गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर के लोनी इलाके में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई। Ex-Muslim सलीम वास्तिक, (एक यूट्यूबर हैं) जो खुद को पूर्व मुस्लिम बताते हैं, पर दो बाइक सवार संदिग्धों ने निर्मम हमला बोल दिया। हमलावरों ने सलीम के छोटे से दफ्तर में घुसकर उनकी गर्दन पर चाकू से वार किया और पेट में कई छुरे घोंप दिए। खून से लाल हो गए फर्श पर सलीम जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे हैं। पड़ोसियों ने चीखें सुनकर उन्हें निजी अस्पताल ले गए, लेकिन गंभीर चोटों के चलते दिल्ली के बड़े हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि हालत खतरे से बाहर नहीं।
यह हादसा उस समय हुआ जब रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। यह दरिंदगी और सोच को दर्शाती है। यह हादसा सुबह 8 बजे के करीब अशोक विहार कॉलोनी में तब पेश आया जब सलीम अपने वीडियो एडिटिंग के कमरे में अकेले थे। बाहर से आई दो बाइकें रुकीं। सिर ढके हेलमेट वाले दोनों युवक तेजी से अंदर दाखिल हुए। बिना एक शब्द कहे उन्होंने धारदार हथियार निकाले। सलीम को बाहर निकलने का मौका तक न मिला। चाकू गर्दन को रेतते हुए चला, फिर पेट पर मारा ताबड़तोड़ प्रहार। सलीम की चीखें सुन आसपास के लोग दौड़े। किसी ने ऑटो बुलाया और अस्पताल पहुंचाया। दफ्तर में खून के धब्बे और बिखरे सामान साफ बयां कर रहे थे कि हमला कितना सुनियोजित था।
सलीम वास्तिक 50 साल के निवासी अली नगर हैं। उनका यूट्यूब चैनल लाखों लोगों तक पहुंचा है जहां वे धार्मिक रिवाजों पर सवाल उठाते रहे। हलाला जैसी प्रथाओं की मुखालफत से वे चर्चा में आए। कई बार उन्हें फोन पर धमकी भरी कॉल्स मिलीं। परिवार बताता है कि सलीम खुले मन से अपनी राय रखते थे, जिससे कुछ लोग नाराज रहते। बेटे ने पुलिस को शिकायत में कुछ लोकल नामों का जिक्र किया, जिनमें राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हैं। उनका मानना है कि ये पुरानी दुश्मनी का नतीजा है। सलीम अकेले ही कंटेंट बनाते, घर चलाते। अब पूरा परिवार सदमे में है।
पुलिस ने फौरन हरकत में आते हुए केस दर्ज किया। लोनी थाने की टीम मौके पर पहुंची। आसपास के सीसीटीवी कैमरे ढूंढे जा रहे। ड्रोन से इलाके की तलाशी ली जा रही। एसएसपी ने कहा कि हमलावरों को चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सख्ती का ऐलान किया। इलाके में भारी फोर्स तैनात। विधायक ने बताया कि आरोपी कट्टर विचारों से प्रेरित लगते हैं। एनकाउंटर की तैयारी भी चल रही।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क गया। सलीम के समर्थक प्रार्थना कर रहे। कुछ नेता अस्पताल पहुंचे, हाल पूछा। यह घटना बोलने की आजादी पर सवाल खड़ी कर रही। क्या खुली राय रखना महंगा पड़ गया? सलीम के चाहने वाले दुआ कर रहे कि वे जल्द स्वस्थ हों। डॉक्टरों की टीम रात-दिन ड्यूटी पर। पुलिस का दावा है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी। गाजियाबाद में सनसनी फैल गई। स्थानीय दुकानें जल्दी बंद। लोग डर के साये में। यह केस अब पूरे देश का हो गया। सलीम जंग जीतें, यही कामना।
क्या यह घटना बताती है की इस्लाम में क्षमा नहीं बल्कि हत्या ही एक रास्ता है? खैर उपद्रवीयों की यह गलती लाखों इस्लाम के मानने वालों को शर्मिंदा करता है। यह हमला किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा करने वाली मानसिकता के खिलाफ सवाल खड़ा करता है।












