जमशेदपुर :1971 के भारत–पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देने वाले भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त फाइटर पायलट एवं बिष्टुपुर निवासी भूपेंद्र सिंह मारवा अब हमारे बीच नहीं रहे। आज शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से शहर सहित पूर्व सैनिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
भारतीय वायु सेना में कमीशन प्राप्त करने के बाद भूपेंद्र सिंह मारवा ने फाइटर पायलट की विशेष ट्रेनिंग ली और 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युद्ध के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के अंदर लगभग 130 से अधिक साहसिक उड़ानें भरकर दुश्मनों को भारी नुकसान पहुंचाया। अपने सैन्य करियर में उन्होंने कुल तीन युद्धों में भाग लिया, जो उनकी वीरता और समर्पण का प्रमाण है।
उनके असाधारण साहस और पराक्रम को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. वी.वी. गिरी द्वारा उन्हें वायु सेना गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।भूपेंद्र सिंह मारवा की प्रारंभिक शिक्षा आर.डी. टाटा हायर सेकेंडरी स्कूल, गोलमुरी से हुई थी। भारतीय वायु सेना में उन्होंने एयर कमोडोर रैंक तक सेवा दी और लगभग 22 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने जमशेदपुर को अपना स्थायी निवास बनाया।
जमशेदपुर में रहते हुए वे एक सफल व्यवसायी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे। उनका व्यवहार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहा। वे अपने पीछे एक पुत्र, एक पुत्री एवं भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर फिलहाल टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) के मर्चरी में रखा गया है। कल सुबह 11 बजे उनका पार्थिव शरीर टीएमएच से बिष्टुपुर स्थित सेंट मैरी स्कूल के सामने गीतांजलि अपार्टमेंट लाया जाएगा। पारिवारिक रीति-रिवाजों के पश्चात सैनिक सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर बिष्टुपुर गुरुद्वारा में प्रार्थना एवं दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद बिष्टुपुर पार्वती घाट में पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इस अवसर पर थल सेना, वायु सेना और नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी एवं जवान बड़ी संख्या में शामिल होंगे। राष्ट्र के लिए समर्पित एक सच्चे वीर सपूत को शहर नम आंखों से अंतिम विदाई देगा।








