चित्रकूट: साल 2020 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से एक ऐसी खबर आई जिसने सबको सन्न कर दिया। सिंचाई विभाग में तैनात एक सरकारी इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को छोटे बच्चों के साथ दरिंदगी करने और उनके अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने के जुर्म में अब फांसी की सजा सुनाई गई है।
क्या था पूरा मामला?
बांदा का रहने वाला रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था। वह और उसकी पत्नी मिलकर गरीब बच्चों को लालच देकर अपने घर बुलाते थे। वहां ये दोनों 5 से 16 साल तक के मासूम बच्चों का यौन शोषण करते थे।
सबसे घिनौनी बात यह थी कि रामभवन इन हरकतों के वीडियो और फोटो बना लेता था। वह इन वीडियो को ‘डार्क वेब’ (इंटरनेट का काला हिस्सा) के जरिए अमेरिका, चीन और ब्राजील जैसे 47 देशों में बेचता था।
यह घटना किसी डरावनी फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है।
गुनाह का अंत: एक ‘पढ़े-लिखे’ हैवान की कहानी
एक तरफ दुनिया बच्चों को भगवान का रूप मानती है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक ऐसा शख्स था जो अपनी सरकारी नौकरी की आड़ में मासूमों की जिंदगी बर्बाद कर रहा था। उसका नाम था रामभवन। वह अनपढ़ नहीं था, बल्कि सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) था। लेकिन उसकी सोच किसी अपराधी से भी बदतर थी।
लालच का जाल
रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती ने मिलकर एक खौफनाक साजिश रची थी। वे गरीब और भोले-भाले बच्चों को अपना शिकार बनाते थे। वे बच्चों को खिलौनों, चॉकलेट या पैसों का लालच देकर अपने घर बुलाते थे।
एक बार जब बच्चा उनके घर पहुँच जाता, तो पति-पत्नी मिलकर मासूमों के साथ गंदा काम (यौन शोषण) करते थे। रामभवन के पास महंगे लैपटॉप और कैमरे थे। वह इन हरकतों का वीडियो बनाता और फोटो खींचता था।
इंटरनेट का काला बाज़ार
रामभवन इन वीडियो को सिर्फ अपने पास नहीं रखता था। वह इंटरनेट की काली दुनिया, जिसे ‘डार्क वेब’ कहते हैं, वहां इन वीडियो को बेचता था। जांच में पता चला कि उसने भारत के मासूम बच्चों के वीडियो चीन, अमेरिका और ब्राजील समेत 47 देशों के अपराधियों को बेचे थे। उसे लगता था कि वह कभी पकड़ा नहीं जाएगा क्योंकि वह एक रसूखदार सरकारी अफसर था।
पाप का घड़ा भरा
कहते हैं गुनाह चाहे कितना भी छिपकर किया जाए, एक दिन सामने आ ही जाता है। इंटरपोल (इंटरनेशनल पुलिस) ने भारत की CBI को खबर दी कि चित्रकूट के कुछ मोबाइल नंबरों से बच्चों के गंदे वीडियो विदेशों में भेजे जा रहे हैं।
CBI ने जब रामभवन के घर छापा मारा, तो अधिकारी भी दंग रह गए। वहां से पेन ड्राइव, लैपटॉप और मोबाइल मिले, जिनमें 34 बच्चों के साथ हुई दरिंदगी के सबूत थे। उन मासूमों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के AIIMS अस्पताल भेजना पड़ा।
करीब 5 साल तक बांदा की कोर्ट में यह मामला चला। CBI ने 700 पन्नों की रिपोर्ट पेश की और 74 गवाहों ने अपनी बात रखी। आखिरकार, जज ने इस अपराध को समाज पर एक ‘कलंक’ माना।
सीख: यह घटना हमें सिखाती है कि अपराधियों का कोई चेहरा नहीं होता। कभी-कभी बहुत पढ़े-लिखे लोग भी अपराधी हो सकते हैं। हमें अपने आसपास के बच्चों के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
कैसे पकड़े गए?
- इंटरपोल की सूचना: अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ‘इंटरपोल’ ने सीबीआई (CBI) को अलर्ट भेजा कि भारत के कुछ नंबरों से बच्चों के अश्लील वीडियो इंटरनेट पर डाले जा रहे हैं।
- CBI की छापेमारी: जब जांच हुई, तो तार रामभवन से जुड़े। 18 नवंबर 2020 को सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया।
- बरामदगी: छापेमारी में 8 लाख रुपये कैश, लैपटॉप, मोबाइल, पेन ड्राइव और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले। पेन ड्राइव में 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो मिले।
अदालत का फैसला
बांदा की पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने इस केस को ‘क्रूरतम’ माना। जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने अपने फैसले में ये अहम बातें कहीं:
- फांसी की सजा: पति रामभवन और पत्नी दुर्गावती, दोनों को मरते दम तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया गया।
- भारी भरकम चार्जशीट: सीबीआई ने 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी और 74 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
- पीड़ितों को मदद: कोर्ट ने डीएम को आदेश दिया कि पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
- इलाज: पीड़ित बच्चों की हालत इतनी खराब थी कि उनका इलाज दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में कराना पड़ा था।
निष्कर्ष: यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि अपराधी कोई भी हो सकता है—चाहे वो पढ़ा-लिखा सरकारी अफसर ही क्यों न हो। कानून ने करीब 5 साल बाद इन मासूमों को इंसाफ दिलाते हुए दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है।
क्या आप इस मामले के कानूनी पहलुओं या ‘डार्क वेब’ के बारे में और कुछ विस्तार से जानना चाहेंगे?













