने की इच्छा जताई।
आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। उनका मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।
इस पहल को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है। छोटे उद्योग और कुटीर उद्योग ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बन सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम न केवल लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ाते हैं कुल मिलाकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हो रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इससे जुड़ने वाले लोगों की संख्या और बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग अपने पैरों पर खड़े होकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगे।








