- सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा फिर बने डिप्टी सीएम; पीएम मोदी की मौजूदगी में गांधी मैदान बना गवाह
पटना | बिहार की राजनीति में गुरुवार को एक नया इतिहास लिखा गया। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रमुख नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक भव्य समारोह के दौरान रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत एनडीए शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
शपथ ग्रहण की मुख्य बातें:
- डिप्टी सीएम: भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को एक बार फिर उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) की जिम्मेदारी दी गई है।
- कैबिनेट विस्तार: नीतीश कुमार के साथ 18 कैबिनेट मंत्रियों ने भी शपथ ली।
- प्रमुख मंत्री: नई कैबिनेट में जिन प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है, उनमें दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव शामिल हैं।
दिग्गजों का जमावड़ा
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के अलावा आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। शपथ ग्रहण के बाद सीएम नीतीश कुमार ने बिहार की जनता का धन्यवाद किया और पीएम मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि एनडीए सरकार बिहार को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने के अपने संकल्प पर अडिग है।
विपक्ष ने दी बधाई: ‘उम्मीद है वादे पूरे होंगे’
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद विपक्षी दल राजद (RJD) के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। 2025 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का नेतृत्व करने वाले तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर सीएम नीतीश कुमार को बधाई दी।
तेजस्वी यादव ने कहा,
“मैं नई सरकार को बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि यह सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी और चुनाव में किए गए अपने सभी वादों को पूरा करेगी।”
“सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र और शिक्षा-स्वास्थ्य में बड़े सुधारों के वादे के साथ, नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए सरकार ने बिहार में अपनी नई पारी का आगाज कर दिया है।
बिहार के लिए एक नई उम्मीद: नीतीश कुमार का संकल्प और विकास की नई दिशा
बिहार की राजनीति में एक बार फिर नया अध्याय शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का पुनः शपथ लेना केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि राज्य के लिए एक नई कार्ययोजना का आगाज है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने जिस स्पष्टता के साथ अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं, उससे यह संकेत मिलता है कि यह कार्यकाल बिहार को विकास के अगले चरण में ले जाने वाला होगा। मुख्यमंत्री का यह बयान— “राज्य का विकास, कानून-व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार—यही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है,” बिहार के भविष्य का रोडमैप तैयार करता है।
नीतीश कुमार: 10 बार मुख्यमंत्री बनने का सफर
| क्रम | शपथ की तारीख | विवरण / राजनीतिक घटनाक्रम |
| 1. | 3 मार्च 2000 | समता पार्टी (अकेले), पहली बार सीएम बने, लेकिन बहुमत न होने पर 7 दिन में इस्तीफा दिया। |
| 2. | 24 नवंबर 2005 | एनडीए (BJP+JDU) की पूर्ण बहुमत के साथ वापसी। |
| 3. | 26 नवंबर 2010 | विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद फिर सीएम बने। |
| 4. | 22 फरवरी 2015 | जीतन राम मांझी को हटाकर चौथी बार कमान संभाली। |
| 5. | 20 नवंबर 2015 | महागठबंधन (RJD+Congress) की जीत के बाद 5वीं बार शपथ ली। |
| 6. | 27 जुलाई 2017 | महागठबंधन तोड़कर रातों-रात एनडीए (BJP) के साथ सरकार बनाई। |
| 7. | 16 नवंबर 2020 | 2020 चुनाव के बाद एनडीए के नेतृत्व में 7वीं बार शपथ ली। |
| 8. | 10 अगस्त 2022 | एनडीए छोड़ा और RJD (महागठबंधन) के साथ 8वीं बार सरकार बनाई। |
| 9. | 28 जनवरी 2024 | महागठबंधन से अलग होकर वापस एनडीए (BJP) के साथ 9वीं बार शपथ ली। |
| 10. | नवंबर 2025 (ताज़ा) | इस बार उन्होंने रोजगार और कानून-व्यवस्था के संकल्प के साथ 10वीं बार शपथ ली है। |
यह एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है: भारतीय राजनीति के इतिहास में किसी एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में 10 बार शपथ लेने वाले वह पहले और एकमात्र नेता बन गए हैं।
युवाओं और रोजगार पर विशेष जोर
बिहार में रोजगार हमेशा से एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री ने शपथ लेते ही युवाओं को केंद्र में रखकर जो संदेश दिया है, वह आश्वस्त करने वाला है। बिहार की एक बड़ी आबादी युवाओं की है, और अक्सर बेहतर अवसरों की तलाश में उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरियां देना ही नहीं, बल्कि राज्य में निवेश का ऐसा माहौल बनाना है जिससे निजी क्षेत्र में भी रोजगार सृजित हों। अगर सरकार रोजगार के वादे को धरातल पर उतारने में सफल होती है, तो यह बिहार से होने वाले ‘पलायन’ को रोकने में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
कानून-व्यवस्था: सुशासन की वापसी
नीतीश कुमार की पहचान हमेशा से ‘सुशासन बाबू’ के रूप में रही है। उन्होंने अपनी पहली ही प्रतिक्रिया में कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देकर यह संदेश दिया है कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं होगी। विकास की पहली शर्त सुरक्षा होती है। जब व्यापारी, महिलाएं और आम नागरिक सुरक्षित महसूस करते हैं, तभी राज्य की अर्थव्यवस्था गति पकड़ती है। मुख्यमंत्री का यह संकल्प यह बताता है कि प्रशासन को सख्त निर्देश दिए जाएंगे और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बुनियादी ढांचे में सुधार
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े सुधारों की बात कही है, जो सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन को प्रभावित करते हैं। बिहार के दूरदराज के गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना और स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती रही है। नई सरकार का संकल्प है कि शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे कौशल विकास (Skill Development) से जोड़ा जाए, ताकि युवा आत्मनिर्भर बन सकें। वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का अर्थ है कि इलाज के लिए लोगों को पटना या दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े।
सबका साथ, सबका विकास: एक समावेशी दृष्टि
“सबका साथ–सबका विकास” का मंत्र यह दर्शाता है कि सरकार किसी जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करेगी। बिहार जैसे विविधतापूर्ण राज्य में समावेशी विकास अत्यंत आवश्यक है। इसका अर्थ है कि विकास की किरण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। चाहे वह सड़क निर्माण हो, बिजली की आपूर्ति हो या कल्याणकारी योजनाएं, सरकार का लक्ष्य हर बिहारी का उत्थान है।
चुनौतियों के बीच नई राह
निस्संदेह, चुनौतियां कम नहीं हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अनुभव और शपथ लेते ही उनकी स्पष्ट दृष्टि यह उम्मीद जगाती है कि बिहार बदलाव की राह पर है। रोजगार, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित यह नई शुरुआत बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की क्षमता रखती है। अब देखना यह होगा कि इन संकल्पों को कितनी तेजी से और कितनी प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जाता है। बिहार की जनता की नजरें अब इस ‘नई शुरुआत’ पर टिकी हैं।














