Sex Business was being run through WhatsApp : छत्तीसगढ़ के कवर्धा शहर और पूरे कबीरधाम जिला में उस समय हलचल मच गई, जब पुलिस ने व्हाट्सएप के जरिए संचालित हो रहे एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया। यह कार्रवाई किसी फिल्मी कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत में यह एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा निकला, जो रिहायशी इलाकों से संचालित हो रहा था।
घटना 30 जनवरी 2026 की देर रात की है। पुलिस को सूचना मिली कि घुघरी रोड स्थित अटल आवास क्षेत्र के एक मकान में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम में महिला आरक्षक भी शामिल थीं, ताकि कार्रवाई पूरी कानूनी और संवेदनशील तरीके से हो सके।
जब पुलिस ने घर पर दबिश दी, तो अंदर का दृश्य चौंकाने वाला था। वहां से एक दलाल गोलू लहरे (35 वर्ष), निवासी वार्ड 17 मिनीमाता चौक, और तीन युवतियां आपत्तिजनक हालत में मिलीं। मौके से मोबाइल फोन और अन्य सामग्री जब्त की गई। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी व्हाट्सएप पर युवतियों की तस्वीरें भेजकर ग्राहकों से सौदा तय करता था। यानी पूरा नेटवर्क डिजिटल माध्यम से संचालित हो रहा था।
मोबाइल की जांच में कई संदिग्ध चैट, नंबर और संपर्क मिले हैं। इससे पुलिस को अंदेशा है कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित नेटवर्क हो सकता है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने यह भी दिखाया कि कबीरधाम जिले में यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्षों में भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। सितंबर 2024 में खुटू नर्सरी और राजनांदगांव बायपास इलाके से कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। दिसंबर 2023 में रायपुर और बिलासपुर से जुड़ा गिरोह पकड़ा गया था। जनवरी 2026 से ठीक पहले तुलसी पारा क्षेत्र में भी घर से चल रहे एक नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इन घटनाओं से साफ है कि यह अवैध गतिविधि धीरे-धीरे छोटे शहरों तक जड़ें जमा रही है।
गोलू लहरे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके मोबाइल से और ठिकानों की जानकारी मिली। इसके आधार पर मिनीमाता चौक और घुघरी रोड के अलावा दो अन्य मकानों पर भी दबिश दी गई। वहां से संदिग्ध युवक और कुछ सामग्री बरामद हुई है। पूछताछ में रायपुर और बिलासपुर से कनेक्शन की बात भी सामने आई है।
जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे जिले में निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब साइबर और जमीनी स्तर की जांच एक साथ कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक कार्रवाई नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि अपराध का तरीका बदल चुका है। अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ऐसे गिरोह काम कर रहे हैं, जिससे पकड़ पाना चुनौती बन जाता है। लेकिन इस कार्रवाई से यह भी साफ है कि पुलिस तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों से ऐसे नेटवर्क पर नकेल कसने की कोशिश में लगी है।
जांच जारी है, और पुलिस का मानना है कि आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।












