जमशेदपुर (मानगो): मानगो क्षेत्र में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। मानगो यातायात सिपाही (ASI) विद्यानंद कुमार ने डिमना रोड नंबर-4 के पास सड़क किनारे बैठी एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला की हालत देखकर उसे पानी और नाश्ता (बिस्किट) देकर सहायता की। इस छोटे से सहयोग ने आसपास मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया और समाज के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ दिया कि जरूरतमंद की मदद के लिए बड़ा कदम नहीं, बस एक संवेदनशील मन चाहिए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह महिला पिछले करीब पांच दिनों से उसी जगह पर सड़क किनारे बैठी रहती है। वह न तो किसी से कुछ बोलती है, न ही किसी से कुछ मांगती है। सिर झुकाए अपने ही हाल में बैठी रहती है, मानो बस चुपचाप जीने की कोशिश कर रही हो। लोगों का कहना है कि महिला के बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है—यह कौन है, कहां से आई है, किस कारण इस हालत में है—इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है।
इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसे में इस बेबस महिला का इस तरह सड़क किनारे बैठना किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की अंतरात्मा को झकझोर देता है। आसपास के लोगों ने बताया कि जब-जब उससे बात करने की कोशिश की गई, उसने कुछ नहीं कहा। देखने पर ऐसा लगता है कि वह बताने में असमर्थ है या फिर मानसिक रूप से इतनी परेशान है कि किसी से संवाद नहीं कर पाती।
सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि महिला के दाहिने पैर में गंभीर घाव है। लोगों के अनुसार, महिला ने उस पैर में प्लास्टिक लपेट रखा है, और बाहर से देखने पर घाव की स्थिति बेहद खराब लगती है। कुछ लोगों का कहना है कि घाव ऐसा प्रतीत होता है जैसे सड़ चुका हो, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। महिला की हालत देखकर यह साफ समझ आता है कि उसे तुरंत इलाज और सुरक्षित देखभाल की जरूरत है।
हैरानी की बात यह भी है कि जिस जगह महिला बैठी है, वहां से मात्र करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल मौजूद है। यह अस्पताल जिले के नागरिकों के इलाज और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। बावजूद इसके, महिला का कई दिनों तक सड़क पर पड़े रहना यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर ऐसे बेसहारा लोगों को अस्पताल और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए समाज और सिस्टम में क्या कमी रह जाती है।
इसी बीच ASI विद्यानंद कुमार ने जो किया, वह समाज के लिए एक सीख है। उन्होंने महिला की स्थिति देखकर उसके लिए पानी और बिस्किट की व्यवस्था की, और मानवीय संवेदना दिखाते हुए सहयोग किया। यह पहल बताती है कि पुलिस या यातायात कर्मी केवल नियम लागू करने वाले नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे समाज के रक्षक भी होते हैं।
ASI विद्यानंद कुमार की इस छोटी सी कोशिश ने यह संदेश दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे समय में जब कई लोग आगे बढ़कर मदद नहीं करते, एक छोटा सा सहयोग भी किसी की जान बचाने की शुरुआत बन सकता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग, सामाजिक संगठन और स्थानीय प्रशासन भी आगे आएं और इस महिला को चिकित्सा, आश्रय और सुरक्षा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह ठंड और बीमारी से बच सके।
यह घटना हम सभी के लिए एक संदेश है—अगर रास्ते में कोई बेसहारा दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें। एक छोटा कदम, किसी की जिंदगी बदल सकता है।










