मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

राष्ट्रपति ने जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा और ओल चिकी शताब्दी समारोह में भाग लिया

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: December 29, 2025 7:17 PM
Follow Us:
PR229122025Y3UG
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा — “ओल चिकी संथाल पहचान का सशक्त प्रतीक” जमशेदपुर में पारसी महा और ओल चिकी शताब्दी समारोह का हुआ समापन

जमशेदपुर, 29 दिसंबर 2025: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज झारखंड के जमशेदपुर में आयोजित 22वें पारसी महा एवं ओल चिकी लिपि के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में शिरकत की और संथाली भाषा-संस्कृति को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समुदाय की भाषा, साहित्य और संस्कृति अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि एक शताब्दी पहले संथाली भाषा की अपनी लिपि न होने के कारण रोमन, देवनागरी, ओडिया और बंगाली लिपियों का उपयोग किया जाता था, जिसमें संथाली शब्दों के सही उच्चारण में कठिनाइयाँ आती थीं।

“वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु द्वारा सृजित ओल चिकी लिपि संथालों की पहचान और अस्मिता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।” — राष्ट्रपति मुर्मु

THE NEWS FRAME

संविधान की प्रति ओल चिकी में — गर्व का क्षण

राष्ट्रपति ने बताया कि 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर उन्हें संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में लिखे संविधान को राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह कदम संथाली समाज को अपनी भाषा में अधिकारों और कर्तव्यों को समझने में सक्षम बनाएगा।

मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा

राष्ट्रपति मुर्मु ने संथाली भाषा और ओल चिकी लिपि में शिक्षा को समुदाय के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अनेक लेखक और भाषा प्रेमी आज संथाली भाषा के संरक्षण और संवर्धन का उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

THE NEWS FRAME

पर्यावरण संरक्षण में जनजातीय परंपराएँ उदाहरण

उन्होंने जनजातीय समुदायों की प्रकृति-संगत जीवनशैली की सराहना करते हुए कहा: “पर्यावरण के अनुकूल विकास की सीख संथाली और अन्य आदिवासी समुदायों से मिलती है।”

संथाली साहित्य को मिले वैश्विक विस्तार

राष्ट्रपति ने कहा कि संथाली साहित्य की जड़ें मौखिक परंपराओं और गीतों में हैं और कई लेखक इसे समृद्ध करने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाषाएँ समुदायों को जोड़ती हैं और अनुवाद इस संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने अखिल भारतीय संथाली लेखक संघ से साहित्यिक आदान-प्रदान को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की अपील की।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2025/dec/doc20251229747101.pdf

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment