जमशेदपुर | 15 फरवरी 2026
देहरादून में 12 फरवरी 2026 को दिनदहाड़े हुई विक्रम शर्मा की हत्या सिर्फ एक मर्डर नहीं थी, बल्कि यह झारखंड के अपराध जगत, गैंगवार, राजनीति और पारिवारिक विश्वासघात की एक लंबी और डरावनी कहानी का अंत साबित हुई। यह कहानी उस शख्स की है, जिसने अपराध की दुनिया में गुरु की भूमिका निभाई, फिर सफेदपोश बनने की कोशिश की, और आखिरकार अपने ही खून के हाथों मारा गया।
दिनदहाड़े हत्या से हिली पुलिस
12 फरवरी की सुबह देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल के पास माहौल अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठा। जिम से बाहर निकलते ही विक्रम शर्मा पर बाइक सवार तीन शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना इतनी तेजी से हुई कि लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले हमलावर फरार हो चुके थे।
इस हत्या की खबर कुछ ही घंटों में जमशेदपुर पहुंच गई और पूरे शहर में सनसनी फैल गई। वजह साफ थी—विक्रम कोई आम आदमी नहीं, बल्कि झारखंड का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर था।
कौन था विक्रम शर्मा?
विक्रम शर्मा जमशेदपुर के सोनारी इलाके का रहने वाला था। उस पर झारखंड समेत कई राज्यों में 50 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें हत्या, गोलीबारी, रंगदारी और जमीन विवाद जैसे संगीन आरोप शामिल थे।
- 2007 में साकची में आशीष डे की हत्या
- 2008 में टाटा स्टील अधिकारी जयराम सिंह की हत्या
- काशीडीह में रवि चौरसिया पर फायरिंग
- परमजीत सिंह की हत्या
- सोनारी के ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या
ये सभी बड़े मामले विक्रम के नाम से जुड़े रहे। इसके अलावा उसने कई ठेकेदारों और नेताओं के दफ्तरों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने का काम किया।
अखिलेश सिंह से गुरु-शिष्य का रिश्ता
झारखंड के अपराध जगत में विक्रम शर्मा को अखिलेश सिंह का गुरु माना जाता था। अखिलेश, जो फिलहाल दुमका जेल में बंद है, कभी विक्रम का शिष्य था।
विक्रम ने अखिलेश को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी और अपराध की दुनिया में एंट्री करवाई। दोनों ने मिलकर जमशेदपुर में कई हत्याओं और फायरिंग की साजिशें रचीं। फर्क बस इतना था कि विक्रम हमेशा पर्दे के पीछे रहता और अखिलेश को आगे कर देता।
एक समय ऐसा भी आया जब साकची जेल में दोनों ने सत्संग शुरू कर दिया। सफेद कपड़े, धार्मिक बातें और सोशल इमेज—यह सब विक्रम की “सफेदपोश” बनने की कोशिश का हिस्सा था।
देहरादून में कारोबार, जमशेदपुर में दबदबा
विक्रम शर्मा बाद में देहरादून शिफ्ट हो गया, जहां उसने स्टोन क्रशर का बिजनेस शुरू किया। बाहर से वह एक सफल कारोबारी दिखता था, लेकिन अंदरखाने वसूली और आपराधिक नेटवर्क जारी था।
कई मामलों में उसे जमानत मिली, कुछ में बरी भी हुआ, जिससे उसका हौसला और बढ़ गया। 2021 में रांची जेल से बाहर आने के बाद वह सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हो गया और खुद को बदला हुआ आदमी दिखाने लगा।
हत्या में सबसे बड़ा ट्विस्ट: भाई ही निकला मास्टरमाइंड
इस हत्याकांड में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि मुख्य आरोपी कोई दुश्मन गैंग नहीं, बल्कि विक्रम का सगा भाई अरविंद शर्मा है। हत्या के करीब चार घंटे बाद अरविंद शर्मा ने देहरादून पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने सबको हिला दिया।
जमीन, पैसा, खून का रिश्ता और ₹1 करोड़ की सुपारी
पुलिस जांच के अनुसार, विवाद की जड़ थी जमीन और स्टोन क्रशर का कारोबार। सालों पहले ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या हुई थी। बाद में उसकी विधवा पिंकी से अरविंद शर्मा की शादी हुई। अशोक शर्मा की संपत्ति पर विक्रम का कब्जा हो गया।
अरविंद का आरोप था कि विक्रम ने उसे हक से वंचित कर दिया। यही विवाद धीरे-धीरे नफरत में बदला और आखिरकार हत्या की साजिश में तब्दील हो गया। बताया जा रहा है कि ₹1 करोड़ की सुपारी देकर विक्रम की हत्या कराई गई। इस तरह संपत्ति का लालच खून के रिश्ते पर भारी पड़ गया।
शूटर कौन थे और कहां हैं?
पुलिस के मुताबिक, हत्या की योजना जुलाई 2025 में जमशेदपुर के मानगो इलाके में बनाई गई थी। इसमें आकाश प्रसाद, आशुतोष कुमार, विशाल और प्रभात शामिल थे।
- अरविंद शर्मा: सरेंडर
- आकाश प्रसाद: फरार
- आशुतोष कुमार: फरार
- विशाल: फरार
- प्रभात: फरार
कुछ रिपोर्ट्स में गिरफ्तारी की बात आई, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। देहरादून और जमशेदपुर पुलिस की संयुक्त टीम अजमेर समेत कई जगहों पर छापेमारी कर रही है।
गैंगवार या परिवार? पुलिस की दोहरी जांच
पुलिस इस केस को दो एंगल से देख रही है—
- गैंगवार और पुरानी दुश्मनी
- पारिवारिक विवाद और कारोबारी लालच
विक्रम के पुराने दुश्मन, अखिलेश सिंह गैंग और अन्य शार्प शूटरों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
राजनीति में एंट्री की कोशिश
विक्रम शर्मा ने अपराध से राजनीति की ओर कदम बढ़ाने की कोशिश भी की थी। वह एक राजनीतिक दल से जुड़ा, सत्संग करता दिखा और पुलिस व नेताओं से रिश्ते मजबूत किए।
सोनारी, सिदगोड़ा और आशियाना इलाकों में उसका खासा प्रभाव था। पुलिस सूत्रों का मानना है कि वह राजनीति की आड़ में अपने अपराधों को ढंकना चाहता था।
एक साम्राज्य का अंत
विक्रम शर्मा की हत्या के साथ ही झारखंड के अपराध जगत का एक बड़ा अध्याय खत्म हो गया। यह कहानी बताती है कि अपराध का रास्ता चाहे जितना ताकतवर लगे, उसका अंत अक्सर हिंसा, विश्वासघात और तबाही ही होता है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है, जमशेदपुर और देहरादून में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में इस हत्याकांड से जुड़े और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि अपराध की दुनिया में भरोसे और खून के रिश्तों के टूटने की कहानी है।












