- पत्र लेखन केवल संवाद नहीं, संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है : आर.के. दास
- विद्यार्थियों ने अपने-अपने रोल मॉडल को लिखा भावनात्मक पत्र
जमशेदपुर | डिजिटल युग में जहां संवाद तेजी से बदल रहा है, वहीं भारतीय डाक विभाग ने पारंपरिक पत्र लेखन की संस्कृति को जीवित रखने की दिशा में सराहनीय पहल की है। इसी कड़ी में आज एलबीएसएम कॉलेज के हिन्दी विभाग में भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा “ढाई आखर : पत्र लेखन प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता का विषय था — “Letter to My Role Model”। इसमें विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने जीवन के आदर्श व्यक्तित्व को संबोधित करते हुए भावनात्मक व प्रेरणादायक पत्र लिखे।
“पत्र भावनाओं, सम्मान और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है” — आर.के. दास
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए असिस्टेंट सुपरिन्टेन्डेन्ट श्री राजकिशोर (आर.के.) दास ने कहा —
“पत्र लेखन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनाओं, सम्मान और आत्मीयता की सच्ची अभिव्यक्ति है। ‘ढाई आखर’ प्रेम, आदर और सच्चे भावों का प्रतीक है, जो आज के डिजिटल युग में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है।”
उन्होंने आगे कहा कि अपने आदर्श को पत्र लिखना आत्मचिंतन की प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अभियान नई पीढ़ी को भाषा, लेखन और भारतीय मूल्यों से जोड़ने में कारगर सिद्ध होगा तथा डाक विभाग की सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।

शिक्षकों ने भी किया विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन
वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय प्रकाश ने कहा कि छात्र-छात्राओं को ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। इससे उनकी व्यक्तित्व क्षमता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल का विकास होता है।
वहीं हिन्दी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधीर कुमार ने पत्र लेखन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा —
“पत्र लेखन संप्रेषण और सृजन का अत्यंत सुंदर रूप है। अपनी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने का यह प्राचीन और विश्वसनीय माध्यम है। अपने रोल मॉडल को पत्र लिखना एक रोमांचक और प्रेरक अनुभव होता है।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा —
“जिस तरह एक दीया दूसरे दीये को रोशन करता है, उसी तरह हमारे रोल मॉडल के प्रकाश में हमारा व्यक्तित्व विकसित होता है। और धीरे-धीरे हम स्वयं भी किसी के लिए रोल मॉडल बन जाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के दौर में भारतीय डाक विभाग द्वारा पत्र लेखन को बढ़ावा देना मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही भूमिका
इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में कई शिक्षकों और डाक विभाग के कर्मियों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया, जिनमें शामिल हैं —
- पोस्टल असिस्टेंट पुष्पेन्द्र
- डाक अधिदर्शक विनय केसरी
- एबीपीएम बापी मंडल
- बीपीएम हर्ष शुक्ला
- बीपीएम मोहन बाबू
- मनोविज्ञान विभाग के डॉ. प्रशांत
- इतिहास विभाग के डॉ. के.के. कमलेंदु
- वाणिज्य विभाग की डॉ. रानी
विशेष बात
यह प्रतियोगिता केवल लेखन अभ्यास नहीं थी, बल्कि विद्यार्थियों को अपने जीवन के आदर्श व्यक्तित्व से भावनात्मक रूप से जुड़ने और आत्ममंथन करने का अवसर भी प्रदान कर गई।
विश्लेषण
आज की तेज़-रफ्तार डिजिटल दुनिया में जहां संवाद संक्षिप्त और यांत्रिक होता जा रहा है, वहां ऐसे आयोजन युवाओं को संवेदनशीलता, आत्मीयता और गहराई से जोड़ते हैं। पत्र लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं का सजीव दस्तावेज होता है।
भारतीय डाक विभाग की यह पहल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से मानवीय मूल्यों और भाषा संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रभावी कोशिश कही जा सकती है।
एलबीएसएम कॉलेज में आयोजित यह प्रतियोगिता केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनाओं को शब्द देने और आदर्शों से जुड़ने की प्रेरक यात्रा साबित हुई। ऐसे आयोजन भविष्य में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर बन सकते हैं।












