मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना के तहत जिले के किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के विभिन्न प्रखंडों से चयनित 40 प्रगतिशील किसानों को पांच दिवसीय उन्नत उद्यानिकी तकनीकों के विशेष प्रशिक्षण के लिए भारतीय बागवानी तकनीकि संस्थान भेजा गया है।
समाहरणालय से प्रशिक्षण दल को हरी झंडी
प्रशिक्षण दल को उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी एवं डीडीसी श्री नागेन्द्र पासवान ने समाहरणालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला उद्यान पदाधिकारी सुश्री अनिमा लकड़ा तथा तकनीकी विशेषज्ञ श्री अनिल चौरसिया भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के ज्ञान और आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उन्हें आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराते हैं।
क्या सिखाया जाएगा पांच दिवसीय प्रशिक्षण में?
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह व्यावहारिक और तकनीकी ज्ञान पर आधारित है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को निम्नलिखित विषयों पर जानकारी दी जाएगी—
- 🌿 आधुनिक उद्यानिकी पद्धतियाँ
- 🌱 उन्नत उत्पादन तकनीकें
- 🌳 गुणवत्तायुक्त पौध एवं नर्सरी प्रबंधन
- 🏠 संरक्षित खेती (पॉलीहाउस, शेडनेट आदि)
- 📦 पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन
- 💰 फलों एवं सब्जियों में मूल्य संवर्धन की तकनीकें
इन विषयों के माध्यम से किसानों को यह समझाया जाएगा कि किस प्रकार वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक और गुणवत्तायुक्त उत्पादन किया जा सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
जिला उद्यान पदाधिकारी सुश्री अनिमा लकड़ा ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों को नवीनतम तकनीकी जानकारी मिलती है। इससे वे अपने खेतों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित किसान अपने क्षेत्र में अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और नई तकनीकों को साझा कर कृषि विकास को गति देंगे।
आगे भी जारी रहेंगे प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट
जिला प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में भी किसानों के लिए ऐसे प्रशिक्षण, कार्यशाला और एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि जिले में उद्यानिकी विकास को नई दिशा मिल सके।
MIDH योजना के तहत आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले के किसानों को आधुनिक उद्यानिकी से जोड़ने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। पांच दिन के इस प्रशिक्षण के बाद किसान न केवल नई तकनीकों से लैस होंगे, बल्कि अपने गांव और प्रखंड में उन्नत खेती को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।












